{"_id":"57c0a4bc4f1c1bd539d4f5c6","slug":"so-far-300-million-of-flood-damage","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब तक बाढ़ से 300 करोड़ का नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब तक बाढ़ से 300 करोड़ का नुकसान
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 27 Aug 2016 01:51 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंगा का जलस्तर इस बार 1978 और 2013 के मुकाबले कम जरूर रहा है लेकिन नुकसान करीब चार गुना ज्यादा हुआ है। गंगा और वरुणा नदी के तटीय इलाकों में आई बाढ़ से दस दिन बाद भी सैकड़ों लोगों के मकान पानी में डूबे हैं। रोज कमाने-खाने वालों का रोजगार छिन गया है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो अब तक 300 करोड़ रुपये की संपत्ति के नुकसान का प्रारंभिक आकलन किया गया है।
1978 की बाढ़ में सर्वाधिक प्रभावित इलाका गोदौलिया, दशाश्वमेध क्षेत्र था। उस समय वरुणा किनारे आबादी नहीं थी और गंगा किनारे भी बसावट अस्सी से राजघाट के बीच ही थी लेकिन नगर निगम, वीडीए और राजस्व विभाग की मिलीभगत के तब से अब तक वरुणा के डूब क्षेत्र में भी सैकड़ों अवैध निर्माण हो गए हैं। पिछले कुछ सालों में वरुणा के तटीय इलाकों में एक हजार से ज्यादा लोगों ने आशियाना बनाया है। आबादी बढ़ने के साथ ही नुकसान भी ज्यादा हुआ है। इस बार आई बाढ़ का उच्चतम जलस्तर अब तक 72.56 मीटर तक पहुंच चुका है, जो 1978 और 2013 की तुलना में कम है।
प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 23195 हेक्टेयर जमीन में उगाई गई फसल बर्बाद हुई है। 65830 हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित हुई है। केवल फसलों का नुकसान नौ करोड़ रुपये से ज्यादा हुआ है।
विज्ञापन
नगर निगम सीमा में बाढ़ से प्रभावित इलाकों की गलियां, सड़कें और स्ट्रीट लाइटें भी खराब हुई है। नगर निगम की कुल 1180 किमी सड़कें हैं। इसमें से करीब 150 किमी की सड़क अभी पानी में डूबी है। अस्सी से लेकर नगवा, नक्खीघाट, सरैया, दानियालपुर, बघवानाला, गोफाबीर इलाके में बाढ़ से सड़क के साथ ही स्ट्रीट लाइटें भी खराब हुई है। निगम के चीफ इंजीनियर कैलाश सिंह का कहना है कि 30 करोड़ के नुकसान का अनुमान है। बाढ़ का पानी हटने के बाद अनुमानित राशि और बढ़ सकती है।
बाढ़ के चलते बिजली विभाग को 8 से 10 करोड़ रुपये की चपत लगने की आशंका है। करीब दो महीने पहले शहर के कोनिया मुहल्ले व अन्य इलाकों में बिजली मीटरों को घर से बाहर लगाया गया था। अब ये सभी डूब गए हैं। इनके अलावा क्षेत्र में उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाए गए थे। बाढ़ से 27 ट्रांसफार्मर और 20 हजार घरों के 23 हजार मीटर प्रभावित हुए हैं।
जानकारों की मानें तो एक ट्रांसफार्मर की लागत 5 लाख रुपये है। इस हिसाब से 27 ट्रांसफार्मर की कुल लागत 1.35 करोड़ रुपये है। इसी तरह एक मीटर की कीमत 1200 रुपये है और इस हिसाब से 2.76 करोड़ रुपये के मीटर खराब हुए हैं। इनके अलावा बिजली के तार, पोल, खंभे और अंडरग्राउंड केबल भी खराब हुए हैं। नगरीय विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अधीक्षण अभियंता अनिल वर्मा के मुताबिक सही आकलन बाढ़ का पानी उतरने के बाद चलेगा।
बाढ़ के चलते करीब 70 करोड़ रुपये की सड़कें खराब हुई हैं। जिले में कुल 2711 किमी की सड़कें हैं। इनमें 100 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। 135 किलोमीटर प्रादेशिक मार्ग हैं। इनके अलावा 2476 किमी शहर और गांव की सड़कें हैं। पीडब्ल्यूडी की शहर में 112 किमी सड़कें हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा खराब भी यही हुई हैं। इनकी मरम्मत पर 70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा कुछ सड़कों को नए सिरे से बनाना पड़ेगा जबकि अधिकतर सड़कों की मरम्मत करानी पड़ेगी। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता एके सिंह भदौरिया भी कहते हैं कि प्रारंभिक आकलन के मुताबिक 70 करोड़ रुपये की सड़कें खराब हुई होंगी।
विज्ञापन
1978 की बाढ़ में सर्वाधिक प्रभावित इलाका गोदौलिया, दशाश्वमेध क्षेत्र था। उस समय वरुणा किनारे आबादी नहीं थी और गंगा किनारे भी बसावट अस्सी से राजघाट के बीच ही थी लेकिन नगर निगम, वीडीए और राजस्व विभाग की मिलीभगत के तब से अब तक वरुणा के डूब क्षेत्र में भी सैकड़ों अवैध निर्माण हो गए हैं। पिछले कुछ सालों में वरुणा के तटीय इलाकों में एक हजार से ज्यादा लोगों ने आशियाना बनाया है। आबादी बढ़ने के साथ ही नुकसान भी ज्यादा हुआ है। इस बार आई बाढ़ का उच्चतम जलस्तर अब तक 72.56 मीटर तक पहुंच चुका है, जो 1978 और 2013 की तुलना में कम है।
विज्ञापन
प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 23195 हेक्टेयर जमीन में उगाई गई फसल बर्बाद हुई है। 65830 हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित हुई है। केवल फसलों का नुकसान नौ करोड़ रुपये से ज्यादा हुआ है।
विज्ञापन
नगर निगम सीमा में बाढ़ से प्रभावित इलाकों की गलियां, सड़कें और स्ट्रीट लाइटें भी खराब हुई है। नगर निगम की कुल 1180 किमी सड़कें हैं। इसमें से करीब 150 किमी की सड़क अभी पानी में डूबी है। अस्सी से लेकर नगवा, नक्खीघाट, सरैया, दानियालपुर, बघवानाला, गोफाबीर इलाके में बाढ़ से सड़क के साथ ही स्ट्रीट लाइटें भी खराब हुई है। निगम के चीफ इंजीनियर कैलाश सिंह का कहना है कि 30 करोड़ के नुकसान का अनुमान है। बाढ़ का पानी हटने के बाद अनुमानित राशि और बढ़ सकती है।
बाढ़ के चलते बिजली विभाग को 8 से 10 करोड़ रुपये की चपत लगने की आशंका है। करीब दो महीने पहले शहर के कोनिया मुहल्ले व अन्य इलाकों में बिजली मीटरों को घर से बाहर लगाया गया था। अब ये सभी डूब गए हैं। इनके अलावा क्षेत्र में उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाए गए थे। बाढ़ से 27 ट्रांसफार्मर और 20 हजार घरों के 23 हजार मीटर प्रभावित हुए हैं।
जानकारों की मानें तो एक ट्रांसफार्मर की लागत 5 लाख रुपये है। इस हिसाब से 27 ट्रांसफार्मर की कुल लागत 1.35 करोड़ रुपये है। इसी तरह एक मीटर की कीमत 1200 रुपये है और इस हिसाब से 2.76 करोड़ रुपये के मीटर खराब हुए हैं। इनके अलावा बिजली के तार, पोल, खंभे और अंडरग्राउंड केबल भी खराब हुए हैं। नगरीय विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अधीक्षण अभियंता अनिल वर्मा के मुताबिक सही आकलन बाढ़ का पानी उतरने के बाद चलेगा।
बाढ़ के चलते करीब 70 करोड़ रुपये की सड़कें खराब हुई हैं। जिले में कुल 2711 किमी की सड़कें हैं। इनमें 100 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। 135 किलोमीटर प्रादेशिक मार्ग हैं। इनके अलावा 2476 किमी शहर और गांव की सड़कें हैं। पीडब्ल्यूडी की शहर में 112 किमी सड़कें हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा खराब भी यही हुई हैं। इनकी मरम्मत पर 70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा कुछ सड़कों को नए सिरे से बनाना पड़ेगा जबकि अधिकतर सड़कों की मरम्मत करानी पड़ेगी। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता एके सिंह भदौरिया भी कहते हैं कि प्रारंभिक आकलन के मुताबिक 70 करोड़ रुपये की सड़कें खराब हुई होंगी।