{"_id":"59aee24a4f1c1b69078b46c1","slug":"teachers-day-celebration-in-varanasi-school-and-college","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Teachers day: वाराणसी में कहीं शिक्षकों ने किया कैंटवॉक तो कहीं छात्रों ने दी मनमोहक प्रस्तुति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Teachers day: वाराणसी में कहीं शिक्षकों ने किया कैंटवॉक तो कहीं छात्रों ने दी मनमोहक प्रस्तुति
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 06 Sep 2017 02:20 PM IST
विज्ञापन
वाराणसी के स्कूलों में हुए विविध सांस्कृतिक आयोजन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षक दिवस के तौर पर मंगलवार को पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। गुरु शिष्य परंपरा को पल्लवित और पोषित कर रहे शहर के सभी विद्यालयों में शिक्षक दिवस पर कहीं शिक्षकों का सम्मान हुआ तो कहीं शिक्षकों के सम्मान में सांस्कृतिक आयोजन हुए।
दिल्ली पब्लिक स्कूल में शिक्षक दिवस पर पद्मश्री प्रह्लाद टिपनियाजी का कबीर भजन हुआ। उन्होंने कबीर वाणी में गुरु महिमा बताई। ...मत कर मान गुमान, जो घर जाले आपना, इस घट अंतर बाग बगीचे जैसे सूफी भजनों से मुग्ध कर दिया।
ऐसे ही सेठ एमआर जैपुरिया स्कूल बाबतपुर में शिक्षक दिवस मनाया गया। यहां शिक्षकों ने रैंप पर कैट वॉक किया। शिक्षकों ने ही नृत्य संगीत की प्रस्तुतियां दीं। हैप्पी मॉडल स्कूल के सिगरा शाखा में शिक्षक दिवस पर स्कूल के सभी शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
इसी तरह इंटरनेशनल हिंदू स्कूल नगवां में शिक्षक दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। बच्चों ने नाटक के माध्यम शिक्षा और शिक्षक के महत्व को समझाया। एजूकेशनल वर्ल्ड बजरडीहा में भी शिक्षक दिवस मनाया गया। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में मंगलवार को शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
यहां आराजीलाइन के सभी परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की उपस्थिति में 31 मार्च को सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इनरव्हील क्लब नार्थ उदया की ओर से मंगलवार को भोगाबीर लंका में शिक्षक दिवस मनाया।
क्लब ने उन सदस्यों को सम्मानित किया जो स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रही हैं। इनरव्हील क्लब ऑफ वाराणसी नार्थ की सदस्यों ने मंगलवार को तीज और शिक्षक दिवस की खुशियां एक साथ मनाईं। एक ओर जहां कजरी गीतों पर नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुतियां हुईं, वहीं प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों की शिक्षिकाओं का सम्मान भी हुआ।
ये वो शिक्षिकाएं थीं जिन्हें बच्चों की कसौटी पर परखा गया था, यानी उन्हें सम्मानित करने के लिए बच्चों ने ही उनका चयन किया था।तीजोत्सव में सदस्यों ने नृत्य संगीत के कार्यक्रमों के बीच ‘संस्कार’ लघु नाटिका का मंचन किया। संस्कार पर ही आधारित प्रश्नोत्तरी हुई।
विज्ञापन
दिल्ली पब्लिक स्कूल में शिक्षक दिवस पर पद्मश्री प्रह्लाद टिपनियाजी का कबीर भजन हुआ। उन्होंने कबीर वाणी में गुरु महिमा बताई। ...मत कर मान गुमान, जो घर जाले आपना, इस घट अंतर बाग बगीचे जैसे सूफी भजनों से मुग्ध कर दिया।
विज्ञापन
ऐसे ही सेठ एमआर जैपुरिया स्कूल बाबतपुर में शिक्षक दिवस मनाया गया। यहां शिक्षकों ने रैंप पर कैट वॉक किया। शिक्षकों ने ही नृत्य संगीत की प्रस्तुतियां दीं। हैप्पी मॉडल स्कूल के सिगरा शाखा में शिक्षक दिवस पर स्कूल के सभी शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
इसी तरह इंटरनेशनल हिंदू स्कूल नगवां में शिक्षक दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। बच्चों ने नाटक के माध्यम शिक्षा और शिक्षक के महत्व को समझाया। एजूकेशनल वर्ल्ड बजरडीहा में भी शिक्षक दिवस मनाया गया। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में मंगलवार को शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
यहां आराजीलाइन के सभी परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की उपस्थिति में 31 मार्च को सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इनरव्हील क्लब नार्थ उदया की ओर से मंगलवार को भोगाबीर लंका में शिक्षक दिवस मनाया।
क्लब ने उन सदस्यों को सम्मानित किया जो स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रही हैं। इनरव्हील क्लब ऑफ वाराणसी नार्थ की सदस्यों ने मंगलवार को तीज और शिक्षक दिवस की खुशियां एक साथ मनाईं। एक ओर जहां कजरी गीतों पर नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुतियां हुईं, वहीं प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों की शिक्षिकाओं का सम्मान भी हुआ।
ये वो शिक्षिकाएं थीं जिन्हें बच्चों की कसौटी पर परखा गया था, यानी उन्हें सम्मानित करने के लिए बच्चों ने ही उनका चयन किया था।तीजोत्सव में सदस्यों ने नृत्य संगीत के कार्यक्रमों के बीच ‘संस्कार’ लघु नाटिका का मंचन किया। संस्कार पर ही आधारित प्रश्नोत्तरी हुई।
शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता
बीएचयू केएन उडुप्पा सभागार में शिक्षक दिवस
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू केएन उडुप्पा सभागार में शिक्षक दिवस पर मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के 51 सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित किया गया। यह पहला अवसर था जब कैंपस से बाहर चलने वाले विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों के शिक्षकों को भी यहां सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवांग समतेन ने कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे किताबी ज्ञान के साथ-साथ छात्रों को संस्कारवान भी बनाएं। छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह की देखरेख में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. समतेन ने महामना और डॉ. राधाकृष्णन के योगदान का भी जिक्र किया।
समारोह में छात्रों की अनुपस्थिति देख उन्होंने कहा कि ऐसे मौकों पर उनका होना भी जरूरी है, इससे उन्हें प्रेरणा मिलती। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षक दिवस परंपरा और संस्कृति का संवाहक है।
आज हम सभी को स्व-अनुशासित रहने की जरूरत है। कहा कि शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता। सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान के मौके पर सभागार में कई कुर्सियां खाली रहीं।
बैठने वालों में सबसे अधिक सम्मानित होने वाले ही शिक्षक थे। इस बात को इशारे-इशारे में मुख्य अतिथि ने भी अपने उद्बोधन में इंगित किया। छात्र अधिष्ठाता ने इस बारे में कहा कि समारोह के लिए सभी शिक्षकों को आमंत्रित किया जाता है लेकिन व्यस्तताओं की वजह से तमाम लोग नहीं आ सके।
मुख्य अतिथि केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवांग समतेन ने कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे किताबी ज्ञान के साथ-साथ छात्रों को संस्कारवान भी बनाएं। छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह की देखरेख में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. समतेन ने महामना और डॉ. राधाकृष्णन के योगदान का भी जिक्र किया।
समारोह में छात्रों की अनुपस्थिति देख उन्होंने कहा कि ऐसे मौकों पर उनका होना भी जरूरी है, इससे उन्हें प्रेरणा मिलती। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षक दिवस परंपरा और संस्कृति का संवाहक है।
आज हम सभी को स्व-अनुशासित रहने की जरूरत है। कहा कि शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता। सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान के मौके पर सभागार में कई कुर्सियां खाली रहीं।
बैठने वालों में सबसे अधिक सम्मानित होने वाले ही शिक्षक थे। इस बात को इशारे-इशारे में मुख्य अतिथि ने भी अपने उद्बोधन में इंगित किया। छात्र अधिष्ठाता ने इस बारे में कहा कि समारोह के लिए सभी शिक्षकों को आमंत्रित किया जाता है लेकिन व्यस्तताओं की वजह से तमाम लोग नहीं आ सके।