इनामी पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल एसटीएफ के हत्थे चढ़ा, बेटा अब भी फरार
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उधर, जवाहर की गिरफ्तारी की सूचना पाकर महाराजगंज की एक पुलिस टीम भी शहर के लिए रवाना हो गई है। महाराजगंज में जवाहर पर गन्ना भुगतान का लगभग 23 करोड़ बकाया है और उसके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी है।
23 अप्रैल 2012 को अर्दली बाजार क्षेत्र में बैंक कर्मी महेश जायसवाल की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। महेश की हत्या के मुख्य आरोपी सनी सिंह को एसटीएफ ने 2015 में एनकाउंटर में मार गिराया था। महेश के भाई गुड्डू की याचिका पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जवाहर और गौरव का नाम विवेचना में शामिल किया गया।
बीते साल के दिसंबर महीने में अदालत ने जवाहर और गौरव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया तो दोनों भाग निकले। सर्विलांस की मदद से जवाहर की लोकेशन ट्रैक कर एसटीएफ के इंस्पेक्टर विपिन राय के नेतृत्व में एसआई अरविंद सिंह, अरविंद पाठक, राजेंद्र पांडेय, सनोज यादव, विनोद यादव और राजमणि यादव ने दमोह में छापेमारी कर उसे उसके रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में इंस्पेक्टर कैंट ने बताया कि जल्द ही जवाहर को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ की जाएगी।
एलओसी न जारी होता तो भाग जाता विदेश
नोटिस जारी होने के बाद वह शराब कारोबारी रिश्तेदार के दमोह स्थित बड़े घर में छुप कर अकेले रह रहा था और किसी से बातचीत या मुलाकात नहीं करता था। एसटीएफ ने जवाहर को कैंट पुलिस को सुपुर्द किया तब भी वो ऐंठन में ही दिखा और पुलिसकर्मियों को अपने धनबल के किस्से सुनाने के साथ ही करोड़ों के नुकसान की बात कर रहा था।
वहीं, जब जवाहर को पुलिस कैंट थाने से लेकर अदालत के लिए निकली तो पीछे आधा दर्जन से अधिक लक्जरी वाहन चल रहे थे। इस दौरान जवाहर को देखने के लिए वादकारियों और अधिवक्ताओं की अच्छी-खासी भीड़ रिमांड मजिस्ट्रेट की अदालत के बाहर उमड़ी हुई थी। सोयेपुर जहरीली शराब कांड से चर्चा में आया छोटा लालपुर निवासी जवाहर कैंट थाने का हिस्ट्रीशीटर है।
सोयेपुर में जहरीली शराब पीने से 28 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में जवाहर 22 महीने तक जेल में रहा था। कैंट पुलिस के अनुसार जवाहर के खिलाफ हत्या, गैर इरादतन हत्या, धोखाधड़ी, छल, आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य आरोपों में जिले के साथ ही अन्य जनपदों के थानों में 17 मुकदमे दर्ज हैं।
80 के दशक में साइकिल पर शराब बेचता था, 90 में दी हेलीकॉप्टर खरीद की अर्जी
देसी शराब की बिक्री से अकूत संपत्ति एकत्र कर जवाहर ने राजनीति में किस्मत आजमाई। उसने 1990 के दशक में कांग्रेस का दामन थामा और जिला पंचायत अध्यक्ष बना। इसी दौरान उसने हेलीकॉप्टर खरीदने की अर्जी दी तो प्रदेश के साथ ही देश में उसका नाम सुर्खियों में आया।
हालांकि तकनीकी कारणों से जवाहर हेलीकाप्टर खरीदने में सफल नहीं हो सका। इसके बाद 1999 में वो चंदौली से सपा से सांसद निर्वाचित हुआ। 2009 में चंदौली से ही जवाहर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गया।