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Sharad Purnima 2022: आज रात आसमान से जमीन पर होगी अमृत की बरसात, क्यों बनाई जाती है खीर ?

Sun, 09 Oct 2022 12:41 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Sun, 09 Oct 2022 12:41 PM IST
सार

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में बैठने से शारीरिक रोगों से मुक्ति मिलती है। श्वांस एवं पित्त संबंधी बीमारी दूर होती है। शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्र दर्शन करने से नेत्र संबंधी रोग दूर हो जाते हैं,नेत्र ज्योति बढ़ती है। इस रात्रि खीर का भोग लगाकर आसमान के नीचे रखी जाती है एवं सुबह भोग लगाकर वितरित की जाती है।

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शरद पू्र्णिमा - फोटो : sharad purnima

विस्तार

आज शरद पूर्णिमा है। साल की सभी पूर्णिमाओं में आश्विन मास की शरद पूर्णिमा श्रेष्ठतम मानी गई है क्योंकि इस दिन महालक्ष्मी की पूजा-आराधना करके अपने इष्ट कार्य को तो सिद्ध किया ही जा सकता है साथ ही राधा-कृष्ण की आराधना के लिए भी यह पूर्णिमा सर्वोपरि मानी गई है। इस साल 9 अक्टूबर,रविवार यानी आज शरद पूर्णिमा का उत्सव मनाया जाएगा। शरद पूर्णिमा को कोजोगार पूर्णिमा, रास पूर्णिमा या कुमार पूर्णिमा कहा जाता है और इस दिन रखे जाने वाले व्रत को कौमुदी व्रत कहते हैं।
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शरद पूर्णिमा की रात्रि से कार्तिक पूर्णिमा की रात्रि तक आकाश दीप जलाकर दीपदान की महिमा है। दीपदान करने से घर के समस्त दुख-दारिद्रय का नाश होता है तथा सुख समृद्धि का आगमन होता है। गंगा के तट पर अमर शहीदों की राह में आकाशदीप रोशन होते हैं। काशी में कार्तिक मास पर्यंत स्नान और गंगा तट पर दीप प्रज्जवलन करने की परंपरा है। 
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शरद पूर्णिमा - फोटो : शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा पर अमृत वर्षा करते हैं चंद्रदेव
वर्षा ऋतु के बाद पहली पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, उसके बाद मौसम में कोहरे के साथ ठंडक शुरू हो जाती है। शरद पूर्णिमा की रात्रि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है और वह अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है। इस रात्रि में चन्द्रमा का ओज सबसे तेजवान और ऊर्जावान होता है। इस रात चन्द्रमा की किरणों से अमृत तत्व बरसता है, चन्द्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ पृथ्वी पर शीतलता, पोषक शक्ति और शांति रूपी अमृत वर्षा करते हैं। चांद की उज्ज्वल किरणें जब फसलों, पेड़-पौधों, पेय एंव खाद्य पदार्थो में पड़ती हैं तो इनमें अमृत्व का प्रभाव आ जाता है और ये जीवनदायिनी होकर जीव-जगत को आरोग्य प्रदान करती है। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है-पुष्णामि चौषधिः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्यमकः।। “मैं रसस्वरूप अर्थात अमृतमय चंद्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों को, वनस्पतियों को पुष्ट करता हूँ।“

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में बैठने से शारीरिक रोगों से मुक्ति मिलती है। श्वांस एवं पित्त संबंधी बीमारी दूर होती है। शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्र दर्शन करने से नेत्र संबंधी रोग दूर हो जाते हैं,नेत्र ज्योति बढ़ती है। इस रात्रि खीर का भोग लगाकर आसमान के नीचे रखी जाती है एवं सुबह भोग लगाकर वितरित की जाती है। इस रात्रि में जागरण करने और मां लक्ष्मी की उपासना से धन-धान्य की प्राप्ति होती है।  
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