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श्रावणी उपाकर्म: घाटों पर द्विजों ने निभाया प्राचीन विधान, सप्तऋषि पूजन; नवीन यज्ञोपवीत धारण किए

Sat, 29 Aug 2026 12:44 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 29 Aug 2026 12:44 PM IST
सार

वाराणसी में श्रावण पूर्णिमा पर द्विजों ने घाटों पर श्रावणी उपाकर्म का प्राचीन विधान निभाया। मां गंगा को साक्षी मानकर हेमाद्रि संकल्प लिया और दशविधि स्नान कर आत्मशुद्धि की। इसके बाद सप्तऋषि पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञोपवीत का अभिमंत्रण कर द्विजों ने नवीन यज्ञोपवीत धारण किए। घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान से वातावरण भक्तिमय रहा।

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Shravani Upakarma Dvija communities observed ancient rituals including worship of Saptarishis and donning
अहिल्याबाई घाट पर श्रावणी उपकर्म में शामिल ब्राह्मण और बटुक। - फोटो : संवाद

विस्तार

श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर काशी में वैदिक रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ श्रावणी उपाकर्म का महापर्व मनाया गया। सूर्य की पहली किरण के साथ ही गंगा के प्रमुख घाटों, मठों, आश्रमों और वेद विद्यालयों में जनेऊधारी ब्राह्मणों व बटुकों ने मां गंगा को साक्षी मानकर आत्मशुद्धि, हेमाद्रि संकल्प, दशविधि स्नान, देव-ऋषि-पितृ तर्पण और सप्तऋषि पूजन कर नवीन यज्ञोपवीत धारण किया।

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अहिल्याबाई घाट पर विप्र समाज उत्तर प्रदेश और प्राचीन संस्था शास्त्रार्थ महाविद्यालय (दशाश्वमेध) के संयुक्त तत्वावधान में शुक्लयजुर्वेदीय माध्यांदिनी शाखा के ब्राह्मणों ने उपाकर्म किया। वैदिक पं. विकास दीक्षित के आचार्यत्व में  हेमाद्रि संकल्प पढ़ा गया। आयोजन में डॉ. गणेश दत्त शास्त्री, डॉ. आमोद दत्त शास्त्री, डॉ. पवन शुक्ल, डॉ. अशोक पांडेय, पं. विशाल औढेंकर सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे।
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उधर, श्रीकाशी विश्वनाथ धाम भैरव द्वार गंगा घाट पर श्रीसतुआ बाबा आश्रम की ओर से संतोषाचार्य महाराज के सान्निध्य में अनुष्ठान हुआ। वहीं, अस्सी घाट पर सरयू पारीण ब्राह्मण परिषद के तत्वावधान में अध्यक्ष पं. पारसनाथ उपाध्याय, संरक्षक पं. सतीश चंद्र मिश्र व मंत्री पं. मिलन चतुर्वेदी की मौजूदगी में भागीरथी तट पर तर्पण किया गया। पंजाबी भगवान मंदिर में विद्वान कर्मकांडी पं. श्रीप्रकाश पांडेय के आचार्यत्व में पूजन संपन्न हुआ। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वेद विभाग ने शुक्रवार को श्रावणी उपाकर्म का आयोजन किया।  वरुणा नदी तट रामेश्वर पर 200 ब्राह्मणों ने श्रावणी उपाकर्म पूजा की। रामेश्वर मंदिर के पीठाधीश्वर अन्नू तिवारी ने संयोजन किया। 

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बीएचयू में निभाई गई महामना काल की परंपरा
बीएचयू में शुक्रवार को सावन की पूर्णिमा पर श्रावणी उपाकर्म विधि-विधान पूर्वक संपन्न हुआ। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के काल से चली आ रही इस परंपरा का पालन किया गया। तुलसी घाट और मालवीय भवन में वैदिक अनुष्ठान किया गया। विश्वविद्यालय परिसर स्थित मालवीय भवन में वैदिक रीति से ऋषि पूजन, उपाकर्म और नूतन यज्ञोपवीत धारण की विधि पूरी की गई। 

कच्चा बाबा आश्रम में श्रावणी उपाकर्म संपन्न
जाल्हूपुर स्थित संत श्री कच्चा बाबा आश्रम में शुक्रवार को श्रावणी उपाकर्म वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान, यज्ञोपवीत परिवर्तन और ऋषि तर्पण कर आत्मशुद्धि के संकल्प लिए। श्रावणी उपाकर्म को वैदिक परंपरा में नए अध्ययन और आध्यात्मिक संकल्प का पर्व माना जाता है।

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