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Varanasi News: पारंपरिक शास्त्रों के अध्ययन के लिए रामनगर में तैयार हो रहा शास्त्र भवन
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संस्कृत भाषा एवं पारंपरिक शास्त्रों के संरक्षण पर संगोष्ठी का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। संस्कृत भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. जयप्रकाश गौतम ने कहा कि संस्कृत भाषा की रक्षा का संकल्प और शलाका परीक्षा का प्रारंभ काशी की भूमि से संस्कृत भारती ने आरंभ किया था। पारंपरिक शास्त्रों के संरक्षण के लिए रामनगर में शास्त्र भवन का निर्माण कराया जा रहा है जहां पर केवल पारंपरिक शास्त्रों के अध्ययन होंगे।
वह शनिवार को श्रीकाशी विद्वत परिषद के संयोजन में संस्कृत भाषा एवं पारंपरिक शास्त्रों के संरक्षण विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। गुरु कार्षणी विद्या भवन कबीर नगर में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. गौतम ने कहा कि यह काशी प्रमाणीकरण की भूमि है। काशी के विद्वानों के आशीर्वाद से ही विश्व में संस्कृत भाषा का प्रसार होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का संविधान संस्कृत भाषा में भी उपलब्ध कराया गया। यह संस्कृत अनुरागियों के लिए गौरव का क्षण है। अध्यक्षता करते हुए काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा भारत की आत्मा संस्कृत है। संयोजन एवं संचालन करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि भारत और सनातन संस्कृति को जानने के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान आवश्यक है। इस दौरान प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. कमलेश झा, प्रो. विनय कुमार पांडेय, प्रो. शंकर कुमार मिश्र, प्रो. रमाकांत पांडेय मौजूद रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। संस्कृत भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. जयप्रकाश गौतम ने कहा कि संस्कृत भाषा की रक्षा का संकल्प और शलाका परीक्षा का प्रारंभ काशी की भूमि से संस्कृत भारती ने आरंभ किया था। पारंपरिक शास्त्रों के संरक्षण के लिए रामनगर में शास्त्र भवन का निर्माण कराया जा रहा है जहां पर केवल पारंपरिक शास्त्रों के अध्ययन होंगे।
वह शनिवार को श्रीकाशी विद्वत परिषद के संयोजन में संस्कृत भाषा एवं पारंपरिक शास्त्रों के संरक्षण विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। गुरु कार्षणी विद्या भवन कबीर नगर में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. गौतम ने कहा कि यह काशी प्रमाणीकरण की भूमि है। काशी के विद्वानों के आशीर्वाद से ही विश्व में संस्कृत भाषा का प्रसार होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का संविधान संस्कृत भाषा में भी उपलब्ध कराया गया। यह संस्कृत अनुरागियों के लिए गौरव का क्षण है। अध्यक्षता करते हुए काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा भारत की आत्मा संस्कृत है। संयोजन एवं संचालन करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि भारत और सनातन संस्कृति को जानने के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान आवश्यक है। इस दौरान प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. कमलेश झा, प्रो. विनय कुमार पांडेय, प्रो. शंकर कुमार मिश्र, प्रो. रमाकांत पांडेय मौजूद रहे।
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