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काशी की धरोहरों को बचाने के लिए शंकराचार्य ने दिया सरकार को अल्टीमेटम

Fri, 20 Apr 2018 10:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी Updated Fri, 20 Apr 2018 10:50 AM IST
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Shankaracharya gives ultimatum to UP government for Kashi destroy
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लिए चल रहे मंदिरों के ध्वस्तीकरण का विरोध तेज हो गया है। अब इस विरोध में ज्योतिष शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने शासन और प्रशासन को अल्टीमेटम भेजा है। 
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उन्होंने कहा है अगर सरकार और प्रशासन अपने रवैये से बाज नहीं आते तो वह काशीवासियों को आंदोलन के लिए प्रेरित करेंगे। शंकराचार्य ने धरोहर समिति को पत्र लिखकर इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की निंदा की है।
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गुरुवार को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने धरोहर समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा है कि अविमुक्तेश्वरानंद से यह समाचार मिला है कि काशी में मणिकर्णिका खंड के अंतर्गत काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास पुराणवर्णित अत्यंत प्राचीन देवालयों को तोड़ा जा रहा है। यह बहुत ही अनुचित है।

सर्वदेवमय काशी का यह वैशिष्ट्य है कि यहां शास्त्रोक्त सभी देवताओं का स्थान कहीं न कहीं अवस्थित है। उनका संरक्षण पूजन-अर्चन होना चाहिए न कि विध्वंस। यह काशी के इतिहास में संभवत: अपूर्व घटना है। इस तरह देव प्रतिमाओं का विध्वंस किया जा रहा है जो मुगलों और अंग्रेजों के शासनकाल में भी नहीं हुआ।

काशी प्राचीन काल से ही मंदिरों का नगर कहा जाता है। इसके इस स्वरूप का संरक्षण धर्मनिरपेक्ष सरकार का दायित्व है। मंदिरों का सरकारीकरण कर उनसे मिलने वाले धन को सरकार इन मंदिरों के संरक्षण में लगाए न कि उनका विध्वंस कर वहां से धन उगाहने का प्रकल्प चलाए।

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि पुराणवर्णित एवं प्राण प्रतिष्ठित इन देव विग्रहों के अपमान से देवताओं के काशी छोड़ने का खतरा है। इससे काशी की समृद्धि, श्री, यश आदि समाप्त हो जाएगा।

अत: हमारा मानना है कि तोड़े गए मंदिरों का पुनर्निर्माण हो एवं देवताओं के स्थानों को ना छेड़ा जाए वरना हम काशीवासियों को आंदोलन के लिए प्रेरित करेंगे।

...तो गजनी को भी पीछे छोड़ दिया

Shankaracharya gives ultimatum to UP government for Kashi destroy
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद - फोटो : amarujala
 श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर योजना के तहत मंदिरों के ध्वस्तीकरण को रोकने के लिए श्री विद्यामठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। गुरुवार को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि मंदिर विस्तारीकरण के लिए काशी में पौराणिक मंदिरों को तोड़ने और मूर्तियों को अपमानित करने की जो प्रक्रिया आरंभ की गई है वह निंदनीय है।

कोई भी विकास कार्य किसी को अपमानित और क्षतिग्रस्त करके नहीं होता है। मंदिरों को तोड़ने और मूर्तियों को अपमानित करने के काम में आपकी सरकार ने तो गजनी को भी पीछे छोड़ दिया है।

सीएम से उन्होंने छप्पन विनायकों में से दो विनायक मोद विनायक और प्रमोद विनायक मंदिरों का यथा स्थान पर निर्माण और पूजा आरंभ करने की मांग की है।

इसके अलावा व्यास पीठ और मंडन मिश्र के ऐतिहासित व्यास परिसर को ससम्मान वापस किए जाने और उनके मकान के निर्माण के लिए धनराशि आवंटित करने और काशी के अन्य मंदिरों को तोड़ने का विचार त्याग करने की मांग की है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि अगर इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हम लोग आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। 
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