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Varanasi News: विद्यार्थियों ने सीखी रुद्रयाग की विधि और मंत्रों का विनियोग
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के वेद विभाग की यज्ञशाला में सोमवार को स्मार्तमंडपस्थापनम विषयक प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम की प्रायोगिक कक्षा का द्वितीय दिवस संपन्न हुआ। इस अवसर पर रुद्रयाग से संबद्ध विविध कर्मकांड विषयों का सैद्धांतिक प्रशिक्षण एवं प्रायोगिक प्रयोग कराया गया।
प्रायोगिक कक्षा के दौरान विद्यार्थियों को रुद्रयाग की विधि, मंत्रविनियोग, आहुतिप्रणाली, द्रव्यविधान तथा अनुष्ठानिक अनुशासन की विस्तृत जानकारी दी गई। आचार्यों द्वारा यज्ञशाला में प्रत्यक्ष प्रदर्शन के माध्यम से कर्मकांडीय प्रक्रियाओं को समझाया गया, जिससे छात्रों को शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो सके। वेद विभागाध्यक्ष प्रो. महेन्द्र पांडेय ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय वैदिक अनुष्ठान परंपरा की गहन समझ विकसित करना तथा स्मार्त परंपरा के विविध आयामों से उन्हें परिचित कराना था। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय वैदिक अनुष्ठान परंपरा की गहन समझ विकसित करना है।
डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा ने कहा कि प्रायोगिक प्रशिक्षण में प्रतिभागी छात्रों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और रुद्रयाग से संबद्ध कर्मकांडीय ज्ञान को व्यवहार में उतारने का अवसर प्राप्त किया। इस प्रकार द्वितीय दिवस की प्रायोगिक कक्षा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यावहारिक शिक्षण की दृष्टि से अत्यंत सफल एवं सार्थक सिद्ध हुई। इस प्रायोगिक पाठ्यक्रम में डॉ. विजय कुमार शर्मा, पं. कमल शर्मा, पं. महेंद्र करज, डॉ. विजेन्द्र आर्य, डॉ. आशीष मणि त्रिपाठी उपस्थित रहे।
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प्रायोगिक कक्षा के दौरान विद्यार्थियों को रुद्रयाग की विधि, मंत्रविनियोग, आहुतिप्रणाली, द्रव्यविधान तथा अनुष्ठानिक अनुशासन की विस्तृत जानकारी दी गई। आचार्यों द्वारा यज्ञशाला में प्रत्यक्ष प्रदर्शन के माध्यम से कर्मकांडीय प्रक्रियाओं को समझाया गया, जिससे छात्रों को शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो सके। वेद विभागाध्यक्ष प्रो. महेन्द्र पांडेय ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय वैदिक अनुष्ठान परंपरा की गहन समझ विकसित करना तथा स्मार्त परंपरा के विविध आयामों से उन्हें परिचित कराना था। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय वैदिक अनुष्ठान परंपरा की गहन समझ विकसित करना है।
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डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा ने कहा कि प्रायोगिक प्रशिक्षण में प्रतिभागी छात्रों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और रुद्रयाग से संबद्ध कर्मकांडीय ज्ञान को व्यवहार में उतारने का अवसर प्राप्त किया। इस प्रकार द्वितीय दिवस की प्रायोगिक कक्षा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यावहारिक शिक्षण की दृष्टि से अत्यंत सफल एवं सार्थक सिद्ध हुई। इस प्रायोगिक पाठ्यक्रम में डॉ. विजय कुमार शर्मा, पं. कमल शर्मा, पं. महेंद्र करज, डॉ. विजेन्द्र आर्य, डॉ. आशीष मणि त्रिपाठी उपस्थित रहे।
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