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बभनियांव में जारी खोदाई: बाढ़ के जमाव का मोटा मिट्टी का टीला मिला, 2200 साल पहले के फर्श और चूल्हे का प्रमाण भी
Sat, 12 Mar 2022 10:52 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Mar 2022 10:52 AM IST
सार
वाराणसी के बभनियांव में 20 फरवरी से चल रही खोदाई में हर दिन कई पुरावशेष मिल रहे हैं। शुक्रवार को लगभग 2200 साल पहले के फर्श और सामुदायिक चूल्हे का प्रमाण मिला है। इसके अलावा बाढ़ के समय मिट्टी के जमाव का टीला मिला है।
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वाराणसी के बभनियांव में 20 फरवरी से चल रही खोदाई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाराणसी के बभनियांव में चल रही खोदाई में शुक्रवार को बीएचयू की टीम को शुंग कुषाणकालीन फर्श और सामुदायिक चूल्हे के प्रमाण मिले हैं। करीब 2200 साल पहले बने इस चूल्हे का प्रयोग सामूहिक भोज और अन्य कार्यक्रमों में किया जाता रहा है। इसके अलावा बाढ़ के जमाव का एक मोटा मिट्टी का टीला, पकी मिट्टी का चक्र और खिलौने की बैलगाड़ी के पहिये के साथ ही रीड मार्क्स भी बड़ी मात्रा में मिले हैं।
बीएचयू प्राचीन इतिहास विभाग के प्रो. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि पिछले दिनों गांव में ही शिव मंदिर के प्रदक्षिणा पथ के नीचे खोदाई में जो शुंगकालीन पक्की ईंटों की संरचना मिली थी। उनका मंदिर से संबंध है कि नहीं इस बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
बताया कि शुक्रवार को लगभग 2200 साल पहले के फर्श और सामुदायिक चूल्हे का प्रमाण मिला है। इसके अलावा बाढ़ के समय मिट्टी के जमाव का जो टीला मिला है, उसको देखने के बाद यह पता चला कि कि यहां 2200 साल से लेकर 2400 साल के बीच 200 साल तक नदी के पास बाढ़ का इतना ज्यादा प्रभाव था कि 200 साल तक यहां कोई रहा नहीं है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा शुंग कुषाण कालीन मिट्टी के बर्तनों के अलावा अन्य पुरावशेष भी मिले हैं जिसमें कटोरे, ढक्कन, तसले, बर्तन और घड़े भी मिले हैं।
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पढ़ेंः खोदाई में मिला अंजन सलाका और लटकन, 2500 साल पहले महिलाएं करतीं थीं उपयोग
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बीएचयू प्राचीन इतिहास विभाग के प्रो. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि पिछले दिनों गांव में ही शिव मंदिर के प्रदक्षिणा पथ के नीचे खोदाई में जो शुंगकालीन पक्की ईंटों की संरचना मिली थी। उनका मंदिर से संबंध है कि नहीं इस बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
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बताया कि शुक्रवार को लगभग 2200 साल पहले के फर्श और सामुदायिक चूल्हे का प्रमाण मिला है। इसके अलावा बाढ़ के समय मिट्टी के जमाव का जो टीला मिला है, उसको देखने के बाद यह पता चला कि कि यहां 2200 साल से लेकर 2400 साल के बीच 200 साल तक नदी के पास बाढ़ का इतना ज्यादा प्रभाव था कि 200 साल तक यहां कोई रहा नहीं है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा शुंग कुषाण कालीन मिट्टी के बर्तनों के अलावा अन्य पुरावशेष भी मिले हैं जिसमें कटोरे, ढक्कन, तसले, बर्तन और घड़े भी मिले हैं।
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