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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Somvati Amavasya falls during Adhikmas after 30 years spiritual merits of Prayag and Gaya in Kashi

मलमास: 30 साल बाद अधिकमास में सोमवती अमावस्या, काशी में प्रयाग व गया का फल; जानें दुर्लभ और पवित्र संयोग

Sat, 13 Jun 2026 09:49 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 13 Jun 2026 09:49 PM IST
सार

Adhik Maas 2026: अधिकमास में पड़ रही सोमवती अमावस्या इस बार दुर्लभ और विशेष संयोग लेकर आई है। करीब 30 वर्ष बाद बने इस योग में काशी में स्नान, दान और पितृ तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। कपिलधारा पर पितरों के पूजन से प्रयाग और गया के समान पुण्यफल मिलने की मान्यता है।

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Somvati Amavasya falls during Adhikmas after 30 years spiritual merits of Prayag and Gaya in Kashi
मलमास में पूजन करते श्रद्धालु। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: अधिकमास (मलमास) में 30 साल बाद सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह महासंयोग 15 जून को पड़ रहा है। इसी दिन श्रद्धालु गंगा स्नान, दान, पितरों का तर्पण करेंगे और सौभाग्यवती महिलाएं विधिवत पीपल व बरगद के वृक्ष की पूजा एवं परिक्रमा करेंगी।

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इस दिन काशी के पौराणिक कुंडों, तालाबों और तीर्थ स्थलों पर पूजन तथा पितरों के तर्पण से गया और प्रयाग के समान फल प्राप्त होने की मान्यता है। पंचक्रोशी यात्रा के अंतिम पड़ाव कपिलधारा पर इस दिन पितरों के तर्पण का विशेष विधान है। भगवान विष्णु को समर्पित अधिकमास में सोमवती अमावस्या का पड़ना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव और पितरों का पूजन-अर्चन किया जाएगा। 

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श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रख्यात ज्योतिषविद् प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि इस बार पुरुषोत्तमी अमावस्या पर दुर्लभ और पवित्र संयोग बन रहा है। इस दिन स्नान, दान और पितरों के तर्पण का विशेष महत्व है। 

इस विशिष्ट योग में पूजा-अर्चना करने का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पीपल और बरगद के वृक्ष की पूजा तथा परिक्रमा करेंगी। मान्यता है कि पीपल वृक्ष की पूजा और उसकी परिक्रमा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है तथा दांपत्य जीवन सुखमय रहता है।

उन्होंने बताया कि शिव मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और ग्रह बाधाओं से मुक्ति मिलती है। मलमास में सोमवती अमावस्या का यह महासंयोग तीन दशक बाद आया है। इससे पहले ऐसा संयोग आषाढ़ मास के अधिकमास में 15 जुलाई 1996 को पड़ा था। 

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पूजन के लिए अमृतकाल मुहूर्त सुबह 6:15 बजे से 7:55 बजे तक तथा सुबह 9 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा। बड़ी शीतला मंदिर के महंत शिव प्रसाद पांडेय 'लिंगिया' ने बताया कि पुरुषोत्तमी अमावस्या का मलमास में पड़ना अत्यंत दुर्लभ है। काशी में इस तिथि पर कपिलधारा में पितरों का तर्पण करने से गया तीर्थ के समान फल प्राप्त होता है। 

सुहागिन महिलाएं पीपल और बरगद के वृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी।मंगला गौरी मंदिर के महंत नारायण गुरु ने बताया कि मलमास की अमावस्या पर कपिलधारा में पितरों का तर्पण करना सबसे अधिक फलदायी माना गया है। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों के कष्ट दूर कर उन्हें विभिन्न बाधाओं से मुक्ति प्रदान करते हैं।

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इस दुर्लभ योग में करें ये पूजा
अमावस्या तिथि पर भगवान शिव की आराधना करें। शिवलिंग पर जल, दूध, दही और शहद अर्पित कर मंत्र जाप करें। पीपल वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं और उसके चारों ओर सात बार परिक्रमा करें। पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करें। गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र अथवा धन का दान करें।

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