UP Crime: बाल श्रम के लिए वाराणसी से पंजाब जा रहे थे सात बच्चे, आरपीएफ ने पकड़ा; दो आरोपी गिरफ्तार
आरपीएफ टीम ने सात बच्चों को चाइल्ड हेल्प लाइन वाराणसी से प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर को साैंप दिया गया। आरोपी युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। आरपीएफ इंस्पेक्टर ने बताया कि अभियान जारी रहेगा।
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Varanasi News: फरक्का एक्सप्रेस से बुधवार को बाल श्रम के लिए पंजाब ले जाए जा रहे सात बच्चों को आरपीएफ टीम ने बचाया। ट्रेन के जनरल कोच में बच्चों को लेकर जाने वाले दो युवकों को भी पकड़ा गया। बच्चों की उम्र 13से 17 साल है। सभी को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया गया जबकि दोनों आरोपियों को आरपीएफ ने एंटी हयूमन ट्रैफिक यूनिट (एएचटीयू) को सौंप दिया।
बिहार, झारखंड आदि जगहों से नाबालिग बच्चों को ट्रेन से पंजाब, गुजरात में चलने वाली फैक्ट्रियों में काम करवाने के लिए ले जाया जाता है। पिछले महीने ही 12 नवंबर को भी गुजरात ले जाए जा रहे 15 बच्चों को बचाकर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
बुधवार को वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त देवांश शुक्ला लखनऊ मंडल के निर्देशन में आरपीएफ की टीम ने ऑपरेशन आहट के तहत जांच अभियान चलाया। आरपीएफ इंस्पेक्टर संदीप यादव ने बताया कि ट्रेन नंबर 15743 फरक्का एक्सप्रेस से पीडीडीयू जंक्शन होते हुए वाराणसी के रास्ते पंजाब, पश्चिम बंगाल में बच्चों को लेकर जाने की सूचना मिली थी।
इसके बाद आरपीएफ टीम को पीडीडीयू जंक्शन भेजा गया। यहां पहुंचकर ट्रेन में चेकिंग शुरू की गई तो ट्रेन के पीछे के हिस्से में जनरल कोच में 7 नाबालिग बच्चे 2 व्यक्तियों के साथ डरे सहमे बैठे थे। पूछताछ में पता चला कि 5 बच्चों को झारखंड के गोड्डा जिले के घोरीकित्ता शक्तिनगर निवासी मिथुन (30) बाल श्रम के लिए पीरपैंती से खन्ना पंजाब ले जा रहा था। इसके साथ ही दो बच्चे पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के ग्राम फरक्का निवासी डालिम (27) के साथ बैठे थे।
इसके बाद सभी बच्चों को उतारा गया। आरपीएफ इंस्पेक्टर ने बताया कि सूचना एएचटीयू प्रभारी को दी गई। इसके बाद प्रभारी भी अपनी टीम के साथ कैंट स्टेशन के आरपीएफ के पोस्ट पर आए। एएचटीयू की ओर से दोनों युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। सातों बच्चों को चाइल्ड हेल्प लाइन वाराणसी से प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर चौरसिया गुंजा और सुपरवाइजर शिवम सिंह को सौंपा गया।