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शराबबंदी के बहाने समाजवादियों में पैठ

Fri, 13 May 2016 01:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 13 May 2016 01:49 AM IST
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Temperance Socialists shed penetration
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।
शराबबंदी के बहाने जदयू देश भर के समाजवादियों को एकजुट करने की कोशिश में जुट गई है। इसकी शुरुआत उसने प्रख्यात समाजवादी नेता लोकबंधु राजनारायण की जन्मस्थली से की। पार्टी नेताओं ने मंच से कई बार डॉ. राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण से लगायत विश्वनाथ प्रताप सिंह जैसे समाजवादियों का नाम लिया। कहा कि हमें समाजवाद की परंपरा को आगे बढ़ाना है। दरअसल, जनता पार्टी ने 1977 के चुनाव में शराबबंदी को अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने शराबबंदी लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी, लेकिन कुछ दिन बाद ही उनकी सरकार गिर गई। अब नीतीश कुमार इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।
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शराबबंदी स्वतंत्रता आंदोलन का मुख्य मुद्दा भी रहा है। महात्मा गांधी इसके पुरजोर समर्थक थे। गांधी जी का गृह राज्य होने के नाते ही गुजरात में सबसे पहले शराबबंदी लागू की गई थी। इसके बाद मोरारजी देसाई की सरकार ने पूरे देश में शराबबंदी लागू करने का प्रयास किया, लेकिन सरकार गिरने की वजह से यह काम अधूरा रहा। बिहार के पिछले विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने पार्टी के घोषणा पत्र में शराबबंदी का जिक्र किया था। सरकार बनने के बाद उन्होंने पहले देशी और फिर विदेशी शराब पर भी प्रतिबंध लगा दिया। उनके  इस फैसले देश भर में स्वागत हो रहा है। तमिलनाडु चुनाव में प्रमुख दल डीएमके ने अपने घोषणा पत्र में शराबबंदी को रखा है। नीतीश की यह मुहिम खास समाजवादियों को काफी रास आ रही है। इसके जरिए जदयू की मंशा अलग-अलग दलों में बिखरे समाजवादियों को एक मंच लाने की है।
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पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के साथ जुड़े रहे किसान मंच के नेता विनोद सिंह ने तो बाकायदा नीतीश कुमार के मंच से शराबबंदी का स्वागत किया। समाजवादी नेता विजय नारायण, प्रो. विश्वासचंद, प्रो. सुरेंद्र प्रताप कहते हैं नीतीश कुमार की शराबबंदी की पहल पर देश भर में अमल होना चाहिए। इस अभियान को सियासी चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यह स्वस्थ समाज की नींव रखने वाली मुहिम है।
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