उफनाए नाले में छह लोग बहे: 48 घंटे बाद भी महिला का नहीं मिला सुराग, तलाश में जुटी एनडीआरएफ की टीम
सोनभद्र के गढ़वान गांव में तेज बारिश के बाद अचानक उफनाए पहाड़ी नाले में बहे छह मजदूरों में से लापता महिला की तलाश रविवार को पूरे दिन जारी रही। पांच का शव शनिवार को ही मिल गया था।
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सोनभद्र के गढ़वान गांव में तेज बारिश के बाद अचानक उफनाए पहाड़ी नाले में बहे छह मजदूरों में से लापता महिला की तलाश रविवार को पूरे दिन जारी रही। वाराणसी से आई एनडीआरएफ की टीम ने बैतरा नाला व उससे ऊपर पहाड़ी पर शव की तलाश की। सोन नदी में भी नाव से घंटों महिला की तलाश में टीम लगी रही, लेकिन देर शाम तक सफलता नहीं मिली थी।
रामपुर बरकोनिया के गढ़वान गांव निवासी आठ मजदूर शुक्रवार को लकड़ी बीनने गांव के समीप पैना नाले की ओर गए थे। अचानक शुरू हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि से बचने के लिए सभी नाले में ही बड़े पत्थर की आड़ में छिप गए। इसी बीच पहाड़ों पर हुई बारिश का पानी तेज बहाव के साथ अचानक नाले में आ गया। उफनाए नाले में सभी मजदूर बहने लगे।
पेड़ों की जड़ में फंसने से दो मजदूर सुरक्षित रह गए, जबकि अन्य छह मजदूर पानी के साथ बह गए। रीना की सास संतरा देवी (60) का कहीं पता न चलने पर देर शाम वाराणसी से एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। अंधेरा होने से शनिवार को तलाश नहीं हो सकी।
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एक साथ गांव पहुंचे पांच शवों को देख पसरा मौत का सन्नाटा
ओलावृष्टि और नाले में तेज बहाव के कारण मौत के आगोश में समाए महिलाओं और बच्चों के शव शनिवार की देर रात गांव पहुंचे। रविवार को गांव के बाहर घाट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। पूरा गांव शोक में था। पोस्टमार्टम के बाद गांव में शवों का पहुंचना देर रात से ही शुरू हो गया। पांचों शवों को उनके घरों में लाया गया।
गढ़वान गांव निवासी रमेश की पत्नी रीना, उसकी बेटी राजमति व भांजे विमलेश, के अलावा राजकुमारी व हीरावती का शव पहुंचा था। वहीं शुक्रवार की रात ही ओलावृष्टि से जान गंवाने वाली यशोदिया देवी का बैजनाथ गांव में पहुंचा। पूरे गांव की महिलाएं, पुरुष यहां शोक जताने को मौजूद रहे। बच्चों और महिलाओं के करुण क्रंदन से आसपास गम का माहौल रहा।