गंगा में डूबा किशोर: वाराणसी के रैपुरिया घाट पर चार दोस्तों के साथ आया था स्नान करने, तीन को बचाया गया
वाराणसी के चितईपुर क्षेत्र स्थित रैपुरिया घाट के समीप गंगा स्नान के दौरान चार दोस्त गंगा डूबने लगे। तीन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। एक किशोर की तलाश की जा रही है।
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वाराणसी के टिकरी गांव के सामने रैपुरिया घाट पीपा पुल के पास गंगा में स्नान के दौरान रविवार को किशोर डूब गया। जबकि मल्लाहों ने तीन अन्य साथियों को डूबने से बचाया। चितईपुर पुलिस और जल पुलिस के गोताखोरों के जरिए किशोर की खोजबीन की जा रही है।
लंका थाना अंतर्गत सीरगोवर्धन निवासी गोरा यादव पड़ोस में रहने वाले वरुण, विशाल, पंडू और लल्लू यादव (16) को लेकर बनपुरवा स्थित स्वामी वितारागानंद की कुटिया पर जाने के लिए निकला। हालांकि सभी कुटिया पर नहीं जाकर टिकरी गांव के सामने रैपुरिया घाट पर पहुंचकर गंगा में स्नान करने लगे।
पीपा पुल की रस्सी पकड़ तीन लोग बचे
गोरा यादव घाट किनारे नहा रहा था तो वहीं लल्लू, वरूण, पंडू और विशाल नहाते हुए आगे बढ़ गए। इसी बीच सभी तेज बहाव में बहने लगे। रैपुरिया घाट पर पीपा पुल की रस्सी को वरुण, पंडू और विशाल ने पकड़ लिया और वहीं लल्लू रस्सी नहीं पकड़ पाया और वह आगे जाकर गहरे पानी में समा गया। यह देख तीनों दोस्त शोर मचाने लगे।
आसपास के मल्लाह और लोगों ने किसी तरह तीनों को बाहर निकाला तो वहीं लल्लू की खोजबीन में जुटे। सूचना पाकर चितईपुर थानाध्यक्ष मिर्जा रिजवान बेग भी फोर्स संग पहुंचे और जल पुलिस को सूचना दी। हादसे की सूचना गोरा यादव ने सीरगोवर्धन निवासी लल्लू के पिता तेजू को दी।
हादसे की सूचना मिलते ही रैपुरिया घाट पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और जल पुलिस के गोताखोर और स्थानीय लोग डूबे लल्लू की खोजबीन में जुटे। देर शाम तक लल्लू की तलाश जारी रही। दो भाईयों में सबसे बड़ा लल्लू इस साल हाईस्कूल का परीक्षा दिया था। परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। इस संबंध में चितईपुर थानाध्यक्ष मिर्जा रिजवान बेग ने बताया कि रैपुरिया घाट के पास बहाव तेज होने के कारण रेस्क्यू टीम को परेशानी हो रही है। हालांकि जल पुलिस और एनडीआरएफ की भी सहायता ली जा रही है।
रैपुरिया घाट पर डूब चुकी हैं तीन बहनें
बनारस-मिर्जापुर बार्डर के रैपुरिया घाट पर गंगा में पिछले 19 दिसंबर को भी नाव पलट गई थी। एक ही परिवार की तीन बहनें डूब गई। इसमें एक दस दिन बाद शिवांगी का शव मिला था, जबकि साक्षी और आकांक्षा का आज तक पता नहीं चला। ग्रामीणों के अनुसार रैपुरिया घाट पर गंगा में बहाव तेज होता है, यहां अच्छे-अच्छे तैराक बहाव में टिक नहीं पाते हैं।