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Sampoornand Sanskrit Vishvidyalaye: संपूर्णानंद के कर्मकांड और ज्योतिष कोर्स में बिना संस्कृत पढ़ने वाले स्टूडेंट भी पाएंगे एडमिशन
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कर्मकांड और ज्योतिष पाठ्यक्रम से धर्मगुरु बनने की राह आसान होगी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में बीवोक और एमवोक पाठ्यक्रम के तहत पं. दीनदयाल उपाध्याय कौशल विकास केंद्र में ज्योतिष, कर्मकांड, वास्तुशास्त्र और आंतरिक सज्जा में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। बिना संस्कृत वाले छात्र भी इसमें दाखिला ले सकते हैं।
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि यह पाठ्यक्रम सभी के लिए रोजगारपरक है। खासकर धर्मगुरु बनने के लिए संपूर्ण पाठ्यक्रम है। इसके माध्यम से अर्चक, ज्योतिषी के रूप में भी रोजगार प्राप्त किया जा सकता है। समाज और राष्ट्र में कर्मकांड और ज्योतिष शास्त्र के ज्ञान से पूजा के वास्तविक दर्शन से समाज को जोड़ सकते हैं। केंद्र की निदेशक प्रो. विधु द्विवेदी ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से बी-वोक के अंतर्गत दो व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। दोनों में आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीच में कोर्स छोड़ने पर भी मिलेगा प्रमाणपत्र
बीवोक तीन वर्ष का पाठ्यक्रम है और इसमें छह सेमेस्टर हैं। एमवोक में चार सेमेस्टर की पढ़ाई होगी। नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप प्रथम सेमेस्टर उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को सर्टिफिकेट, द्वितीय पर डिप्लोमा, चौथे सेमेस्टर पर एडवांस डिप्लोमा और छठे सेमेस्टर पर बीवोक की उपाधि दी जाएगी। इसी तरह से एमवोक पाठ्यक्रम पूरी तरह स्ववित्तपोषित होंगे। इसके प्रवेश फार्म का शुल्क 500 रुपये और इस पाठ्यक्रम की फीस आठ हजार पांच सौ रुपये प्रति सेमेस्टर निर्धारित की गई है। कौशल विकास केंद्र की निदेशक प्रो. द्विवेदी ने बताया कि प्रवेश के लिए आवेदन पत्र कौशल केंद्र कार्यालय (पाणिनि भवन के द्वितीय तल पर गृह विज्ञान विभाग) पर सुबह 10:30 से दोपहर 4:30 बजे तक मिल रहे हैं।
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कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि यह पाठ्यक्रम सभी के लिए रोजगारपरक है। खासकर धर्मगुरु बनने के लिए संपूर्ण पाठ्यक्रम है। इसके माध्यम से अर्चक, ज्योतिषी के रूप में भी रोजगार प्राप्त किया जा सकता है। समाज और राष्ट्र में कर्मकांड और ज्योतिष शास्त्र के ज्ञान से पूजा के वास्तविक दर्शन से समाज को जोड़ सकते हैं। केंद्र की निदेशक प्रो. विधु द्विवेदी ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से बी-वोक के अंतर्गत दो व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। दोनों में आयु की कोई सीमा नहीं है।
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बीच में कोर्स छोड़ने पर भी मिलेगा प्रमाणपत्र
बीवोक तीन वर्ष का पाठ्यक्रम है और इसमें छह सेमेस्टर हैं। एमवोक में चार सेमेस्टर की पढ़ाई होगी। नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप प्रथम सेमेस्टर उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को सर्टिफिकेट, द्वितीय पर डिप्लोमा, चौथे सेमेस्टर पर एडवांस डिप्लोमा और छठे सेमेस्टर पर बीवोक की उपाधि दी जाएगी। इसी तरह से एमवोक पाठ्यक्रम पूरी तरह स्ववित्तपोषित होंगे। इसके प्रवेश फार्म का शुल्क 500 रुपये और इस पाठ्यक्रम की फीस आठ हजार पांच सौ रुपये प्रति सेमेस्टर निर्धारित की गई है। कौशल विकास केंद्र की निदेशक प्रो. द्विवेदी ने बताया कि प्रवेश के लिए आवेदन पत्र कौशल केंद्र कार्यालय (पाणिनि भवन के द्वितीय तल पर गृह विज्ञान विभाग) पर सुबह 10:30 से दोपहर 4:30 बजे तक मिल रहे हैं।
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