{"_id":"633e9892ba40507b220cea32","slug":"sindoor-khela-farewell-to-mother-with-moist-eyes-with-sindoor-khela-women-performed-the-tradition-of-wishing","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sindoor Khela: सिंदूर खेला के साथ माता को दी नम आंखों से विदाई, महिलाओं ने निभाई अखंड सुहाग की कामना की परंपरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sindoor Khela: सिंदूर खेला के साथ माता को दी नम आंखों से विदाई, महिलाओं ने निभाई अखंड सुहाग की कामना की परंपरा
Thu, 06 Oct 2022 02:28 PM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Thu, 06 Oct 2022 02:28 PM IST
सार
बुधवार को दोपहर बाद से ही बंगीय पंडालों में सिंदूर खेला की परंपरा निभाई गई। मां दुर्गा को विदाई देने से पहले नम आंखों से श्रद्धालुओं ने निहारकर सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आशीष मांगा। माता से अगले साल जल्दी आने की मनुहार भी की।
विज्ञापन
वाराणसी में सिंदूर खेला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हाथों में सिंदूर की थाल, चेहरे पर हल्की उदासी। शारदीय नवरात्र के अंतिम दिन माता को विदाई देते समय हर किसी की आंखें नम हो गईं। बंगीय समाज के पंडालों में महिलाओं ने सिंदूर खेला की परंपरा निभाई। देवी दुर्गा के माथे पर सिंदूर अर्पित करने के बाद महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सुहाग की कामना की गई।
बुधवार को दोपहर बाद से ही बंगीय पंडालों में सिंदूर खेला की परंपरा निभाई गई। मां दुर्गा को विदाई देने से पहले नम आंखों से श्रद्धालुओं ने निहारकर सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आशीष मांगा। माता से अगले साल जल्दी आने की मनुहार भी की।
सिंदूर खेला की रस्म पूरा करने के बाद महिलाओं ने घरों का रुख किया और स्नान के बाद भोजन व प्रसाद ग्रहण किया। माता को सिंदूर अर्पित करने के बाद मां चरणों की धूलि लेकर माता को विदाई की परंपरा निभाई गई। इसके बाद पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं विसर्जन के लिए उठने लगीं। वाहनों पर प्रतिमाओं को विराजमान कराने के बाद श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर माता को रवाना किया। इसी के साथ शारदीय नवरात्र का त्योहार भी पूर्ण हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
बुधवार को दोपहर बाद से ही बंगीय पंडालों में सिंदूर खेला की परंपरा निभाई गई। मां दुर्गा को विदाई देने से पहले नम आंखों से श्रद्धालुओं ने निहारकर सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आशीष मांगा। माता से अगले साल जल्दी आने की मनुहार भी की।
विज्ञापन
सिंदूर खेला की रस्म पूरा करने के बाद महिलाओं ने घरों का रुख किया और स्नान के बाद भोजन व प्रसाद ग्रहण किया। माता को सिंदूर अर्पित करने के बाद मां चरणों की धूलि लेकर माता को विदाई की परंपरा निभाई गई। इसके बाद पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं विसर्जन के लिए उठने लगीं। वाहनों पर प्रतिमाओं को विराजमान कराने के बाद श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर माता को रवाना किया। इसी के साथ शारदीय नवरात्र का त्योहार भी पूर्ण हुआ।
विज्ञापन