Varanasi: दक्षिण कोरियाई दल ने सारनाथ से शुरू की धम्मयात्रा, मंत्री 'दयालु' बोले- बनारस के लिए यह गर्व का विषय
दक्षिण कोरिया से वाराणसी आए 108 सदस्यीय बौद्ध अनुयायियों के दल का शनिवार को आयुष राज्यमंत्री डॉ दयाशंकर मिश्र 'दयालु' ने स्वागत किया। दक्षिण कोरियाई बौद्ध भिक्षुओं के दल ने सारनाथ से धम्मयात्रा का शुभारंभ किया।
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भारत और दक्षिण कोरिया के बेहतर संबंध के 50 वर्ष पूरा होने के उपलक्ष में कोरिया से आए 108 बौद्ध भिक्षुओं के दल ने शनिवार को भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ से धम्म यात्रा शुरू की। 43 दिवसीय धम्मयात्रा का अगला पड़ाव भगवान की बुद्धत्व भूमि बोधगया होगा। इसके बाद यह यात्रा नालंदा, राजगीर, वैशाली, कुशीनगर , लुम्बिनी और कपिलवस्तु के दर्शन करते हुए श्रावस्ती में पूरी होगी। इस दौरान दक्षिण कोरिया के बौद्ध भिक्षुओं का दल करीब एक हजार किलोमीटर से अधिक भूमि नापेगा।
सारनाथ में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने दक्षिण कोरियाई बौद्ध तीर्थ यात्रियों का स्वागत 108 मीटर के धम्म ध्वजा के साथ किया। स्वागत समारोह में आयुष राज्यमंत्री डॉ दयाशंकर मिश्र 'दयालु' ने कहा कि वाराणसी के सारनाथ से बौद्ध धम्मयात्रा का शुभारंभ गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए जब प्रयास संतगण करते हैं तो उसके अर्थ दिव्य हो जाते हैं। इतिहास का जिक्र कर उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया के बौद्ध जोग्ये संघ के उद्गम की जड़ें भारत में हैं। भारत के बौद्ध आचार्य बोधिधम्म बुद्ध के धम्म को चीन लेकर गये थे। चीन में उनके शिष्य हुई-नेंग के माध्यम से बुद्ध की ध्यान परंपरा ने दक्षिण कोरिया में प्रवेश किया।
आपकी ध्यान परंपरा सिओन का उद्गम स्थल श्रावस्ती है जहां आपकी यात्रा पूरी हो रही है। इस मायने में आप विदेश में नहीं आए हैं बल्कि अपने आध्यात्मिक पुरखों के घर आए हैं। आपका अपने घर में स्वागत है। इस दौरान भारत में दक्षिण कोरिया के राजदूत चुंग जाए बॉक, दूतावास प्रथम सचिव सुश्री पार्क, पर्यटन अधिकारी कीर्तिमान श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी गुलाब चंद्र आदि मौजूद रहे।