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पूर्वांचल में कोरोना के सात म्यूटेंट, डबल म्यूटेंट अधिक प्रभावी
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कोरोना की दूसरी लहर में आधा दर्जन से अधिक म्यूटेंट के पूर्वांचल में होने की जो आशंका बीएचयू के वैज्ञानिकों ने जताई थी, वो सही निकली। पूर्वांचल में सात म्यूटेंट होने की रिपोर्ट सामने आई है। इसमें भी डबल म्यूटेंट अधिक प्रभावी है। इसके अलावा दक्षिण अफ्र ीका में पाए जाने वाला बीटा वेरिएंट भी यहां सक्रिय है।
बीएचयू के जूलॉजी डिपार्टमेंट के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और आईएमएस बीएचयू की टीम द्वारा वाराणसी समेत पांच जिलों (वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर) से 130 सैंपल पर उसे जांच के लिए सेलुलर और आणविक जीव विज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) हैदराबाद में भेजा गया था, जिससे यह पता लगाया जा सके कि न केवल वाराणसी बल्कि आसपास के जिलों में कोरोना की दूसरी लहर में कितने तरह के म्यूटेंट प्रभावी थे। अब सीसीएमबी हैदराबाद से सैंपल की जांच के बाद जो परिणाम आया है, उसके मुताबिक बनारस समेत आसपास के जिलों में एक दो नहीं बल्कि सात तरीके के म्यूटेंट की जानकारी मिली है। आईएमएस बीएचयू एमआरयू लैब की प्रमुख प्रो. रोयाना सिंह के मुताबिक, वीओसी (वैरियंट ऑफ कन्सर्न) बी 1.617 जिसे डबल म्यूटेंट कहा जाता है वो दूसरी लहर में अधिक प्रभावी होना बताया गया है। सीसीएमबी हैदराबाद के सलाहकार डॉ. राकेश सिंह के अनुसार अधिकांश जगहों पर डेल्टा म्यूटेंट 1.617.2 अध्ययन में सबसे ज्यादा था। कुल 130 नमूनों की जांच में 36 प्रतिशत में डेल्टा म्यूटेंट की जानकारी मिली है। अन्य म्यूटेंट जैसे बी 1.351 जो पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पाया गया वह भी इस क्षेत्र में मिला है।
अप्रैल में लिया गया था 130 लोगो का सैंपल
बीएचयू जूलॉजी डिपार्टमेंट के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि बीएचयू के एमआरयू लैब से वाराणसी और आसपास के जिलों में अप्रैल 2021 में ही कोरोना के 130 सैंपल एकत्रित किए गए और उसे जांच के लिए सीसीएमबी हैदराबाद भेजे गए थे। इस क्षेत्र में सात अलग-अलग प्रकार के म्यूटेंट की जानकारी मिली है। इस अध्ययन से यह पुष्ट हो गया कि देश में सबसे व्यापक कोरोना वायरस डेल्टा म्यूटेंट 1.617.2 है। साथ ही हमारे लिए देश में इस वायरस के अन्य उभरते रूपों पर नजर रखना जरूरी है जिससे कि इसे रोका जा सके।
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ये हैं सात म्यूटेंट
कोरोना वायरस के सात म्यूटेंट में ए, ए-23, बी 1, बी 1.167.2(डेल्टा) व 1.167.1(काप्पा), बी 1.36, बी 1.537, बी 1.351(बीटा)
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बीएचयू के जूलॉजी डिपार्टमेंट के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और आईएमएस बीएचयू की टीम द्वारा वाराणसी समेत पांच जिलों (वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर) से 130 सैंपल पर उसे जांच के लिए सेलुलर और आणविक जीव विज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) हैदराबाद में भेजा गया था, जिससे यह पता लगाया जा सके कि न केवल वाराणसी बल्कि आसपास के जिलों में कोरोना की दूसरी लहर में कितने तरह के म्यूटेंट प्रभावी थे। अब सीसीएमबी हैदराबाद से सैंपल की जांच के बाद जो परिणाम आया है, उसके मुताबिक बनारस समेत आसपास के जिलों में एक दो नहीं बल्कि सात तरीके के म्यूटेंट की जानकारी मिली है। आईएमएस बीएचयू एमआरयू लैब की प्रमुख प्रो. रोयाना सिंह के मुताबिक, वीओसी (वैरियंट ऑफ कन्सर्न) बी 1.617 जिसे डबल म्यूटेंट कहा जाता है वो दूसरी लहर में अधिक प्रभावी होना बताया गया है। सीसीएमबी हैदराबाद के सलाहकार डॉ. राकेश सिंह के अनुसार अधिकांश जगहों पर डेल्टा म्यूटेंट 1.617.2 अध्ययन में सबसे ज्यादा था। कुल 130 नमूनों की जांच में 36 प्रतिशत में डेल्टा म्यूटेंट की जानकारी मिली है। अन्य म्यूटेंट जैसे बी 1.351 जो पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पाया गया वह भी इस क्षेत्र में मिला है।
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अप्रैल में लिया गया था 130 लोगो का सैंपल
बीएचयू जूलॉजी डिपार्टमेंट के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि बीएचयू के एमआरयू लैब से वाराणसी और आसपास के जिलों में अप्रैल 2021 में ही कोरोना के 130 सैंपल एकत्रित किए गए और उसे जांच के लिए सीसीएमबी हैदराबाद भेजे गए थे। इस क्षेत्र में सात अलग-अलग प्रकार के म्यूटेंट की जानकारी मिली है। इस अध्ययन से यह पुष्ट हो गया कि देश में सबसे व्यापक कोरोना वायरस डेल्टा म्यूटेंट 1.617.2 है। साथ ही हमारे लिए देश में इस वायरस के अन्य उभरते रूपों पर नजर रखना जरूरी है जिससे कि इसे रोका जा सके।
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ये हैं सात म्यूटेंट
कोरोना वायरस के सात म्यूटेंट में ए, ए-23, बी 1, बी 1.167.2(डेल्टा) व 1.167.1(काप्पा), बी 1.36, बी 1.537, बी 1.351(बीटा)