बनारस में संत रविदास की जन्मस्थली पर बसने लगा लघु भारत
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संत रविदास के जन्मस्थान सीर गोवर्धन की धूल माथे चढ़ाने के लिए देश के कोने- कोने से रविदासियों का जन सैलाब काशी के लिए उमड़ पड़ा है। सीर गोवर्धन में संत रविदास के सपनों का बेगमपुरा भी टेंट-पंडाल के जरिए आकार ले चुका है।
पंजाब से आए चार हजार से अधिक सेवादारों ने सोमवार को जिम्मा संभाल लिया। उधर, डेरा सच्चखंड बल्ल के प्रमुख संत और संत रविदास जन्मस्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन संत निरंजन दास महाराज मंगलवार की दोपहर हजारों अनुयायियों के साथ जालंधर से विशेष ट्रेन से काशी के लिए रवाना होंगे।
इस मेले में 20 से अधिक देशों से अनुयायियों के पहुंचने की उम्मीद है। सीर गोवर्धन को दुल्हन की तरह सजा दिया गया है। जालंधर से विशेष ट्रेन बेगमपुरा एक्सप्रेस से मंगलवार की दोपहर 2:30 बजे डेर सचखंड बल्ल के प्रमुख संत निरंजन दास महाराज 22 से अधिक अनुयायियों के साथ काशी के लिए रवाना होंगे।
बुधवार की शाम को कैंट रेलवे स्टेशन पर रविदासियों का कारवां पहुंचेगा। वाहनों के काफिले के साथ संत निरंजन दास सीधे सीरगोवर्धन स्थित संत रविदास मंदिर पहुंचेंगे। उधर, लौटूबीर बाबा के सामने हैंडर स्टाइल पर 450 फीट लंबे सत्संग पंडाल को भी अंतिम रूप दे दिया गया है।
रविदास पार्क में दीपदान कल
प्रशासन की अनुमति के अनुसार इसमें 12 हजार से अधिक अनुयायी संत निरंजन दास महाराज का सत्संग सुन सकेंगे। मेला क्षेत्र में पंजाब, बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, जम्मू, हरियाणा समेत अन्य राज्यों के अलग-अलग 55 से अधिक पंडाल तैयार हो गए हैं।
पंडालों में हजारों की तादाद में अनुयायियों ने अभी से डेरा डाल दिया है। डेरा सच्चखंड बल्ल के संत निरंजन दास महाराज बुधवार की शाम छह बजे नगवा स्थित रविदास पार्क में दीपदान करेंगे। फूलों, रंग-बिरंगी लतरों से पार्क को सजाया जाएगा।
भजन मंडलियां गुरु रविदास के भजनों का गान करेंगी। गुरुवार की सुबह आठ बजे संत रविदास मंदिर के सामने हरि निशान वाले ध्वज को वह फहराएंगे। इसके बाद सत्संग होगा।