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बीएचयू में विशेष कार्यशाला: गांव-समाज की कहावतों के भावों पर होगी राष्ट्रीय चर्चा, जुटेंगे देशभर के भाषाविद्
Sat, 24 Oct 2026 02:05 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Sat, 24 Oct 2026 02:05 PM IST
सार
बीएचयू में 27 से 29 अक्तूबर तक विशेष कार्यशाला होगी। इस कार्यशाला की थीम मुहावरेदार अभिव्यक्तियों के माध्यम से भारतीय भावैक्य है। इसमें देशभर के भाषाविद् शामिल होंगे।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीएचयू में 27 से 29 अक्तूबर तक विशेष राष्ट्रीय कार्यशाला होने जा रही है। इसमें देश भर के भाषा विशेषज्ञ मिल होंगे और अलग-अलग भाषाओं के मुहावरों व कहावतों पर चर्चा करेंगे। देशभर के भाषाविद् तीन दिनों तक बीएचयू में भारतीय भाषाओं के मुहावरों पर होने वाली कार्यशाला में तुलनात्मक अध्ययन करेंगे।
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इस कार्यशाला की थीम मुहावरेदार अभिव्यक्तियों के माध्यम से भारतीय भावैक्य है। भावैक्य यानी कि भावों की एकता। इसका मतलब है कि भले ही हमारे देश में भाषाएं अलग हों, लेकिन मुहावरों के पीछे की भावनाएं और सीख एक जैसी होती हैं।
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बिना भाषा बदले दूसरी लिपि में लिखेंगे मुहावरे
बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र और शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति के अकादमिक सहयोग से ये आयोजन होने जा रहा है। कार्यशाला में मुहावरों का संकलन, डॉक्यूमेंटेशन और तुलनात्मक विश्लेषण किया जाएगा। इसमें मुहावरों को उनकी मूल लिपि, शाब्दिक अर्थ, प्रचलित अर्थ, प्रयोग, संदर्भ, लिप्यंतरण यानी कि बिना भाषा बदले दूसरी लिपि में लिखने की कला भी बताई जाएगी। साथ ही शब्दों की समानताओं, व्याकरण की संरचनाओं और उसे प्रस्तुत करने के बारे में जानकारियां दी जाएंगी।
बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र और शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति के अकादमिक सहयोग से ये आयोजन होने जा रहा है। कार्यशाला में मुहावरों का संकलन, डॉक्यूमेंटेशन और तुलनात्मक विश्लेषण किया जाएगा। इसमें मुहावरों को उनकी मूल लिपि, शाब्दिक अर्थ, प्रचलित अर्थ, प्रयोग, संदर्भ, लिप्यंतरण यानी कि बिना भाषा बदले दूसरी लिपि में लिखने की कला भी बताई जाएगी। साथ ही शब्दों की समानताओं, व्याकरण की संरचनाओं और उसे प्रस्तुत करने के बारे में जानकारियां दी जाएंगी।
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मुहावरों को एकेडमिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए पर्सपेक्टिव्स और होराइजंस किताब को आधार बनाया गया है। बीएचयू के भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. अभिनव कुमार मिश्रा के नेतृत्व में कार्यशाला होगी। इसमें एएमयू के प्रो. मोहम्मद जहांगीर वारसी, भारतीय सांख्यिकी संस्थान कोलकाता के प्रो. नीलाद्रि शेखर दाश, कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रो. एजाज मोहम्मद शेख, दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. वीएम सुब्रह्मण्य शर्मा, भारतीय सांख्यिकी संस्थान के डॉ. मेंडेम बापूजी, अंग्रेजी व विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के प्रो. रजनीश अरोड़ा और बीएचयू के प्रो. दिवाकर प्रधान और प्रो. प्रमोद भगवान पडवाल शामिल होंगे। इनमें अलावा तेजपुर विश्वविद्यालय के डॉ. अमलेश गोपे, हैदराबाद के डॉ. वी. मुरलीधर, डॉ. जी. रेणुका देवी, बीएचयू के डॉ. जगदीशन टी., डॉ. मुगीस अहमद और मणिपाल स्थित एमएएचई के डॉ. अर्जुन एसआर भी संसाधन व्यक्तियों में शामिल हैं। इनके साथ डॉ. राम नारायण तिवारी भी सहभागिता करेंगे।
मुहावरों को एकेडमिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए पर्सपेक्टिव्स और होराइजंस किताब को आधार बनाया गया है। बीएचयू के भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. अभिनव कुमार मिश्रा के नेतृत्व में कार्यशाला होगी। इसमें एएमयू के प्रो. मोहम्मद जहांगीर वारसी, भारतीय सांख्यिकी संस्थान कोलकाता के प्रो. नीलाद्रि शेखर दाश, कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रो. एजाज मोहम्मद शेख, दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. वीएम सुब्रह्मण्य शर्मा, भारतीय सांख्यिकी संस्थान के डॉ. मेंडेम बापूजी, अंग्रेजी व विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के प्रो. रजनीश अरोड़ा और बीएचयू के प्रो. दिवाकर प्रधान और प्रो. प्रमोद भगवान पडवाल शामिल होंगे। इनमें अलावा तेजपुर विश्वविद्यालय के डॉ. अमलेश गोपे, हैदराबाद के डॉ. वी. मुरलीधर, डॉ. जी. रेणुका देवी, बीएचयू के डॉ. जगदीशन टी., डॉ. मुगीस अहमद और मणिपाल स्थित एमएएचई के डॉ. अर्जुन एसआर भी संसाधन व्यक्तियों में शामिल हैं। इनके साथ डॉ. राम नारायण तिवारी भी सहभागिता करेंगे।