वाराणसीः फार्च्यूनर के धक्के से टूटी दुकान, पुलिस ने शिकायती पत्र लेने से किया इनकार, भुखमरी के कगार पर दुकानदार का परिवार
फास्ट फूड की दुकान वाले अमित यादव ने कहा कि पुलिस चौकी इंचार्ज राजीव सिंह ने उस समय प्रार्थना पत्र नहीं लिया और जबकि आर्थिक मुआवजा दिलाने का भरोसा दिलाया था।
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कर्ज लेकर फास्ट फूड की दुकान खोली थी। पिछले हफ्ते अनियंत्रित फार्च्यूनर दुकान में घुसी तो सब साफ हो गया। उस दौरान कढ़ाई के खौलते तेल से दुकानदार झुलस गया और हाथ पैर में चोर्टें आईं। वाराणसी के आशापुर पुलिस चौकी इंचार्ज ने उस समय मदद का आश्वासन देकर शिकायती पत्र पत्र लेने से इंकार कर दिया। अब चौकी से भगा दे रहे हैं।
यह कहना है लेढूपुर के फुटवा नारे पर फास्ट फूड की दुकान वाले अमित यादव का। पीड़ित के अनुसार चौकी इंचार्ज ने भरोसा दिलाया था कि फार्च्यूनर सवार से क्षति का मुआवजा दिलाया जाएगा। 31 अगस्त की शाम पहड़िया से बलुआ की ओर से जाते समय लेढृपुर स्थित फुटहवा नारे के पास फार्च्यूनर की टक्कर से अमित यादव की फास्टफूड दुकान टूट गई थी।
इस दौरान अमित यादव और चंदौली निवासी बाइक सवार दीपक पाल कढ़ाई के खौलते तेल से झुलस गए थे। वहीं आटो चालक कन्हैया पाल भी गंभीर रूप से घायल हुआ था। पीड़ितों का आरोप है कि मौके पर पहुंचे आशापुर पुलिस चौकी इंचार्ज राजीव सिंह ने उस समय प्रार्थना पत्र नहीं लिया और जबकि आर्थिक मुआवजा दिलाने का भरोसा दिलाया था।
इस संबंध में सारनाथ इंस्पेक्टर नागेश कुमार सिंह ने बताया कि अकस्मात घटना घटी थी, यदि पीड़ितों की कोई समस्या और परेशानी है तो थाने आकर मिल सकते हैं।
दुकान नहीं आवंटित होने पर दुकानदार ने की आत्महत्या की कोशिश
गोदौलिया के बहुमंजिला पार्किंग को बनाने में चाय की दुकान टूटने और नई दुकान न मिलने से परेशान दुकानदार ने शनिवार की रात जहरीला पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या की कोशिश की। उसे परिजनों ने सामनेघाट स्थित निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया। इस घटना से आहत व्यापारियों का प्रतिनिधि मंडल रविवार को परिजनों से मुलाकात कर हाल जाना।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष राकेश जैन ने बताया कि गिरजाघर स्थित संजय गांधी मार्केट के व्यवसायी बाबू यादव की 50 साल पुरानी चाय की दुकान थी। बहुमंजिला पार्किंग बनने के दौरान दुकान टूटने के बाद बाबू परेशान थे।
जिला प्रशासन ने व्यवसायियों की दुकानें तोड़ते समय वादा किया गया था कि छह महीने के अंदर दुकानें बना कर दी जाएंगी। कई महीने बीत गए पर दुकान नहीं मिलीं। बाबू के बड़े भाई राजू ने बताया कि दुकान न होने से बाबू के बच्चों का स्कूल से नाम काट दिया गया। परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी।