संकट मोचन दरबार में सुरेश वाडेकर ने बदली गायिकी की फिजा

अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी Updated Sat, 11 Apr 2015 02:22 AM IST
suresh Wadekar Present In Sankat mochan Sangeet samaroh
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वाराणसी। ‘मेघा रे मेघा रे’, ‘सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यूं है’ और  ‘ऐ जिंदगी गले लगा ले...’ सरीखे लोकप्रिय गीत सुनाकर पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर ने शुक्रवार को संकट मोचन संगीत समारोह के 93 वें पुष्प में एक और पंखुड़ी जोड़ दी।  हनुमात दरबार में फिल्मी गीतों का यह नया सिलसिला भी पहली बार शुरू हुआ। उत्तर और दक्षिण के संगीत की सीमाओं को लांघ चुका संगीत समारोह उस्ताद गुलाम अली की गायकी अबकी बार न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय हो गया बल्कि गजल और फिल्मी नगमों भी इससे जुड़ गए।
तीसरी निशा के कार्यक्रमों की शुरुआत परंपरा के मुताबिक नृत्य से हुई। लखनऊ की कथक  नृत्यांगना मनीषा मिश्रा ने हनुमान वंदना के बाद आमद, उपज, टुकड़ा, तोड़ा, परन आदि की प्रस्तुति की। घुंघरूओं के लय
और भंगिमाओं से शृंगार के कई भाव प्रदर्शित किए। तबले पर पं. रविनाथ मिश्र, सारंगी पर विनोद मिश्र, सितार पर ध्रुवनाथ मिश्र ने संगत की। गायन पं. संतोष मिश्र ने किया। इनके बाद के दो कार्यक्रमों में आयोजकों को बदलाव करना पड़ा। इसके बाद मंच तेजेंद्र नारायण मजुमदार  को संभालना

था लेकिन दिल्ली के पं. मनीराम प्रसाद ने गायन प्रस्तुत किया। उन्होंने राग जन सम्मोहिनी की अवतारणा की। विलंबित ख्याल ‘मोरा जिया नाहीं लागे’ के बाद द्रुत बंदिश ‘सजन मन भायो...’ सुनाया। राग सोहनी में मध्य लय की बंदिश ‘ऐ री यशोदा संग करुंगी लड़ाई..’ और ‘सुनियो जी एक अरज हमारी बाबुला हमार...’ सुनाने के बाद भजन से कार्यक्रम को विराम दिया। तबले पर समर साहा, हारमोनियम पर पं. दिनकर शर्मा ने संगत की। पं.तेजेंद्र नारायण मजूमदार ने सरोद पर राग झिंझोटी की अवतारणा की। अलाप, जोड़, झाला के बाद

विलंबित और द्रुत गतें बजाकर उन्होंने खूब वाहवाही बटोरी। अंत में धुन बजाकर विराम लिया। तबले पर अनिंदो चटर्जी ने संगत की। रात ढलने के साथ पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर जैसे ही मंच पर आए, तालियों की गड़गड़ाहट के साथ हर हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे। आपने शुरुआत मराठी अभंग ‘ओंकारेश्वर तुझे नमो’ से की। उसके बाद गमन फिल्म की गजल के बाद फिल्मी गीतों की झड़ी लगा दी। तबले पर मुंबई के पं. ओजस अथिया ने संगत की।



संकट मोचन में आज
-ओडिसी नृत्य में रतिकांत और सुजाता महापात्रा, संतूर में पं सतीश व्यास, गायन में पं सुरेश वाडेकर, सितार में पं नीलाद्रि कुमार, गायन में पं उल्लास कसालकर, बांसुरी में पं रोनू मजमूदार तबला में पं. सुरेश तलवलकर होंगे।

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