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मतदाताओं की खामोशी ने रहस्यमय बनाया चुनाव

Tue, 07 Mar 2017 09:13 PM IST
amarujala.com/written by उत्पल कांत
amarujala.com/written by उत्पल कांत Updated Tue, 07 Mar 2017 09:13 PM IST
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silence voters makes this election mystrioues
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विधानसभा चुनाव के सातवें चरण में वाराणसी और विंध्याचल मंडल की 40 विधानसभा सीटों पर बुधवार को कड़ी सुरक्षा में वोट पड़ेंगे। इन सीटों पर कुल 535 उम्मीदवार मैदान में हैं। प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।   जिस विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव होना है वहां के मतदाताओं ने चुनाव को पूरी तरह रहस्यमय बना दिया है। प्रमुख पार्टियों और उनके गठबंधन दलों के बीच जारी सियासी घमासान किस करवट बैठेगा, इसकी तस्वीर मतदान से एक दिन पहले तक भी साफ नहीं हो सकी है। 
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हैरत की बात यह है कि मतदाता सभी दलों को बराबर तवज्जो दे रहे हैं। लगभग सभी प्रमुख दलों के बड़े नेताओं की जनसभाओं में भीड़ की कोई कमी नहीं हो रही है। मसलन मतदाता सभी को सुन रहे हैं, लेकिन उनके वास्तविक इरादे अब तक कोई भांप नहीं सका है। जबकि जातीय समीकरण और प्रचार-प्रसार के आधार पर सभी प्रत्याशी अपनी जीत पक्की मान रहे हैं।
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  विधानसभा चुनाव में सियासी पारा चढ़ने के साथ ही मतदाताओं की भाव भंगिमा भी रहस्यमयी होती जा रही है। सियासी पार्टियां और उनके बड़े नेता जनसभाओं में भीड़ तो खूब जुटा रहे हैं, लेकिन यह भीड़ किस हद तक वोट में तब्दील हो पाएगी, इस पर सियासी जगत के जानकार भी माथापच्ची में जुटे हैं।
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नारे लग रहे हैं और जनसंपर्क में समर्थन भी पर्याप्त मिल रहा है। मगर सभी को समान प्रतिक्रिया देने की मतदाताओं के मिजाज ने राजनीतिक दलों को भी असमंजस में डाल रखा है। एक राजनीतिक दल में महत्वपूर्ण स्थान पर आसीन पदाधिकारी की मानें तो मतदाता पूरी तरह खामोश है।

जिस विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव होना है वहां  के तमाम गांवों का चक्कर लगाने और विभिन्न समुदायों के लोगों से बातचीत के बाद जो तस्वीर बनी, वह हर दूसरे दिन बदलती रही।


चुनाव में महज कुछ घंटो का समय बचा है, लेकिन मतदाताओं का रुख अब तक बड़े-बड़े सियासी पंडित की समझ से परे है। बता दें कि अब तक अमूमन जातीय गुणागणित के आधार पर बनते रहे पूर्वांचल के चुनावी समीकरण इस बार अप्रत्याशित रूप लेते दिख रहे हैं।

जाहिर है, या तो मतदाताओं के आकलन की कसौटी इस बार कड़ी है अथवा मतदाताओं ने अंदर ही अंदर मन बना लिया है।
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