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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Shravani Upkarma Rituals will be performed on banks of Ganga to atone Brahmins will purify themselves

श्रावणी उपाकर्म: समस्त पापों के प्रायश्चित के लिए गंगा तट पर होंगे अनुष्ठान, ब्राह्मण करेंग आत्मशुद्धि

Fri, 08 Aug 2025 05:44 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 08 Aug 2025 05:44 AM IST
सार

Varanasi News: ब्राह्मण परिवार के लोग इस उपाकर्म को पूरे विधि-विधान से करते हैं। उत्तर भारत में इसका विशेष आयोजन होता है। गंगा में बाढ़ के कारण इस बार यह आयोजन काशी की गलियों में संपन्न कराया जाएगा।

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Shravani Upkarma Rituals will be performed on banks of Ganga to atone Brahmins will purify themselves
श्रावणी उपाकर्म। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

Shravani Upakarma 2025: सावन की पूर्णिमा पर नौ अगस्त को श्रावणी उपाकर्म मनाया जाएगा। हेमाद्रि संकल्प, दशविध स्नान, ऋषि तर्पण, देव और पितृ तर्पण के साथ ही भगवान सूर्य से ओज व तेज की कामना की जाएगी। गंगा ट पर होने वाले आयोजन के लिए तैयारियां चल रही हैं। बाढ़ के कारण इस बार के आयोजन अब गलियों में होंगे।

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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में श्रावणी उपाकर्म की तैयारियां चल रही हैं। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में श्रावणी उपाकर्म होगा। इसका संयोजन वेद विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र पांडेय एवं सामवेद के विद्वान आचार्य प्रो. विजय शर्मा करेंगे। केदारघाट पर सुबह से श्रावणी उपाकर्म की शुरुआत होगी। 
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सुबह 7:30 बजे से मां गंगा के पूजन के साथ ही समस्त पापों की निवृत्ति के लिए हेमाद्रि संकल्प, दशविधि स्नान, ऋषि तर्पण, देव तर्पण एवं पितृ तर्पण का कार्य किया जाएगा। इसके बाद वेद विभाग में ऋषि पूजन सुबह 10:30 से होगा। इसमें चार वेद और शास्त्रों का आवाहन किया जाएगा। अस्सी से राजघाट के बीच होने वाले श्रावणी उपाकर्म से ब्राह्मण अपनी आत्मशुद्धि करेंगे।

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क्या होता है श्रावणी उपाकर्म
काशी सहित पूरे उत्तर भारत में जनेऊ को बदलने और उसको पूजन करने का कार्य इसी दिन होता है। इसे श्रावणी उपाकर्म कहते हैं। श्रावणी उपाकर्म में यज्ञोपवीत पूजन और उपनयन संस्कार करने का विधान है। 

श्रावण पूर्णिमा पर रक्षासूत्र बांधने, यज्ञोपवीत धारण करने, व्रत करके गंगा स्नान करने, दान करने, ऋषि पूजन करने,सूर्य पूजन, तर्पण करने और तप करने का महत्व रहता है। गंगा के किनारे काशी के सभी घाटों पर, किसी गुरु के सानिध्य में या समूह में रहकर श्रावणी उपाकर्म होगा।

श्रावणी उपाकर्म के दो पक्ष हैं

पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म के दो पक्ष हैं- प्रायश्चित संकल्प और संस्कार। ब्राह्मण अपने यजमानों के शुद्ध और अशुद्ध सभी प्रकार के कार्य करवाते हैं। उसके प्रायश्चित से बचने के लिए विशेष संकल्प लिया जाता है।

प्रायश्चित्त संकल्प में हेमाद्रि स्नान संकल्प। (यह स्नान विशेष रूप से तीर्थों, नदियों, व्रतों या पर्वों के समय किया जाता है, जिसमें जल, द्रव्य (जैसे तिल, पुष्प, दूध आदि) और मंत्रों का प्रयोग करके देवताओं को स्नान कराया जाता है।)

गंगा में आचार्य के समक्ष  गोदुग्ध, दही, घृत, गोबर और गोमूत्र तथा पवित्र कुशा से स्नानकर और उसको मंत्र उच्चारण के साथ गंगा में लगभग दो घंटे खड़े होकर पंचगव्य के रूप में ग्रहण किया जाता है। जिससे वर्षभर में जाने-अनजाने में हुए पापकर्मों का प्रायश्चित्त कर जीवन को सकारात्मकता दिशा मिलती है।

या यूं कहें कि नए जीवन की प्राप्ति होती है। स्नान के बाद ब्राह्मण जन आश्रमों में विधि विधान से ऋषिपूजन, सूर्य पूजन एवं यज्ञोपवीत पूजन करते हैं और उसी पूजा किए हुए जनेऊ को साल भर तक पहनते हैं।

बहुत ही विशेष होते हैं नियम

संस्कार : उपरोक्त कार्य के बाद नवीन यज्ञोपवीत या जनेऊ धारण करना अर्थात आत्म संयम का संस्कार होना माना जाता है। इस संस्कार से व्यक्ति का दूसरा जन्म हुआ माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि जो व्यक्ति आत्म संयमी है, वही संस्कार से दूसरा जन्म पाता है।

पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में श्रावणी उपाकर्म परंपरा भी विलुप्त होती जा रही है। जो ब्राह्मण है अनुष्ठान , यज्ञ करवाते हैं उनको इस परंपरा का ध्यान रखना चाहिए और इस परंपरा  की शिक्षा आगे आने वाली पीढ़ी को भी देना चाहिए।

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