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सोनिया गांधी की सेहत की देखभाल में गंभीर चूक
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 05 Aug 2016 02:14 AM IST
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वाराण्ासी में सोनिया गांधी का रोड शो
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यूपी के चुनावी शंखनाद की काशी से शुरुआत करने आईं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सेहत को लेकर हद दर्जे की लापरवाही बरती गई। वीवीआईपी दौरे को लेकर प्रशासन की संजीदगी का अंदाजा इंतजामों की हकीकत से लगाया जा सकता है। सर्किट हाउस में जहां वह ठहरी थीं, वहां सेफ रूम तक नहीं बनाया गया था। कहा जा रहा है कि बाबतपुर हवाई अड्डे से इंग्लिशिया लाइन तक करीब 40 किमी लंबे रोड शो के लिए वह मेडिकली फिट नहीं थीं। बावजूद इसके उन्हें गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़कों, धूल भरे रास्तों और स्लाटर हाउस की दुर्गंध वाले इलाकों से ले जाया गया।
सोनिया गांधी की सेहत के प्रति पार्टी के रणनीतिकारों का रवैया गैरजिम्मेदाराना रहा है। अहम सवाल यह कि जब सोनिया की तबीयत नासाज थी तो उन्हें रोड शो के लिए रोका क्यों नहीं गया? ये भी मान लें कि उन्होंने जिद की तो रोड शो की शुरुआत निर्धारित स्थल से ही कराई जानी चाहिए थी। रोड शो सर्किट हाउस से शुरू होना था लेकिन कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखते हुए सोनिया खुद को रोक नहीं सकीं और बाबतपुर एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही जनता से रूबरू होने लगीं। यही वजह थी कि उन्हें लहुराबीर में पहुंचना था ढाई बजे लेकिन वह वहां 5:20 बजे आ पाईं।
रोड शो के लिए जिस मार्ग का चयन किया गया था, वह भी उनके स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं था। यह रूट शहर के सर्वाधिक गड्ढों से भरे रूट के रूप में जाना जाता है। जगह-जगह सड़क टूटी होने के चलते धूल भी बहुत है। कई जगह कूड़ा डंपिंग की जाती है और सबसे अहम यह कि इसी रूट पर स्लाटर हाउस भी है। रोड शो में साथ चल रहे कई कांग्रेसियों का कहना है कि स्लाटर हाउस के बाद से ही उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हुई। जैसा कि उनकी जांच करने वाले डॉक्टरों ने बताया था कि उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। इससे लगता है कांग्रेस अध्यक्ष की तबीयत बिगाड़ने में धूल और बदबू भी अहम कारण हो सकते हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रशासन को चाहिए था कि रूट के गड्ढों को भरवाता और साफ-सफाई कराता।
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा का आरोप है कि रोड शो के दौरान सोनिया की तबीयत बिगड़ने के बाद जब उन्हें लहुराबीर चौराहे के पास एक होटल में ले जाया गया, तब वहां चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने में काफी वक्त लग गया। फ्लीट के साथ चल रही एंबुलेंस में कोई डॉक्टर नहीं था। एसपी सिटी सुधाकर यादव डॉ. ओपी तिवारी को लेकर पौन घंटे बाद पहुंचे। डॉक्टर आने के बाद चेकअप के लिए चिकित्सा उपकरण तक फ्लीट की एंबुलेंस में नहीं थे। उनका दावा है कि बुखार मापने के लिए थर्मामीटर और ब्लड प्रेशर मापने की मशीन आनन-फानन में खरीद कर लाई गई। वहीं, पिंडरा के विधायक अजय राय का भी कहना है कि चिकित्सकीय परीक्षण के लिए जरूरी कई उपकरण उनके सामने खरीद कर लाए गए।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वीबी सिंह और मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा के प्रमुख अधीक्षक डॉ. सीपी कश्यप का कहना है कि पूरी तरह से सुसज्जित एंबुलेंस में दो शिफ्ट में फिजीशियन, महिला डॉक्टर, एनेस्थेटिस्ट मिलाकर चार-चार डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कई गई। मेरे सामने एंबुलेंस रवाना हुई। वहां एसपीजी से बाकायदा जांच के बाद फ्लीट में एंबुलेस को शामिल किया। होटल में इसी एंबुलेंस के डॉक्टरों ने जांच की और एयरपोर्ट पर एंबुलेंस में ही मौजूद आईवी फ्लूड लगाया गया। उसके बाद एंबुलेंस के ही कुछ उपकरणों के साथ खुद सीएमओ, एडीशनल सीएमओ डॉ ओपी तिवारी दिल्ली तक साथ गए। जहां तक थर्मामीटर, बीपी जांच की मशीन बाहर से मंगाए जाने के बारे में संबंधित अस्पतालों के सीएमएस और एसआईसी से जवाब मांगा जाएगा।
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सोनिया गांधी की सेहत के प्रति पार्टी के रणनीतिकारों का रवैया गैरजिम्मेदाराना रहा है। अहम सवाल यह कि जब सोनिया की तबीयत नासाज थी तो उन्हें रोड शो के लिए रोका क्यों नहीं गया? ये भी मान लें कि उन्होंने जिद की तो रोड शो की शुरुआत निर्धारित स्थल से ही कराई जानी चाहिए थी। रोड शो सर्किट हाउस से शुरू होना था लेकिन कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखते हुए सोनिया खुद को रोक नहीं सकीं और बाबतपुर एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही जनता से रूबरू होने लगीं। यही वजह थी कि उन्हें लहुराबीर में पहुंचना था ढाई बजे लेकिन वह वहां 5:20 बजे आ पाईं।
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रोड शो के लिए जिस मार्ग का चयन किया गया था, वह भी उनके स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं था। यह रूट शहर के सर्वाधिक गड्ढों से भरे रूट के रूप में जाना जाता है। जगह-जगह सड़क टूटी होने के चलते धूल भी बहुत है। कई जगह कूड़ा डंपिंग की जाती है और सबसे अहम यह कि इसी रूट पर स्लाटर हाउस भी है। रोड शो में साथ चल रहे कई कांग्रेसियों का कहना है कि स्लाटर हाउस के बाद से ही उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हुई। जैसा कि उनकी जांच करने वाले डॉक्टरों ने बताया था कि उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। इससे लगता है कांग्रेस अध्यक्ष की तबीयत बिगाड़ने में धूल और बदबू भी अहम कारण हो सकते हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रशासन को चाहिए था कि रूट के गड्ढों को भरवाता और साफ-सफाई कराता।
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा का आरोप है कि रोड शो के दौरान सोनिया की तबीयत बिगड़ने के बाद जब उन्हें लहुराबीर चौराहे के पास एक होटल में ले जाया गया, तब वहां चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने में काफी वक्त लग गया। फ्लीट के साथ चल रही एंबुलेंस में कोई डॉक्टर नहीं था। एसपी सिटी सुधाकर यादव डॉ. ओपी तिवारी को लेकर पौन घंटे बाद पहुंचे। डॉक्टर आने के बाद चेकअप के लिए चिकित्सा उपकरण तक फ्लीट की एंबुलेंस में नहीं थे। उनका दावा है कि बुखार मापने के लिए थर्मामीटर और ब्लड प्रेशर मापने की मशीन आनन-फानन में खरीद कर लाई गई। वहीं, पिंडरा के विधायक अजय राय का भी कहना है कि चिकित्सकीय परीक्षण के लिए जरूरी कई उपकरण उनके सामने खरीद कर लाए गए।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वीबी सिंह और मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा के प्रमुख अधीक्षक डॉ. सीपी कश्यप का कहना है कि पूरी तरह से सुसज्जित एंबुलेंस में दो शिफ्ट में फिजीशियन, महिला डॉक्टर, एनेस्थेटिस्ट मिलाकर चार-चार डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कई गई। मेरे सामने एंबुलेंस रवाना हुई। वहां एसपीजी से बाकायदा जांच के बाद फ्लीट में एंबुलेस को शामिल किया। होटल में इसी एंबुलेंस के डॉक्टरों ने जांच की और एयरपोर्ट पर एंबुलेंस में ही मौजूद आईवी फ्लूड लगाया गया। उसके बाद एंबुलेंस के ही कुछ उपकरणों के साथ खुद सीएमओ, एडीशनल सीएमओ डॉ ओपी तिवारी दिल्ली तक साथ गए। जहां तक थर्मामीटर, बीपी जांच की मशीन बाहर से मंगाए जाने के बारे में संबंधित अस्पतालों के सीएमएस और एसआईसी से जवाब मांगा जाएगा।