फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Son promise his mother i will come soon but he is martyred

बेटे ने कहा था कि जल्द आऊंगा, तुम परेशान मत हो, इस बात को 19 साल बाद भी नहीं भूल पाई शहीद की मां

Thu, 26 Jul 2018 12:39 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया Updated Thu, 26 Jul 2018 12:39 PM IST
विज्ञापन
Son promise his mother i will come soon but he is martyred
शहीद जवान अवनीश कुमार यादव - फोटो : file photo
बेटे ने कहा था कि मां जल्द ही आऊंगा... तुम परेशान मत हो...। यह बात कही थी यूपी के बलिया निवासी कारगिल में शहीद जवान अवनीश कुमार यादव ने अपनी की मां से। मां अपने शहीद बेटे के इस आश्वासन को 19 साल बाद भी नहीं भूल पाई हैं। बेटे के वादे को याद कर बूढ़ी मां की आंखें डबडबा जती हैं और वे पथराई आंखों से एक टक निहारने लगती हैं...। घर में टंगी बेटे की बड़ी तस्वीर को देख वे अपने को ढांढस बंधाती हैं। 
विज्ञापन


कारगिल युद्ध में बलिया जनपद के विकास खंड मुरली छपरा क्षेत्र के इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगांवा) पंचायत के दलेल टोला निवासी शहीद अवनीश कुमार यादव की मां सोमारी देवी की आंखों में बेटे को खोने का दर्द 19 साल बाद भी साफ दिखाई देता है। बेटे का जिक्र आते हीं उनकी आंखें नम हो गईं लेकिन बेटे की बात कम नहीं हुई।
विज्ञापन


वहीं दूसरी ओर शहीद जवान के पिता सीआरपीएफ से रिटायर्ड शिवजी यादव देश के लिए शहीद होने वाले लाल के लिए खुद को गौरवान्वित भी महसूस करते हैं। आंखों में दर्द के साथ उत्साह से सीना चौड़ा भी हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


शहीद जवान के परिवार को अभी भी इस बात की कसक है कि सरकार ने जो वादे किए और आश्वासन दिया, वे अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। शहीद जवान अवनीश कुमार यादव के नाम पर न शहीद द्वार का निर्माण ही हुआ और न ही उसकी गांव में प्रतिमा ही लगाई गई। गांव का नाम भी शहीद जवान के नाम पर रखने की गुजारिश परिवार के लोगों ने सरकार के समक्ष रखी थी, लेकिन वे भी अभी तक पूरी नहीं हो सकी।

पिता बतातें हैं कि वर्ष 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान दर्जनों दुश्मनों को अवनीश ने मार गिराया था और बाद में दुश्मनों के तोप का निशाना बनकर शहीद हो गया। पिता शिवजी यादव बताते हैं कि अवनीश में देश की सेवा करने का जज्बा कूटकर भरा था। बचपन से ही पढ़ने में होशियार था।

कक्षा में सदैव अव्वल अंक लाता था। उसे पढ़ने के लिए कहना नहीं पड़ता था। 18 साल की उम्र में ही वाराणसी में भर्ती सेंटर पर पहुंचा और पहली बार में ही परीक्षा पास कर भर्ती हो गया। 13 कुमायूं रेजिमेंट में उसकी नियुक्ति हुई। जब वह भर्ती होकर घर पहुंचा तो उसने बताया कि अब सेना में जाने का सपना पूरा हो गया।


ट्रेनिंग खत्म होते ही उसकी पहली नियुक्ति सियाचिन ग्लेशियर में हुई। उसी समय कारगिल युद्ध शुरू हो गया था। शहीद अवनीश की बटालियन भी कारगिल में लगाई गई, जहां चार सितम्बर 1999 को बेटा दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गया। अवनीश अपने तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था। 25 जनवरी 1981 को जन्मे अवनीश कुमार यादव का 30 मई 1996 में बिंदा देवी से विवाह हुआ था। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed