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सलामत रहे दोस्ताना हमारा...
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दोस्ती में भले ढाई शब्द हों। लेकिन इसकी व्याख्या वृहद है। कहते हैं दोस्ती ईश्वर का दिया वो तोहफा है। जिसमें रक्त संबंधों से इतर आपकी भावनाओं को बिना कहे समझने का हुनर होता है। दुनिया का हर शख्स एक सच्चे दोस्त की तलाश करता है। आज के सोशल मीडिया के दौर में यह संभव भी हो गया है, लेकिन आज भी पक्के दोस्त बड़ी मुश्किल से मिलते हैं। यह एक ऐसा बंधन होता है जो जीवन के तमाम रंगों में भी हमें गहराई से जोड़े रखता है। इसमें अगर एक दुखी हो तो दूसरा उसके संकट या दर्द को दूर करने के लिए सभी जतन कर लेता है। आज मित्रता दिवस पर हमने कुछ ऐसी ही सच्चे दोस्तों को ढूंढने की कोशिश की है।
एक दूसरे का ख्याल रखने के लिए नहीं की शादी
रामनगर निवासी सीमा शर्मा व निधि मोहिले की दोस्ती 29 साल पुरानी है। ये दोनों जब पहली बार मिलीं, तो इन्हें नहीं पता था कि इनकी दोस्ती इतनी मजबूत हो जाएगी। सीमा बताती हैं कि बात 1992 की है, निधि अपनी नानी के यहां इंटर की पढ़ाई कर रही थीं, इस दौरान हम दोनों दोस्त बने। दोनों ने साथ में इंटर किया और बाद में स्नातक में प्रवेश लिया। इस दौरान ही एक वक्त आया जब निधि की नानी का देहांत हो गया। वो वक्त था, जब निधि ने खुद को नुकसान पहुंचाने की भी कोशिश की। मैं पिता जी से लड़कर निधि के पास गई और रात भर उसके पास रही। दूसरे दिन जब मैं निधि के साथ अपने घर आई तो परिवार वालों ने काफी विरोध किया, लेकिन मैं ठान चुकी थी, हम दोनों साथ रहेंगे। वर्तमान में निधि महारानी डिग्री कॉलेज में लेक्चरर हैं और सीमा राधा किशोरी बालिका इंटर कालेज में शिक्षिका है। ये दोनों दोस्तों एक साथ ही एक मकान में रहते हैं। दोनों ने एक दूसरे का ख्याल रखने के लिए शादी भी नहीं की।
दोस्तों ने पिता का किया अंतिम संस्कार
कोरोना के कारण किसी ने अपने पिता को खोया है तो किसी ने अपने बेटे को। दानगंज निवासी शुभम के साथ भी कु छ ऐसा ही हुआ। नौकरी के चलते शुभम मुंबई में थे और यहां उनका पूरा परिवार कोरोना संक्रमित हो चुका था। एक दिन पिता की तबीयत ज्यादा बिगड़ी और उन्हें हॉस्पिटल ले जाने की नौबत आ गई। संक्रमित होने की वजह से परिवार का कोई अन्य सदस्य नहीं जा सकता था। ऐसे में शुभम ने अपने दोस्तों से संपर्क किया। उनके दोस्त यजत, अंकित, प्रशांत व वैभव रात में उसके घर पहुंचे और पिता को लेकर बीएचयू कोविड वार्ड में एडमिट कराया। भर्ती होने के तीन दिन बाद शुभम के पिता की तबीयत ठीक होने लगी। लेकिन एक दिन अचानक उनकी तबीयत ज्यादा खराब हुई और उनका देहांत हो गया। कोरोना के कारण लॉकडाउन में शुभम मुंबई से वाराणसी नहीं आ पाए। ऐसे में दोस्तों ने ही उसके पिता का अंतिम संस्कार किया। संवाद न्यूज एजेंसी
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एक दूसरे का ख्याल रखने के लिए नहीं की शादी
रामनगर निवासी सीमा शर्मा व निधि मोहिले की दोस्ती 29 साल पुरानी है। ये दोनों जब पहली बार मिलीं, तो इन्हें नहीं पता था कि इनकी दोस्ती इतनी मजबूत हो जाएगी। सीमा बताती हैं कि बात 1992 की है, निधि अपनी नानी के यहां इंटर की पढ़ाई कर रही थीं, इस दौरान हम दोनों दोस्त बने। दोनों ने साथ में इंटर किया और बाद में स्नातक में प्रवेश लिया। इस दौरान ही एक वक्त आया जब निधि की नानी का देहांत हो गया। वो वक्त था, जब निधि ने खुद को नुकसान पहुंचाने की भी कोशिश की। मैं पिता जी से लड़कर निधि के पास गई और रात भर उसके पास रही। दूसरे दिन जब मैं निधि के साथ अपने घर आई तो परिवार वालों ने काफी विरोध किया, लेकिन मैं ठान चुकी थी, हम दोनों साथ रहेंगे। वर्तमान में निधि महारानी डिग्री कॉलेज में लेक्चरर हैं और सीमा राधा किशोरी बालिका इंटर कालेज में शिक्षिका है। ये दोनों दोस्तों एक साथ ही एक मकान में रहते हैं। दोनों ने एक दूसरे का ख्याल रखने के लिए शादी भी नहीं की।
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दोस्तों ने पिता का किया अंतिम संस्कार
कोरोना के कारण किसी ने अपने पिता को खोया है तो किसी ने अपने बेटे को। दानगंज निवासी शुभम के साथ भी कु छ ऐसा ही हुआ। नौकरी के चलते शुभम मुंबई में थे और यहां उनका पूरा परिवार कोरोना संक्रमित हो चुका था। एक दिन पिता की तबीयत ज्यादा बिगड़ी और उन्हें हॉस्पिटल ले जाने की नौबत आ गई। संक्रमित होने की वजह से परिवार का कोई अन्य सदस्य नहीं जा सकता था। ऐसे में शुभम ने अपने दोस्तों से संपर्क किया। उनके दोस्त यजत, अंकित, प्रशांत व वैभव रात में उसके घर पहुंचे और पिता को लेकर बीएचयू कोविड वार्ड में एडमिट कराया। भर्ती होने के तीन दिन बाद शुभम के पिता की तबीयत ठीक होने लगी। लेकिन एक दिन अचानक उनकी तबीयत ज्यादा खराब हुई और उनका देहांत हो गया। कोरोना के कारण लॉकडाउन में शुभम मुंबई से वाराणसी नहीं आ पाए। ऐसे में दोस्तों ने ही उसके पिता का अंतिम संस्कार किया। संवाद न्यूज एजेंसी
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