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आपसी दुश्मनी और जमीनी विवाद बना तारिक की हत्या का कारण
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 04 Dec 2017 02:08 PM IST
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मोहम्मद तारिक
- फोटो : file photo
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माफिया मुन्ना बजरंगी के करीबी ठेकेदार मोहम्मद तारिक की हत्या की घटना के तार पूर्वांचल से जुड़े होने की आशंका ने पुलिस के कान खड़े कर दिए हैं। तारिक के परिवारीजनों ने रिटायर्ड डिप्टी एसपी जीएन सिंह, उनके बेटे प्रदीप सिंह समेत चार के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया है।
परिवारीजनों का कहना है कि प्रदीप और मुन्ना बजरंगी कभी साथ थे। बाद में अनबन होने पर दोनों एक-दूसरे के करीबियों की हत्याएं कराने लगे। परिवारीजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने छानबीन तेज कर दी है।
पुलिस सूत्रों की मानें तो एक शूटर के बारे में सुराग लगा है, जो घटना से जुड़ा हो सकता है। कभी बजरंगी गिरोह के लिए काम करने वाले बलिया निवासी इस शूटर का परिवार लंबे समय से बनारस में रहता है।
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पिछले कुछ दिनों से उसने बजरंगी गिरोह से दूरी बना ली है और उसके विरोधियों से हाथ मिल लिया है। घटना की तह तक पहुंचने के लिए लखनऊ पुलिस के साथ वाराणसी पुलिस ने तथ्यों को साझा किया है।
अपनों में मनमुटाव के अलावा पुलिस ठेकेदारी की प्रतिद्वंद्विता, टेंडर विवाद और विवादित जमीनों की पंचायत जैसे पहलुओं पर भी छानबीन में जुटी है।पुलिस सूत्रों के मुताबिक मिर्जापुर में करीब सात करोड़ रुपये मूल्य की विवादित जमीन पर तारिक की नजर थी।
इस पर पूर्वांचल के अन्य माफिया गुट भी नजरें गड़ाए हैं। जमीन हथियाने के लिए बजरंगी गिरोह कई बार पंचायत भी कर चुका था। तारिक ने करीब एक करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया था। इससे प्रतिद्वंद्वी गुट खार खाए थे।
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परिवारीजनों का कहना है कि प्रदीप और मुन्ना बजरंगी कभी साथ थे। बाद में अनबन होने पर दोनों एक-दूसरे के करीबियों की हत्याएं कराने लगे। परिवारीजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने छानबीन तेज कर दी है।
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पुलिस सूत्रों की मानें तो एक शूटर के बारे में सुराग लगा है, जो घटना से जुड़ा हो सकता है। कभी बजरंगी गिरोह के लिए काम करने वाले बलिया निवासी इस शूटर का परिवार लंबे समय से बनारस में रहता है।
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पिछले कुछ दिनों से उसने बजरंगी गिरोह से दूरी बना ली है और उसके विरोधियों से हाथ मिल लिया है। घटना की तह तक पहुंचने के लिए लखनऊ पुलिस के साथ वाराणसी पुलिस ने तथ्यों को साझा किया है।
अपनों में मनमुटाव के अलावा पुलिस ठेकेदारी की प्रतिद्वंद्विता, टेंडर विवाद और विवादित जमीनों की पंचायत जैसे पहलुओं पर भी छानबीन में जुटी है।पुलिस सूत्रों के मुताबिक मिर्जापुर में करीब सात करोड़ रुपये मूल्य की विवादित जमीन पर तारिक की नजर थी।
इस पर पूर्वांचल के अन्य माफिया गुट भी नजरें गड़ाए हैं। जमीन हथियाने के लिए बजरंगी गिरोह कई बार पंचायत भी कर चुका था। तारिक ने करीब एक करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया था। इससे प्रतिद्वंद्वी गुट खार खाए थे।
नेताओं से थे अच्छे संबंध
हत्या
- फोटो : demo pic
एक और जानकारी पुलिस के हाथ लगी है। खजुरी निवासी एक बदमाश से तारिक की गहरी दोस्ती थी। दोनों बजरंगी के लिए काम करते थे। महीने भर पहले दोनों के बीच अनबन हो गई थी। इसके बाद से खजुरी निवासी बदमाश ने बजरंगी गैंग से दूरी बना ली थी।
पुलिस के मुताबिक पूर्ववर्ती सपा सरकार के कुछ नेताओं से तारिक के अच्छे संबंध थे। सरकार बदलने के बाद वह सत्ता के गलियारों तक अपनी पैठ बनाने की कोशिश में था। कोतवाली और आदमपुर क्षेत्र के कुछ बदमाशों से तारिक की करीबी रही। इनमें कुछ बदमाश जिला जेल में निरुद्ध हैं।
तारिक की हत्या के दूसरे दिन शनिवार को भी विश्वेश्वरगंज स्थित पुश्तैनी मकान पर सन्नाटा पसरा रहा। करीबियों ने बताया कि लखनऊ से तारिक का शव लेकर उसके पिता मुनीर और बड़े भाई मो. आसिफ घर के लिए रवाना हो चुके हैं।
रात 12 बजे तक यहां पहुंचने की बात कही जा रही थी। उधर, इलाके में तारिक की हत्या चर्चा का विषय रही। मुहल्ले में बेहद सादगी से रहने और कभी किसी से कोई विवाद न करने वाले तारिक की सनसनीखेज हत्या से हतप्रभ दिखे।
पुलिस के मुताबिक पूर्ववर्ती सपा सरकार के कुछ नेताओं से तारिक के अच्छे संबंध थे। सरकार बदलने के बाद वह सत्ता के गलियारों तक अपनी पैठ बनाने की कोशिश में था। कोतवाली और आदमपुर क्षेत्र के कुछ बदमाशों से तारिक की करीबी रही। इनमें कुछ बदमाश जिला जेल में निरुद्ध हैं।
तारिक की हत्या के दूसरे दिन शनिवार को भी विश्वेश्वरगंज स्थित पुश्तैनी मकान पर सन्नाटा पसरा रहा। करीबियों ने बताया कि लखनऊ से तारिक का शव लेकर उसके पिता मुनीर और बड़े भाई मो. आसिफ घर के लिए रवाना हो चुके हैं।
रात 12 बजे तक यहां पहुंचने की बात कही जा रही थी। उधर, इलाके में तारिक की हत्या चर्चा का विषय रही। मुहल्ले में बेहद सादगी से रहने और कभी किसी से कोई विवाद न करने वाले तारिक की सनसनीखेज हत्या से हतप्रभ दिखे।