काशी की बहू ने कहा- सुषमा जी नहीं होती तो आज मेरा सुहाग नहीं होता
भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के मंगलवार रात आकस्मिक निधन से पूरा देश शोक में डूब गया। वहीं उनके निधन पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है। जंतर मंतर स्थित आवास पर उनको श्रद्धांजलि देने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भावुक हो गए। डबडबाई आंखों के साथ उन्होंने सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि दी और परिवारीजनों को सांत्वना दी।
विदेश मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज ने कई लोगों की मदद की थी। वह कई भारतीयों को विदेशों में फंसे होने पर उनके देश लेकर आईं। साथ ही कई भारतीयों की पढ़ाई और मेडिकल, इलाज के लिए उनकी मदद की। उन्होंने वीजा संबंधित भारतीयों की परेशानियों का अच्छी तरह से निपटारा किया। ऐसे ही सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्री रहते हुए एक काशी की इस बहू के पति को भारत लाने में मदद की थी।
वाराणसी के कंदवा के राजतिलक नगर कालोनी में बुधवार अपने आवास पर संतोष भारद्वाज ने बताया कि मंगलवार रात को जब मैंने टेलीविजन पर सुषमा जी के निधन के बारे मे सुना तो। मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि सुषमा स्वराज जी अब इस दुनिया में नहीं रही।
पीड़िता के ट्वीट
संतोष ने अतीत में जाते हुए बताया की 25 मार्च 2016 को नाइजीरिया में मालवाहक शिप को ले जाते समय समुद्री लुटेरों ने मेरा अपरहण कर लिया। अपहरण कर मुझे नाइजीरिया के किसी जंगल में रखा। वहां पर बिस्कुट और नूडल्स खाकर रहता था। मेरी पत्नी कंचन भारद्वाज ने तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया।
कंचन ने बताया कि ट्वीट का तुरंत जबाब देते हुए सुषमा जी ने लिखा कि बहन तुम चिंता मत करो। तुम्हारे पति को मैं कुछ भी नहीं होने दूंगी। तब मुझे कुछ ढांढस बंधा, और मेरे सुहाग के लौटने की उम्मीद जगी।
संतोष ने आगे बताया की सुषमा जी के अथक प्रयास से समुद्री लुटेरों ने मुझे 10 मई को छोड़ दिया। मैं 11 मई को रात में वाराणसी पहुंचा। परिवार का कहना है कि सुषमा जी के जाने से हम लोगों के परिवार को बहुत ही बड़ा झटका लगा है। पत्नी ने कहा कि अगर सुषमा जी नहीं होती तो आज मेरा सुहाग नहीं होता।
विदेश मंत्री के रूप में सुषमा स्वराज का पीएम मोदी के साथ तालमेल बहुत ही अच्छा रहा है। पहले कार्यकाल के दौरान पीएम मोदी के विदेश दौरे को सफल बनाने के पीछे सुषमा स्वराज का बड़ा योगदान रहा। जहां-जहां पीएम मोदी ने विदेश यात्राएं की उनसे पहले सुषमा स्वराज ने वहां पहुंचकर दौरे को सफल बनाने की जमीन तैयार की थी।