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एसआईआर : आठ हजार बहुओं का नहीं मिल रहा मायके का रिकॉर्ड
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मिर्जापुर। जिले में एसआईआर फॉर्म भरने का काम चल रहा है। दूसरे प्रदेश और जिलों से आई विवाहिताओं के लिए यह मुसीबत बन गई है। पिता या दादा का साल 2003 की मतदाता सूची में रिकॉर्ड नहीं मिलने से एसआईआर का गणना प्रपत्र भरना मुश्किल हो गया है। ऐसे नवविवाहिताओं की संख्या लगभग 8 हजार है। घंटाघर निवासी रामी देवी का विवाह साल 2016 में हुआ था। इसके पहले वह बिहार में थीं। उनका नाम इस समय मतदाता सूची में तो दर्ज है लेकिन उनके पिता या दादा का नाम मायके के साल 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिल रहा है। वह बूथों पर जा रही हैं लेकिन उनकी समस्या का निदान नहीं हो रहा है। वासलीगंज की कीर्ति का नाम भी बरियाघाट बूथ पर है लेकिन उनके माता-पिता का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है। वह कानपुर की हैं। वह भी परेशान हैं। कई विवाहिताओं का मायके का रिकॉर्ड नहीं मिलने से वह परेशान हैं। उनका कहना है कि जब उनका विवाह हो गया तो ससुराल वालों का पूरा अभिलेख उनके पास है। उसे लिया जाए लेकिन कॉलम माता-पिता या दादा-दादी का ही है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार सिंह ने बताया कि सभी मतदाता सूची ऑनलाइन उपलब्ध है। मतदाताओं की सहायता के लिए नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं, उनसे मदद ली जा सकती है।
तिथि बढ़ते ही कम हुई भीड़
मिर्जापुर। चुनाव आयोग ने एसआईआर की तिथि एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी है। अब 11 दिसंबर तक गणना प्रपत्र भरा जाएगा। इस कारण अब पोलिंग बूथ पर भीड़ कम होे रही है। सोमवार को घंटाघर, बरियाघाट, एएसजे इंटर कॉलेज सहित कई बूथों पर मतदाता पहुंचे लेकिन भीड़ में कम रही।
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तिथि बढ़ते ही कम हुई भीड़
मिर्जापुर। चुनाव आयोग ने एसआईआर की तिथि एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी है। अब 11 दिसंबर तक गणना प्रपत्र भरा जाएगा। इस कारण अब पोलिंग बूथ पर भीड़ कम होे रही है। सोमवार को घंटाघर, बरियाघाट, एएसजे इंटर कॉलेज सहित कई बूथों पर मतदाता पहुंचे लेकिन भीड़ में कम रही।
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