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3000 किमी पदयात्रा कर पहली बार काशी पहुंचे थे स्वामी जयेंद्र सरस्वती, कराई थी वरुण गांधी की शादी

Thu, 01 Mar 2018 03:30 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 01 Mar 2018 03:30 PM IST
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swami jayendra saraswathi arrived kashi after three thousand kilometer padaytra
शंकराचार्य बनने के बाद पहली बार 1973 में आए थे हनुमान घाट मठ - फोटो : अमर उजाला
कांचीकाम कोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती का काशी से गहरा नाता था। कांचीकाम कोटि पीठ का शंकराचार्य बनने के बाद वह पहली बार 1973 में काशी आए। लगभग तीन हजार किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए जब वह रामनगर के रास्ते काशी में दाखिल हुए तो उनका राजशाही स्वागत किया गया था।
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हनुमान घाट स्थित मठ में तब उन्होंने प्रवास किया था। आखिरी बार सात मार्च 2013 में वह भाजपा सांसद वरुणा गांधी की शादी में काशी आए थे। उनके ही सानिध्य में शादी की रस्में कांची कामकोटेश्वर मंदिर में हुई थीं।
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हनुमान घाट स्थित माधवाचार्य मठ के व्यवस्थापक भाऊ आचार्य टोनपे के अनुसार, शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती के दिल में काशी से बसती थी। पहली बार जब वह अपने तीन सौ अनुयायियों के साथ कांची से करीब तीन हजार किमी की पदयात्रा करते हुए काशी पहुंचे थे, तब हाथी, घोड़े और ऊंट, बैंड-बाजे के साथ वह मठ पहुंचे  थे। तमिलनाडु के थंजाउर में 18 जुलाई 1935 में जन्मे जयेंद्र सरस्वती के देहावसान से काशी का संत समाज और श्रद्धालु मर्माहत हैं। 
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 हनुमान घाट स्थित कांचीकाम कोटि मठ में उनके अनुयायियों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मौजूदगी में शांति पाठ का आयोजन किया और पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। कई अन्य जगह श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर उन्हें नमन किया गया।

कांची मठ के प्रबंधक वीएस सुब्रह्मण्यम मणि और गुरुचरण सेवा समिति के संस्थापक श्रीनारायण घनपाठी कांचीपुरम के लिए रवाना हो गए हैं। हनुमान घाट स्थित मठ में गुरुवार को भी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है। 

वैचारिक मतभेद के बाद भी गंगा पर समर्थन

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हनुमान घाट पर कांचीकाम कोटि मठ - फोटो : अमर उजाला
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद से वैचारिक मतभेद के बावजूद गंगा के मुद्दे पर स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने उनका समर्थन किया। जब स्वामी स्वरूपानंद ने गंगा के निर्मल और अविरल स्वरूप के लिए आवाज उठाई तो उनके समर्थन में स्वामी जयेंद्र सरस्वती भी समर्थकों के साथ आगे आए। गंगा निर्मलता के लिए जयेंद्र सरस्वती ने हमेशा प्रयत्न किया।

स्वामी चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती की जयंती महोत्सव टला
वाराणसी। कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती के देहावसान के चलते यहां मठ में एक से आठ मार्च तक मनाया जाने वाला स्वामी चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती का 125वीं जयंती महोत्सव एक दिन के लिए टाल दिया गया है। गुरु चरण सेवा समिति के चंद्रशेखर घनपाठी ने बताया कि अब यह आयोजन दो मार्च से शुरू होगा। पीठाधीश्वर स्वामी चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती के बाद ही स्वामी जयेंद्र सरस्वती कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य बने थे।

सनातन धर्म की अपूरणीय क्षति हुई है। स्वामी जयेंद्र सरस्वती के प्रयासों से संस्कृत विद्या का संरक्षण हुआ। कई बार उनसे भेंट हुई। वह महान संत थे। उन्होंने अन्नपूर्णा मंदिर में अभिषेक किया था। - रामेश्वर पुरी, अन्नपूर्णा मठ मंदिर के महंत

शंकरचार्य जयेंद्र सरस्वती भारतीय सनातन संस्कृति के पुरोधा थे। जिन्होंने पूरा जीवन तप और साधना में समर्पित किया। विश्व को एकता और सद्भाव का संदेश दिया। भारत को शांतिमय, भक्तिमय बनाने का प्रयास किया। - संतोष दास सतुआ बाबा, महामंडलेश्वर, सतुआ बाबा आश्रम

रामजन्मभूमि पर जब पूरी दुनिया में कोलाहल मचा था तब स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने हिंदू सनातनधर्मियों की उदारता को प्रदर्शित किया। उनमें दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ने का गुण था। उनकी महान प्रेरणा को जीवन में आत्मसात करने की जरूरत है। - स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, श्री विद्या मठ 
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