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शारदीय नवरात्रि: माता विंध्यवासिनी का चरण स्पर्श 24 घंटे रहेगा प्रतिबंधित, इन चीजों पर भी लगा बैन

Tue, 09 Oct 2018 03:45 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 09 Oct 2018 03:45 PM IST
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Shardiya navratri 2018 these some items ban in Vindhyachal temple
- फोटो : अमर उजाला
शारदीय  नवरात्र शुरू होने पर सिद्धपीठ मां विंध्यवासिनी धाम में भी व्यवस्थाएं बदलने लगी हैं। शारदीय नवरात्र मेला को सकुशल संपन्न कराने के उद्देश्य से श्री विंध्य पंडा समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने बैठक की। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि नवरात्र मेले में मां विंध्यवासिनी का चरण 24 घंटे पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही सभी तीर्थ पुरोहित अपने वेशभूषा में ही मंदिर पर रहेंगे तथा मंदिर पर पान, गुटखा, मोबाईल व शस्त्र पर पूर्ण रूप से पाबंदी रहेगी।
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दूरदराज से आने वाले आस्थावानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े इसका पूरा ध्यान रखने को कहा गया। बैठक के दौरान सभी वरिष्ठ तीर्थ पुरोहितों के साथ मंदिर परिसर में मेले के दौरान व्यवस्था को और कैसे सुदृढ़ बनाया जाए, जिस पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई।
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नवनिर्वाचित अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने कहा कि माता विंध्यवासिनी मंदिर की गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है।शारदीय नवरात्र मेला के मद्देनजर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों के लिए व्यवस्थाओं को दुरूस्त बनाया गया है। मां के दर्शन के लिए दूरदराज से आने वाले दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य केंद्र पर 40 चिकित्सक, 21 फार्मासिस्ट, 10 महिला स्टाफ नर्स, 35 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सहित मरीजों के लिए तीन एंबुलेंस की भी व्यवस्था कराई गई है।
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इसके साथ ही भक्तों की सुविधा के लिए विंध्याचल के पक्काघाट, कंट्रोल रूम, पुरानी वीआईपी रोड, रेहड़ा चुंगी व अष्टभुजा पहाड़ के रैन बसेरा पर अस्थाई कैंप लगाया जाएगा। बता दें कि मां विंध्यवासिनी एक ऐसी जागृत शक्तिपीठ है जिसका अस्तित्व सृष्टि आरंभ होने से पूर्व और प्रलय के बाद भी रहेगा।  

यहां देवी के तीन रूपों का सौभाग्य भक्तों को प्राप्त होता है। पुराणों में विंध्य क्षेत्र का महत्व तपोभूमि के रूप में वर्णित है। मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केन्द्र है। देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है विंध्याचल की देवी मां विंध्यवासिनी। यहां कीपहाड़ियों में गंगा की पवित्र धाराओं की कल-कल करती ध्वनि, प्रकृति की अनुपम छटा बिखेरती है। 

इस बार नौ दिनों का होगा शारदीय नवरात्र

Shardiya navratri 2018 these some items ban in Vindhyachal temple
नवदुर्गा के उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र 10 अक्तूबर बुधवार से प्रारंभ होगा। इस बार घट स्थापना दोपहर के समय किया जा सकेगा। काशी विद्युत परिषद के संगठन मंत्री शास्त्री पंडित दीपक मालवीय ने बताया कि बुधवार से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र में घट स्थापना का मुहूर्त मध्याह्न 11.36 से लेकर 12.24 तक है।

पूजा पंडालों में स्थापित की जाने वाली दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना सप्तमी तिथि में की जाएगी। सप्तमी तिथि 15 अक्तूबर सोमवार को प्रात: 8.36 बजे से लग जाएगी, जो कि 16 अक्तूबर मंगलवार दिन में 10.30 बजे तक रहेगी। अत: पूजा पंडालों में देवी मूर्तियों की स्थापना 16 अक्तूबर मंगलवार को ही होगी।

अष्टमी का व्रत 17 अक्तूबर बुधवार को किया जाएगा। महानवमी 18 अक्टूबर गुरुवार को दिन में 2.31 तक है। नवरात्र व्रत का पारण दशमी तिथि में 2.30 बजे के बाद कर लिया जाएगा। शास्त्री के अनुसार इस बार शक्ति स्वरूपा का आगमन तुरंग यानि की अश्व से होगा जबकि प्रस्थान गज यानि की हाथी से होगा।

इसमें सत्ता परिवर्तन, सुख समृद्धि व उत्तम वर्षा का योग माना गया है। वहीं पंडालों में सप्तमी को देवी प्रतिमाओं की स्थापना और पूजन किया जाएगा। इसको लेकर तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। 

अंतिम चरण में है पंडालों का निर्माण कार्य

बनारस में बन रहे 240 पंडालों का निर्माण कार्य अपने अंतिम रूप में है। सभी अपने अपने हिसाब से मंदिर और अन्य थीम पर निमार्ण कराने में लगे हुए है। ये पंडाल अपने अपने हिसाब से भव्यता को प्रदर्शित करने में लगे हुए है।
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