गड़बड़ी: 100 नंबर के पूर्णांक में 115 नंबर के आए प्रश्नपत्र, त्रुटियों के बीच संपन्न हुई संस्कृत विश्वविद्यालय में आचार्य की परीक्षा
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय व संबद्ध महाविद्यालयों में आचार्य की परीक्षा शनिवार को संपन्न हुई। प्रश्न पत्रों में गड़बड़ियों से परीक्षार्थी परेशान रहे। धर्मशास्त्र की परीक्षा में सौ अंकों के पूर्णांक में 115 नंबर के प्रश्न पत्र बांटे गए थे।
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पूर्णांक सौ नंबर का और प्रश्न आए 115 नंबर के। जी हां चौंकने की जरूरत नहीं है। यह कारनामा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की आचार्य परीक्षा के दौरान हुआ है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय व संबद्ध महाविद्यालयों में आचार्य की परीक्षा शनिवार को संपन्न हुई। अंतिम दिन भी छात्र प्रश्नपत्र की गड़बड़ियों को लेकर परेशान रहे।
प्रथम पाली में जहां मिस प्रिंटिंग ने परेशान किया वहीं दूसरी पाली की धर्मशास्त्र की परीक्षा में सौ अंकों के पूर्णांक में 115 नंबर के प्रश्न पत्र बांटे गए। महाविद्यालयों ने जब गड़बड़ी की सूचना विश्वविद्यालय प्रशासन को दी तो इसका समाधान हुआ।
शनिवार को आचार्य प्रथम व तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा वाराणसी समेत देश भर के 121 केंद्रों पर संपन्न हुई। प्रथम पाली की परीक्षा के दौरान जब छात्रों के हाथ में प्रश्नपत्र आया तो उसमें मिसप्रिंटिंग के कारण छात्रों को प्रश्न समझ में नहीं आ रहा था। केंद्राध्यक्ष से शिकायत के बाद गड़बड़ी को दुरुस्त कराया गया।
वहीं दूसरी पाली की परीक्षा में सौ अंकों के पूर्णांक में 115 अंकों के प्रश्न देखकर छात्र चकरा गए। छात्रों ने जब इसकी शिकायत की तो केंद्राध्यक्षों ने विश्वविद्यालय से संपर्क किया। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 15-15 अंकों के प्रश्न को साढ़े सात-साढ़े सात अंकों का करवाया।
चार दिनों तक चली आचार्य की परीक्षा में लगातार प्रश्नपत्रों में मिस प्रिंटिंग, चक्रानुक्रम की गड़बड़ी और पूर्णांक से कम व अधिक प्रश्नों ने छात्रों के साथ ही केंद्राध्यक्षों को भी परेशान किया। कुलपति प्रो. हरेराम तिवारी ने इस मामले में जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।
परीक्षार्थी और महाविद्यालय के प्राचार्य आश्चर्यचकित
आचार्य प्रथम सेमेस्टर के साहित्य विषय के द्वितीय प्रश्नपत्र की परीक्षा के दौरान जब प्रश्नपत्रों का वितरण हुआ तो छात्र हैरान रह गए थ। प्रश्नपत्र में पूर्णांक सौ नंबर का था, लेकिन प्रश्न सिर्फ 70 नंबर के थे। वहीं दूसरी पाली में नव्य व्याकरण के प्रश्नपत्र में भी छात्र हैरान रहे।
सौ नंबर के पूर्णांक में प्रश्नों के नंबर सौ तो रहे लेकिन प्रश्नों का वितरण इस तरह से किया गया था कि छात्रों को समझ ही नहीं आ रहा था कि कितने प्रश्न करने हैं। प्रश्नपत्रों में गड़बड़ी से छात्र-छात्राएं और महाविद्यालयों के शिक्षक भी हैरान हैं।
शिक्षकों का कहना है कि पिछले साल कोरोना संक्रमण के कारण प्रश्नपत्र की समय सीमा कम की गई थी, ऐसे में इस साल उसी के आधार पर ही पेपर को सेट करने के कारण यह गड़बड़ी सामने आ रही है। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई भी होगी।