UP: USCIRF की रिपोर्ट पर भड़के संत, बोले- भारत की एकता और अखंडता पर प्रश्नचिह्न न उठाए अमेरिका
Varanasi News: अखिल भारतीय संत समिति ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की रिपोर्ट को कुत्सित एवं पूर्वाग्रहग्रस्त रिपोर्ट की कड़े शब्दों में निंदा की है।
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UP News: अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने भारत को लेकर अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएसआईसीआरएफ) की जारी रिपोर्ट की कड़े शब्दों में निंदा की है।
इस रिपोर्ट को भारत की समावेशी सांस्कृतिक विरासत, उसकी संप्रभुता और भारतीयों के संवैधानिक गारंटी का घोर अपमान बताया। कहा कि श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाकर भारत में अस्थिरता फैलाने के प्रयास शुरू हो गए। यह रिपोर्ट भी उसी का हिस्सा है।
यूएसआईसीआरएफ के रिपोर्ट में साफ है कि कुछ विदेशी संस्थान अब खुलकर भारत के विरुद्ध खड़े होने लगे हैं। कभी उनके वित्त विभाग के सलाहकार भारत में ब्राह्मणों के वर्चस्व की थ्योरी फैलाते हैं, तो कभी उनकी एजेंसियां अल्पसंख्यकों पर तथाकथित अत्याचारों की मनगढ़ंत कहानियों की फाइलें जारी कर देती हैं।
संत ने दी चेतावनी
अमेरिका और उसकी एजेंसियों को पहले अपने इतिहास पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने यह नहीं बताया कि बांग्लादेश में 16 प्रतिशत हिंदू कैसे घटकर साढ़े सात प्रतिशत और पाकिस्तान में आठ प्रतिशत से घटकर हिंदू एक प्रतिशत से कम कैसे हो गए। फिजी में कर्नल राबुका के तख्तापलट के बाद हिंदुओं पर जो अत्याचार हुए, उसका कहीं नामोनिशान नहीं है।
रिपोर्ट में भारत में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद हिंसा के झूठे आरोप लगाए गए हैं, जबकि यही तथ्य छुपा लिया गया है कि भारत में अल्पसंख्यक संविधान के तहत बहुसंख्यकों से अधिक अधिकार पाते हैं। अखिल भारतीय संत समिति अमेरिकी एजेंसियों को चेतावनी देती है कि वह भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता पर प्रश्नचिह्न लगाने का अपना यह दुस्साहस बंद करे। नौ और 10 दिसंबर को शीर्ष संतों की राष्ट्रीय बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा कर अपनी रणनीति तय करेंगे।