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संपूर्णानंद के संस्कृत महाविद्यालय भी बनेंगे शोध के नए केंद्र
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने संस्कृत महाविद्यालयों को भी शोध केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल की है। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान और संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठानम के सहयोग से विश्वविद्यालय वर्तमान सत्र से ही महाविद्यालय के शिक्षकों को भी शोध कार्य के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके तहत प्राच्य विद्या के विविध विषयों पर शोध किए जाएंगे।
नई शिक्षा नीति के तहत संस्कृत संवर्धन की पहल के तहत विश्वविद्यालय ने यह प्रक्रिया शुरू की है। शासन की ओर से महाविद्यालयों को शोध केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने अमल करना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय की ओर से पहले चरण में 40 महाविद्यालयों को चयनित किया गया है। महाविद्यालय के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान और संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठानम के विद्वानों को दी गई है। पहले चरण में 40 महाविद्यालयों को शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के बाद शोध परियोजना मांगी है। शोध परियोजना मिलने के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर कमेटी बनाकर परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। मूल्यांकन में जो भी शोध परियोजनाएं चयनित होंगी उनको शासन के पास ग्रांट के लिए भेजा जाएगा।
शासन की ओर से विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में शोध के लिए 50-50 फीसदी रिसर्च ग्रांट जारी किया जा रहा है। पहले चरण में अभी प्रदेश भर से 40 महाविद्यालय चयनित किए गए हैं। इसके बाद अन्य महाविद्यालयों का भी चयन किया जाएगा।
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- प्रो. हरेराम त्रिपाठी, कुलपति, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
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नई शिक्षा नीति के तहत संस्कृत संवर्धन की पहल के तहत विश्वविद्यालय ने यह प्रक्रिया शुरू की है। शासन की ओर से महाविद्यालयों को शोध केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने अमल करना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय की ओर से पहले चरण में 40 महाविद्यालयों को चयनित किया गया है। महाविद्यालय के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान और संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठानम के विद्वानों को दी गई है। पहले चरण में 40 महाविद्यालयों को शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के बाद शोध परियोजना मांगी है। शोध परियोजना मिलने के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर कमेटी बनाकर परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। मूल्यांकन में जो भी शोध परियोजनाएं चयनित होंगी उनको शासन के पास ग्रांट के लिए भेजा जाएगा।
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शासन की ओर से विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में शोध के लिए 50-50 फीसदी रिसर्च ग्रांट जारी किया जा रहा है। पहले चरण में अभी प्रदेश भर से 40 महाविद्यालय चयनित किए गए हैं। इसके बाद अन्य महाविद्यालयों का भी चयन किया जाएगा।
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- प्रो. हरेराम त्रिपाठी, कुलपति, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय