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अस्थायी ही सही, कोरोना मरीजों के इलाज से दूर होगा मन का मलाल
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वाराणसी। पद्मभूषण स्व. पं. राजन मिश्र के नाम पर अस्थायी कोविड अस्पताल ही सही, लेकिन जब यहां से मरीज स्वस्थ होकर निकलेंगे तो मन को बहुत संतोष मिलेगा। सरकार की इस पहल के लिए साधुवाद है। यह कहना है पद्मभूषण पं. साजन मिश्र का।
बड़े भाई को खोने का दुख तो बहुत है। भले ही समय से उनको वेंटीलेंटर नहीं मिल सका, लेकिन उनके नाम पर बने अस्थायी कोविड अस्पताल में 750 मरीजों का इलाज होगा, इससे मन का मलाल जरूर दूर होगा। बड़े भैया की स्मृति में इस अस्पताल को सरकार ने समर्पित किया है। उनकी यह पहल सराहनीय है। 15 दिनों में डीआरडीओ ने इसको तैयार किया है। उनके नाम पर इतना बड़ा इंतजाम किया गया है और जरूरतमंदों को इसका लाभ मिलेगा। अपने दुख को साझा करते हुए पं. साजन मिश्र ने कहा कि समय-समय की बात है, बड़े भैया के लिए जब तक वेंटीलेटर का इंतजाम हुआ तब तक वह उनके किसी काम का नहीं था। उनके नाम पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी तो मन का यह मलाल जरूर कम होगा। सरकार की सोच सराहनीय है कि पं. राजन मिश्र को यह अस्पताल समर्पित किया जाए भले ही अस्थायी ही सही। सरकार को यह भी सोचना चाहिए कि उनकी स्मृति के लिए कुछ स्थायी व्यवस्था भी भविष्य में हो। यह और भी बेहतर होगा। पं. राजन मिश्र के चाहने वाले और शुभचिंतकों की यह इच्छा है कि उनकी स्मृति में कुछ स्थायी किया जाए। डीआरडीओ और सेना के नियंत्रण में संचालित होने वाले अस्पताल से लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिले। यही हमारी कामना है। सभी से करबद्ध निवेदन है कि पं. राजन मिश्र को किसी भी तरह के विवाद और राजनीति में न घसीटें। वर्तमान में संपूर्ण विश्व महामारी से परेशान है और हम प्रार्थना करते हैं कि सभी लोग सुरक्षित व स्वस्थ रहें।
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बड़े भाई को खोने का दुख तो बहुत है। भले ही समय से उनको वेंटीलेंटर नहीं मिल सका, लेकिन उनके नाम पर बने अस्थायी कोविड अस्पताल में 750 मरीजों का इलाज होगा, इससे मन का मलाल जरूर दूर होगा। बड़े भैया की स्मृति में इस अस्पताल को सरकार ने समर्पित किया है। उनकी यह पहल सराहनीय है। 15 दिनों में डीआरडीओ ने इसको तैयार किया है। उनके नाम पर इतना बड़ा इंतजाम किया गया है और जरूरतमंदों को इसका लाभ मिलेगा। अपने दुख को साझा करते हुए पं. साजन मिश्र ने कहा कि समय-समय की बात है, बड़े भैया के लिए जब तक वेंटीलेटर का इंतजाम हुआ तब तक वह उनके किसी काम का नहीं था। उनके नाम पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी तो मन का यह मलाल जरूर कम होगा। सरकार की सोच सराहनीय है कि पं. राजन मिश्र को यह अस्पताल समर्पित किया जाए भले ही अस्थायी ही सही। सरकार को यह भी सोचना चाहिए कि उनकी स्मृति के लिए कुछ स्थायी व्यवस्था भी भविष्य में हो। यह और भी बेहतर होगा। पं. राजन मिश्र के चाहने वाले और शुभचिंतकों की यह इच्छा है कि उनकी स्मृति में कुछ स्थायी किया जाए। डीआरडीओ और सेना के नियंत्रण में संचालित होने वाले अस्पताल से लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिले। यही हमारी कामना है। सभी से करबद्ध निवेदन है कि पं. राजन मिश्र को किसी भी तरह के विवाद और राजनीति में न घसीटें। वर्तमान में संपूर्ण विश्व महामारी से परेशान है और हम प्रार्थना करते हैं कि सभी लोग सुरक्षित व स्वस्थ रहें।
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