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चंद्र किरणों के साथ हुई अमृत की बरसात
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शरद पूर्णिमा की रातभर चंद्र किरणों से बरसने वाले अमृत को संजोने का जतन हुआ। 16 कलाओं से युक्त चंद्रमा की किरणों ने जब चांदनी बिखेरी तो श्रद्धालुओं ने भी महालक्ष्मी की अगवानी की। घरों से लेकर मंदिर व मठों में माता लक्ष्मी के निमित्त अनुष्ठान संपन्न हुए। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मंदिरों में शृंगार हुआ तो घरों में माता को पायस का भोग लगाया।
शुक्रवार को शरद पूर्णिमा पर आसमान से बरसने वाले अमृत को सहेजने के लिए छतों पर खीर बनाकर रखी गई। वहीं शहर के विष्णु मंदिरों में दर्शन पूजन का सिलसिला चलता रहा। शरद पूर्णिमा पर मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस रात गोपियों संग महारास रचाया था। बिंदुमाधव मंदिर में आस्थावान दर्शन के लिए सुबह से ही पहुंचने लगे थे। इस्कॉन मंदिर के आनंद कृष्ण ने बताया कि चैतन्य महाप्रभु अपने काशी प्रवास के दौरान प्रतिदिन बिंदु माधव मंदिर में दर्शन पूजन के लिए आते थे। इस्कॉन मंदिर ने शरद पूर्णिमा के महापर्व पर विष्णु स्वरुप माने जाने वाले भगवान बिंदु माधव के मंदिर की प्रतिमा को सोशल मीडिया पर साझा किया। खोजवां, दशाश्वमेध, अस्सी, पंचगंगा, वरुणा गंगा के संगम पर स्थित भगवान विष्णु के मंदिरों में दर्शन पूजन की कतार लगी रही।
अरणी मंथन से प्रज्ज्वलित हुई अग्नि
वेद पारायण केंद्र में महालक्ष्मी की आराधना विधिवत संपन्न हुई। काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी के आचार्यत्व में संपूर्ण अनुष्ठान संपन्न हुआ। शुक्रवार को महालक्ष्मी की स्थापना के बाद अरणी मंथन से अग्निदेव का आह्वान किया गया। इसके बाद यज्ञ कुंड प्रज्ज्वलित हो उठा। ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रों से यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं।
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शुक्रवार को शरद पूर्णिमा पर आसमान से बरसने वाले अमृत को सहेजने के लिए छतों पर खीर बनाकर रखी गई। वहीं शहर के विष्णु मंदिरों में दर्शन पूजन का सिलसिला चलता रहा। शरद पूर्णिमा पर मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस रात गोपियों संग महारास रचाया था। बिंदुमाधव मंदिर में आस्थावान दर्शन के लिए सुबह से ही पहुंचने लगे थे। इस्कॉन मंदिर के आनंद कृष्ण ने बताया कि चैतन्य महाप्रभु अपने काशी प्रवास के दौरान प्रतिदिन बिंदु माधव मंदिर में दर्शन पूजन के लिए आते थे। इस्कॉन मंदिर ने शरद पूर्णिमा के महापर्व पर विष्णु स्वरुप माने जाने वाले भगवान बिंदु माधव के मंदिर की प्रतिमा को सोशल मीडिया पर साझा किया। खोजवां, दशाश्वमेध, अस्सी, पंचगंगा, वरुणा गंगा के संगम पर स्थित भगवान विष्णु के मंदिरों में दर्शन पूजन की कतार लगी रही।
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अरणी मंथन से प्रज्ज्वलित हुई अग्नि
वेद पारायण केंद्र में महालक्ष्मी की आराधना विधिवत संपन्न हुई। काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी के आचार्यत्व में संपूर्ण अनुष्ठान संपन्न हुआ। शुक्रवार को महालक्ष्मी की स्थापना के बाद अरणी मंथन से अग्निदेव का आह्वान किया गया। इसके बाद यज्ञ कुंड प्रज्ज्वलित हो उठा। ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रों से यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं।
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