BHU Trauma Centre: कान की स्कीन काटकर बनाई पलक, 3 घंटे की सर्जरी, 70 टांके; बच्ची की आंख को कुत्ते ने नोचा था
Varanasi News: बिहार औरंगाबाद के सोनौरा निवासी आठ साल की बच्ची को पिछले सप्ताह शनिवार को आवारा कुत्ते ने दौड़ा लिया। इसके बाद वह गिर गई तो उस पर हमला बोल दिया। परिजनों के अनुसार प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया।
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बिहार निवासी आठ साल की बच्ची अपने घर के दरवाजे पर खड़ी थी। इसी बीच आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर उसकी आंख को नोंच लिया। इसमें उसकी दांयी आंख में गंभीर चोट आई। दोनों पलकें बेकार हो गईं। बिहार में प्राथमिक उपचार के बाद परिजन उसको बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में लेकर आए। यहां करीब तीन घंटे की जटिल सर्जरी की गई, जिसमें बच्ची के आंख में 70 टांके लगाए गए। अब वह पहले की तरह देख सकेगी।
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर होने के बाद प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह के निर्देशन वाली डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ की टीम ने पहले देखा, उसके बाद नेत्र रोग विभाग के आकुलोप्लास्टिक सर्जन डॉ. आरपी मौर्य को दी गई।
डॉ. मौर्य के अनुसार कुत्ते ने बच्ची की दांयी आंख की दोनों पलकों को पूरी तरह से चबा लिया था। केवल नेत्र गोलक बचा था। रविवार शाम को 5 से 8.30 बजे तक तक चली सर्जरी में बच्ची को 70 टांके लगाए गए। इसके पहले बलिया के नागरा निवासी आठ साल की बच्ची के आंख में 30 मई को पालतू कुत्ते ने नोच दिया था। उसकी सर्जरी भी ट्रॉमा सेंटर में हुई थी। 18 दिन में यह दूसरी बड़ी सर्जरी हुई है।
कान के पीछे के स्क्रीन ग्राफ्ट का भी उपयोग
डॉ. मौर्य ने बताया कि घाव के चारों तरफ एंटी रेबीज वैक्सीन की 4 इंजेक्शन लगाई गई। साथ ही नई पलक बनाने के लिए कान के पीछे के स्कीन ग्राफ्ट, भौहों के बगल से रोटेशनल (पेडिकल) ग्राफ्ट को भी लिया गया। टीम में ट्रॉमा सेंटर में डाॅ. प्रियंका सिंह, डॉ. एकाग्रता शुक्ला, डॉ. निर्मला रहीं।
कुत्ते काटने की घटनाओं में तुरंत इलाज जरूरी
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह का कहना है कि कुत्ते काटने का चोट बहुत गंभीर होता है। इलाज भी जटिल होता है। जल्दी उपचार हो तो वह ठीक हो जाता है। कुत्ते सबसे ज्यादा (60 से 80 प्रतिशत) अटैक छोटे बच्चों पर करते हैं। जो अपना बचाव नहीं कर पाते।