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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय: शास्त्री की उपाधि की जगह अब मिलेगी बीए की डिग्री, मध्यमा का भी बदला नाम, जानिए इस फैसले का कारण

Fri, 21 Jan 2022 10:53 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 21 Jan 2022 10:53 PM IST
सार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री उपाधि प्राप्त करने वाले अब बीए स्नातक कहलाएंगे। पूर्व मध्यमा को हाईस्कूल व उत्तर मध्यमा को इंटरमीडिएट की उपाधि प्रदान की जाएगी। परीक्षा समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है।

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Sampurnanand Sanskrit Vishwavidyalaya Shastri degree will now known as BA degree  know why this decision taken
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री उपाधि प्राप्त करने वाले अब बीए स्नातक कहलाएंगे। विश्वविद्यालय ने शास्त्री उपाधि पर अब बीए भी अंकित करने का निर्णय लिया है। शास्त्री उपाधि धारकों को स्नातक कहा जाएगा। साथ ही पूर्व मध्यमा को हाईस्कूल व उत्तर मध्यमा को इंटरमीडिएट की उपाधि प्रदान की जाएगी। शुक्रवार को परीक्षा समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। 

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कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में परीक्षा समिति की बैठक हुई। सेना में धर्म गुरु की परीक्षा से शास्त्री के छात्रों को वंचित किए जाने के बाद विश्वविद्यालय ने कदम उठाया है। इसके पूर्व आचार्य की उपाधि में एमए जोड़ा जा चुका है। साथ ही जो विद्यार्थी सेना में धर्मगुरु के लिए समकक्षता का प्रमाणपत्र मांग रहे हैं उन्हें विश्वविद्यालय प्रमाणपत्र प्रदान करेगा।
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शास्त्री की उपाधि पर उपजा था विवाद
शास्त्री की उपाधि पर उपजे विवाद के बाद कुलपति ने गत दिनों रक्षामंत्री डॉ. राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी और समस्या का स्थायी निराकरण करने का अनुरोध किया था। साथ ही सेना के प्रमुख, सेना मुख्यालय चयन बोर्ड को लिखित पत्र व ईमेल भी भेजा था।
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रक्षामंत्री ने अप्रैल तक स्थायी निराकरण की बात कही थी। इस दौरान कुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश, परीक्षा नियंत्रक अर्चना जौहरी, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. महेंद्र पांडेय, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. हीरक कांति चक्रवर्ती, डॉ. विजय कुमार पांडेय एवं विजय मणि त्रिपाठी उपस्थित थे

संस्कृत विश्वविद्यालय में धीमी चल रही है टीकाकरण की रफ्तार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में कोरोना टीकाकरण की रफ्तार सुस्त है। टीकाकरण का सौ फीसदी का लक्ष्य पूरा करने में विश्वविद्यालय के अधिकारियों का मशक्कत करनी पड़ रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन को 25 जनवरी तक सौ फीसदी टीकाकरण की रिपोर्ट शासन को भेजनी है और अभी तक जो रफ्तार है वह बेहद चिंताजनक है।

छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. हरिशंकर पांडेय ने बताया कि कोरोना टीकाकरण की रफ्तार धीमी होने के कारण सभी विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर छात्रों से संपर्क करने को कहा गया है। कोरोना संक्रमण के कारण छात्रावास बंद हैं और ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में छात्र विश्वविद्यालय नहीं आ रहे हैं जिससे शतप्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य हासिल करने में परेशानी आ रही है। वहीं दूसरी तरफ महात्मा काशी विद्यापीठ ने शत प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य पूर्ण कर लिया है। 

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