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आभासीय दुनिया के मंच पर शुरू हुआ संकटमोचन संगीत समारोह
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हनुमान लला मेरे प्यारे लला... की शहनाई पर मंगल धुन के साथ संकटमोचन संगीत समारोह का शुभारंभ हुआ। आभासीय दुनिया के मंच पर जुड़े संगीत के रसिकों ने भी पेज पर हनुमान लला का कमेंट लिखकर अपनी-अपनी हाजिरी लगाई।
शनिवार को संकट मोचन संगीत समारोह के 97वें संस्करण की शुरुआत पं. जसराज के शिष्य लोकेश आनंद ने दिल्ली से संकटमोचन के दरबार में हाजिरी लगाई। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति में लोकेश आनंद ने शहनाई के माध्यम से राग जोग में विलंबित लय पर हनुमाल लला, मेरे प्यारे लला... से शुरुआत की। उसके बाद राग जोग में प्रसिद्ध बंदिश साजन मोरे घर आयो... की अवतारणा की। शहनाई पर पं. जसराज के गीतों की धुन को सुनकर हर श्रोता ने उनको भी नमन किया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए आयोजन समिति ने पिछली बार की तरह पूरे आयोजन को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित कर दिया। इसके पूर्व समारोह में आरटी पीसीआर निगेटिव रिपोर्ट वाले 50 श्रोताओं को उपस्थित होने की व्यवस्था बनाई गई थी।
दूसरी प्रस्तुति बनारस घराने के युवा प्रतिनिधि गणेश प्रसाद मिश्र की होनी थी लेकिन तकनीकी समस्या के कारण वह ऑनलाइन नहीं हो सके। इसके बाद कोलकाता से पं. राम प्रपन्न भट्टाचार्य ने सितारवादन की प्रस्तुति दी। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर और इटावा घराने के राम प्रपन्न भट्टाचार्य ने राग यमन में हनुमानजी पर आधारित बंदिश पेश की। इसके बाद उसी राग में जोड़ और झाला का वादन किया।
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इनसेट
हनुमान जी से है प्रार्थना उबारें सभी को महामारी से
श्री संकटमोचन संगीत समारोह का वर्चुअल उद्घाटन करते हुए महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि इस अनुष्ठान को पवित्र बनाने के लिए पिछली वर्ष की तरह ही दर्शक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़ें। उन्होंने कहा बीते एक साल में महामारी ने हमसे ऐसे कलाकारों को छीना है जिसको मंदिर परिवार कभी नहीं भूल पाएगा। पं. जसराज, पं. राजन मिश्र और पं. देबू चौधरी के परिवार को हनुमानजी महाराज यह कष्ट सहने की शक्ति दें। प्रो. मिश्र ने कहा कि हनुमानजी महाराज अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता हैं। हम सब उनसे प्रार्थना करें कि इस महामारी से सबको उबारें और सबके प्राणों की रक्षा करें। हमने कोशिश की है कि किसी भी हाल में भगवान की सेवा नहीं रुकनी चाहिए इसलिए यह आयोजन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस साल भी किया जा रहा है। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र भी कोरोना से संक्रमित हैं और उन्होंने खुद को आइसोलेट कर रखा है।
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शनिवार को संकट मोचन संगीत समारोह के 97वें संस्करण की शुरुआत पं. जसराज के शिष्य लोकेश आनंद ने दिल्ली से संकटमोचन के दरबार में हाजिरी लगाई। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति में लोकेश आनंद ने शहनाई के माध्यम से राग जोग में विलंबित लय पर हनुमाल लला, मेरे प्यारे लला... से शुरुआत की। उसके बाद राग जोग में प्रसिद्ध बंदिश साजन मोरे घर आयो... की अवतारणा की। शहनाई पर पं. जसराज के गीतों की धुन को सुनकर हर श्रोता ने उनको भी नमन किया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए आयोजन समिति ने पिछली बार की तरह पूरे आयोजन को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित कर दिया। इसके पूर्व समारोह में आरटी पीसीआर निगेटिव रिपोर्ट वाले 50 श्रोताओं को उपस्थित होने की व्यवस्था बनाई गई थी।
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दूसरी प्रस्तुति बनारस घराने के युवा प्रतिनिधि गणेश प्रसाद मिश्र की होनी थी लेकिन तकनीकी समस्या के कारण वह ऑनलाइन नहीं हो सके। इसके बाद कोलकाता से पं. राम प्रपन्न भट्टाचार्य ने सितारवादन की प्रस्तुति दी। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर और इटावा घराने के राम प्रपन्न भट्टाचार्य ने राग यमन में हनुमानजी पर आधारित बंदिश पेश की। इसके बाद उसी राग में जोड़ और झाला का वादन किया।
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हनुमान जी से है प्रार्थना उबारें सभी को महामारी से
श्री संकटमोचन संगीत समारोह का वर्चुअल उद्घाटन करते हुए महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि इस अनुष्ठान को पवित्र बनाने के लिए पिछली वर्ष की तरह ही दर्शक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़ें। उन्होंने कहा बीते एक साल में महामारी ने हमसे ऐसे कलाकारों को छीना है जिसको मंदिर परिवार कभी नहीं भूल पाएगा। पं. जसराज, पं. राजन मिश्र और पं. देबू चौधरी के परिवार को हनुमानजी महाराज यह कष्ट सहने की शक्ति दें। प्रो. मिश्र ने कहा कि हनुमानजी महाराज अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता हैं। हम सब उनसे प्रार्थना करें कि इस महामारी से सबको उबारें और सबके प्राणों की रक्षा करें। हमने कोशिश की है कि किसी भी हाल में भगवान की सेवा नहीं रुकनी चाहिए इसलिए यह आयोजन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस साल भी किया जा रहा है। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र भी कोरोना से संक्रमित हैं और उन्होंने खुद को आइसोलेट कर रखा है।