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बैंक से करोड़ों की धोखाधड़ी उजागर होने से कारोबारियों में हड़कंप, इस बात का है डर

Sun, 18 Feb 2018 01:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी Updated Sun, 18 Feb 2018 01:49 PM IST
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stirred in businessman after fraud in banking system
करोड़ों का घोटाला - फोटो : demo pic
यूपी के भदोही जिले के कालीन निर्यातक द्वारा बैंक से साढ़े सात करोड़ की धोखाधड़ी का मामला उजागर होने के बाद कालीन कारोबारियों में हड़कंप है। सीबीआई के मामला दर्ज कराने के बाद तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि गहनता से छानबीन की जाए तो कालीन परिक्षेत्र भदोही में ऐसे और भी मामलों का खुलासा हो सकता है।
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ताजा प्रकरण के बाद जांच पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि कालीन औद्योगिक परिक्षेत्र में कई ऐसे निर्यातक हैं, जो केवल ड्रॉ-बैक, इंपोर्ट लाइसेंस के लिए बोगस और फर्जी व्यापार कर रहे हैं। धोखाधड़ी से मोटी कमाई करते हैं और सरकार को भी चूना लगाते हैं।
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ऐसे होता है खेल..
माल बनाकर निर्यात करने के लिए सरकार ने निर्यातकों को बैंक से एडवांस की सहूलियत दी है। नगर के एक प्रमुख निर्यातक ने बताया कि निर्यात ऑर्डरशीट दिखाकर निर्यातक बैंकों से प्री-शिपमेंट और पोस्ट शिपमेंट एडवांस उठाते हैं, जो माल की कीमत का 90 प्रतिशत तक हो सकता है।
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माल निर्यात होने के नियत समय पर भुगतान आ गया तो ठीक नहीं तो बैंक का भुगतान फंस जाता है। नईबाजार के निर्यातक के विरुद्ध सीबीआई के मुकदमे के मामले में भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक ने साफ लिखा है कि शिवांग कारपेट के निदेशकों ने फर्जी दस्तावेज के सहारे 7.40 करोड़ रुपये उठा लिए।

जिसका भुगतान आज तक नहीं हुआ है। चर्चाओं में यह भी है कि निदेशकों ने मूलत: यह कर्ज स्टेट बैंक आफ बीकानेर एंड जयपुर (एसबीबीजे) से लिया था। गत वर्ष एसबीबीजे का एसबीआई में विलय हो जाने के बाद एसबीआई अधिकारियों ने एसपी सीबीआई से शिकायत की थी।

ओवर बिलिंग कर सरकार को लगाते हैं चूना

stirred in businessman after fraud in banking system
कालीन निर्यातकों को प्रोत्साहन के लिए भारत सरकार कई प्रकार से मदद कर करती है। ड्रॉ-बैक के अलावा इंपोर्ट लाइसेंस भी देती है, लेकिन बीते कुछ वर्षों से ड्रॉ-बैक और इंपोर्ट लाइसेंस हासिल करने के लिए लोग गोरखधंधा करने लगे हैं।

औद्योगिक सूत्रों के जरिए पता चला है कि ड्रॉ-बैक और लाइसेंस के नाम पर सरकार को चूना लगाए जाने के बाद ही केंद्र सरकार को ड्राबैक की दरें 11 प्रतिशत से घटाकर साढ़े तीन प्रतिशत करना पड़ा।

गत वर्ष तक भारत सरकार निर्यात माल पर नौ से लेकर 11 प्रतिशत तक ड्यूटी ड्रॉ-बैक देती थी। देखने में आया कि लोग रद्दी और सस्ते माल बनाकर उसकी भारी भरकम बिलिंग कर निर्यात कर रहे हैं। ऐसे लोगों की मंशा होती है कि माल का भुगतान दिखा कर सरकार से ड्राबैक और इंपोर्ट लाइसेंस की भारी भरकम भुगतान प्राप्त कर लें।

लेकिन बीते कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आने पर सरकार ने ड्राबैक की दरों को ही 11 से साढ़े तीन प्रतिशत कर दिया। केंद्रीय राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने ऐसे कई मामले पकड़े है।

भदोही से कई फर्में हैं, जो रद्दी और बोगस माल का निर्यात कर रहे हैं जिसमे कइयों के विरुद्ध जांच चल रही है। ऐसे कुछ लोगों के बैंक खाते भी फ्रीज किए गए हैं। 
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