श्रीराम मंदिर के लिए अब यूपीआई व बारकोड से नहीं ली जाएगी राशि, चंपत राय बोले- गड़बड़ी मिलने पर निर्णय
चंपत राय बोले-
- ऐसी सरकार 70 सालों में नहीं आई थी, यह देशभक्तों और किसानों के हित की सरकार है
- काशी विश्वनाथ के लिए बनारस के लोग सोचें, देशभर में धन संग्रह के लिए अभियान चलाया जा रहा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के देशभर में धन संग्रह के लिए अभियान चलाया जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष व श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय शुक्रवार को वाराणसी में थे। शहावाबाद में प्रेसवार्ता में चंपत राय ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद व राष्ट्रीय सेवक संघ के कार्यकर्ता घर-घर जाकर समर्पण राशि मंदिर निर्माण के लिए लोगों से ले रहे हैं।
समर्पण राशि उच्च पारदर्शिता के तहत ली जा रही है। इसमें किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी की संभावना नहीं है। वहीं यूपीआई और बारकोड से ली जा रही समर्पण राशि में गड़बड़ी की सूचना मिली। अब निर्णय लिया गया है कि यूपीआई और बारकोड से समर्पण राशि नहीं ली जाएगी।
1500 करोड़ रुपये की समर्पण राशि मिली
चंपत राय ने कहा कि जन्मभूमि के लिए समाज समर्पण कर रहा है। हम लोगों का यह संकल्प है कि हम पूरे देश में चार लाख गांवों के 14 करोड़ परिवारों से समर्पण राशि लेने का काम करेंगे। अब तक 1500 करोड़ रुपये से अधिक की समर्पण राशि आ चुकी है।
यह देशभक्तों की सरकार है: चंपत राय
चंपत राय ने कहा कि वर्तमान सरकार के प्रति कटिबद्ध हूं। ऐसी सरकार 70 सालों में नहीं आई थी, यह देशभक्तों की सरकार है। किसानों के हित की सरकार है। विदेशी शक्तियों के अनुसार यह सरकार नहीं चल रही है जिससे विरोधी अंतिम सांस गिन रहे हैं। विपक्ष के लोग हताश और निराश हैं जिससे वह अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। मगर देश की जनता देख रही है और ऐसे लोगों का बहिष्कार कर रही है। वर्तमान सरकार देश के स्वाभिमान को ऊंचा कर रही है जिस पर हम सभी देशवासियों को गर्व करना चाहिए।
मंदिर परिसर में किसी भी दानदाता के नाम का उल्लेख नहीं होगा
उन्होंने कहा कि चांदी कि अभी जरूरत नहीं है, लोगों को मना किया जा रहा है कि वह चांदी दान न दें। मंदिर निर्माण का कार्य तीन वर्ष में पूरा हो जाएगा। स्थानीय कार्यकर्ता यह तय करेगा कि कहां से समर्पण निधि लेना है। गरीब व्यक्ति भी गर्व से कह सकता है कि हमने मंदिर निर्माण में सहयोग किया था। मंदिर परिसर में किसी भी दानदाता के नाम का उल्लेख नहीं किया जाएगा। शहावाबाद स्थित जालान होलसेल में वहां के कर्मचारियों ने मंदिर निर्माण समर्पण राशि में पांच लाख तीन हजार 140 रुपये चंपत राय को सौंपी। इस अवसर पर सूर्यकांत जालान, कन्हैया सिंह आदि लोग मौजूद थे।