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वाराणसीः सावन में तीन जोन से गुजरने के बाद कर सकेंगे बाबा विश्वनाथ के दर्शन, चौराहों पर भी होगा लाइव प्रसारण
Mon, 29 Jun 2020 08:41 PM IST
विचित्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: विचित्र सिंह
Updated Mon, 29 Jun 2020 08:41 PM IST
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सावन के पहले दिन बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए काशी पहुंचे कांवरिया।
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देवों के देव महादेव के भक्त इस बार अपने आराध्य के दूर से ही दर्शन कर पाएंगे। कोरोना संक्रमण के कारण भक्त जल भी अर्पित नहीं कर सकेंगे। सावन की तैयारियों में जुटे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार, भक्तों के लिए कोई रोक-टोक नहीं है, लेकिन इस बार उन्हें तीन जोन से गुजरने के बाद बाबा के दर्शन मिलेंगे। बाबा के दर्शन के लिए शहर में लगाए गए यूनीपोल पर भी इंतजाम किया जा रहा है।
लाइव प्रसारण के माध्यम से नौ जगहों पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की आरती, पूजन और अभिषेक का प्रसारण दर्शनार्थियों के लिए किया जाएगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी गौरांग राठी ने बताया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए सावन में दर्शन-पूजन के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। गर्भगृह में भक्तों का प्रवेश बंद रहेगा। जलाभिषेक के इंतजाम के लिए मंथन किया जा रहा है। दो जुलाई को होने वाली बैठक में सारी स्थिति साफ हो जाएगी।
दर्शन के लिए मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए तीन जोन बनाए गए हैं। पहला जोन मंदिर के अंदर होगा, जहां केवल पांच श्रद्धालु प्रवेश कर सकेंगे। दूसरे जोन में भक्तों की कतार छह-छह फीट की दूरी पर होगी। तीसरे जोन में बैरिकेडिंग होगी, जहां सोशल डिस्टेंसिंग के लिए दो-दो मीटर की दूरी पर गोले बनाए जाएंगे। जगह-जगह आटोमेटिक हैंड सैनिटाइजिंग और हैंडवाश मशीनें लगाई जाएंगी।
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मंदिर की परंपरा में भी कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हर साल की तरह ही भीड़ के मद्देनजर इंतजाम किए जा रहे हैं। भक्तों को सुलभ दर्शन कराना पहली प्राथमिकता है। मंदिर परिसर में मेडिकल कैंप के साथ ही एंबुलेंस की व्यवस्था होगी। असहायों व जरूरतमंदों के लिए मैदागिन व गोदौलिया पर ई-रिक्शा का इंतजाम रहेगा।
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लाइव प्रसारण के माध्यम से नौ जगहों पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की आरती, पूजन और अभिषेक का प्रसारण दर्शनार्थियों के लिए किया जाएगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी गौरांग राठी ने बताया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए सावन में दर्शन-पूजन के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। गर्भगृह में भक्तों का प्रवेश बंद रहेगा। जलाभिषेक के इंतजाम के लिए मंथन किया जा रहा है। दो जुलाई को होने वाली बैठक में सारी स्थिति साफ हो जाएगी।
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दर्शन के लिए मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए तीन जोन बनाए गए हैं। पहला जोन मंदिर के अंदर होगा, जहां केवल पांच श्रद्धालु प्रवेश कर सकेंगे। दूसरे जोन में भक्तों की कतार छह-छह फीट की दूरी पर होगी। तीसरे जोन में बैरिकेडिंग होगी, जहां सोशल डिस्टेंसिंग के लिए दो-दो मीटर की दूरी पर गोले बनाए जाएंगे। जगह-जगह आटोमेटिक हैंड सैनिटाइजिंग और हैंडवाश मशीनें लगाई जाएंगी।
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मंदिर की परंपरा में भी कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हर साल की तरह ही भीड़ के मद्देनजर इंतजाम किए जा रहे हैं। भक्तों को सुलभ दर्शन कराना पहली प्राथमिकता है। मंदिर परिसर में मेडिकल कैंप के साथ ही एंबुलेंस की व्यवस्था होगी। असहायों व जरूरतमंदों के लिए मैदागिन व गोदौलिया पर ई-रिक्शा का इंतजाम रहेगा।
आवागमन के लिए तीन मार्ग
amarujala
- फोटो : amarujala
भक्तों के आवागमन के लिए तीन मार्ग निर्धारित किए गए हैं। पांचों पंडवा गेट से प्रवेश व निकास, ढुंढिराज गणेश द्वार से प्रवेश व नंदू फारिया गेट से निकास और छत्ताद्वार से प्रवेश और निकास की व्यवस्था होगी। सावन के प्रत्येक सोमवार को एक अतिरिक्त गेट शनिदेव के समीप बनाया जाएगा। सीईओ ने बताया कि पहले की तरह ही सभी परंपराओं का निर्वहन होगा। आरती-पूजा विधिवत होगी।
पांचों सोमवार होगा शृंगार
सावन के पहले सोमवार को भगवान शंकर का शृंगार होगा। दूसरे सोमवार को भगवान शंकर और पार्वती का और तीसरे सोमवार को अर्द्धनारीश्वर शृंगार होगा। अंतिम सोमवार को बाबा का रुद्राक्ष शृृंगार किया जाता है। पूर्णिमा को भगवान शिव, माता पार्वती और गणेशजी की चल प्रतिमाओं के झूला शृंगार के दर्शन होंगे।
जलाभिषेक करने वाले यादव बंधुओं से की जा रही बातचीत
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक करने वाले यादव बंधुओं के पदाधिकारियों से बातचीत की जा रही है। वह सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही जलाभिषेक के लिए आएं। मंदिर परिसर में केवल पांच लोगों को ही प्रवेश की अनुमति है।
पांचों सोमवार होगा शृंगार
सावन के पहले सोमवार को भगवान शंकर का शृंगार होगा। दूसरे सोमवार को भगवान शंकर और पार्वती का और तीसरे सोमवार को अर्द्धनारीश्वर शृंगार होगा। अंतिम सोमवार को बाबा का रुद्राक्ष शृृंगार किया जाता है। पूर्णिमा को भगवान शिव, माता पार्वती और गणेशजी की चल प्रतिमाओं के झूला शृंगार के दर्शन होंगे।
जलाभिषेक करने वाले यादव बंधुओं से की जा रही बातचीत
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक करने वाले यादव बंधुओं के पदाधिकारियों से बातचीत की जा रही है। वह सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही जलाभिषेक के लिए आएं। मंदिर परिसर में केवल पांच लोगों को ही प्रवेश की अनुमति है।