Ropeway in Varanasi: नए साल से होगा रोपवे का संचालन, बिजली कड़की तो धीमा हो जाएगा गोंडोला; जानें खास
Varanasi News: वाराणसी में रोपवे का काम तेरी से चल रहा है। वीडीए के उपाध्यक्ष के अनुसार, नए साल में इसका संचालन शुरू हो जाएगा। कहा कि इमरजेंसी चीजें को मॉनीटर के लिए कंट्रोल रूम बनाये जा रहे हैं।
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वीडीए के उपाध्यक्ष पुलकित गर्ग ने कहा कि इस साल के अंत तक रोपवे की सुरक्षा की जांच पूरी होगी। इसके बाद आम जनता के लिए खोला जाएगा। नए साल से रोपवे का संचालन होगा। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार अर्बन ट्रांसपोर्ट के लिए चलने वाले रोप-वे दैवीय आपदा के लिहाज से काफी सुरक्षित है।
तेज हवा या बिजली कड़कने की स्थिति में गंडोला स्वयं धीमा हो जाएगा। वहीं बिजली आपूर्ति बंद होने की स्थिति में गंडोला रास्ते में नहीं रुकेगा। वह अपने नजदीकी स्टेशन पर स्वयं पहुंच जाएगा। गंडोला जब एक बार बंद हो जाएगा, तो अंदर से नहीं खुलेगा।
सस्ता होगा किराया
यह जानकारी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पुलकित गर्ग और एनएचएनएमएल की प्रोजेक्ट निदेशक पूजा मिश्रा ने संयुक्त रूप से दी। विकास प्राधिकरण सभागार में रविवार को आयोजित प्रेसवार्ता में दोनों अधिकारियों ने बताया कि यह रोप-वे पहाड़ी इलाकों में चल रहे रोप-वे से अलग और काफी हाईटेक है।
रोपवे का किराया काफी कम होगा। इसके पीछे उसके आर्थिक विकास मॉडल की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। सभी स्टेशनों पर कॉमर्शियल गतिविधियां शुरू की जाएंगी। चारों स्टेशनों पर दो लाख व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की जाएंगी। बजट होटल बनेगा।
बनेंगे कंट्रोल रूम
दुकानों और होटलों के लिए अभी से काफी डिमांड आ रही है। इनका आवंटन नीलामी प्रक्रिया से शुरू होगा। एनएचएलएमएल के अधिकारी ने बताया कि रोपवे प्रोजेक्ट के अंतर्गत यूरोपियन स्टैंडर्ड के सेफ्टी के उपकरण लगाये जा रहे हैं। इमरजेंसी चीजें को मॉनीटर के लिए कंट्रोल रूम बनाये जा रहे हैं।
गंडोला कब खुलेगा, कब बंद होगा। कंट्रोल रूम से नियंत्रित किया जाएगा। बिजली जाने की स्थिति में जनरेटर चलाए जाएंगे। यदि जनरेटर नहीं चलता है तो उसकी स्थिति में आंतरिक बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। गंडोला स्वयं पास के स्टेशन पर पहुंच जाएगा। क्योंकि इसके अंदर तीन तरह की मशीनें होती हैं।
अफसरों को निर्देश
इसके बावजूद भी कोई दिक्कत आती है तो गंडोला को ऊपर से खोला जा सकता है। इसके लिए एक बड़ी क्रेन की मदद ली जाएगी, जो सभी स्टेशन पर मौजूद रहेगी। क्रेन के जरिए यात्रियों को बाहर लिया जा सकता है। रोपवे की सुरक्षा के लिहाज से एक कंसल्टेंट इंजीनियर, रोपवे इंस्पेक्टर रखे जाएंगे।
उपाध्यक्ष ने बताया कि रात में भी गंडोला चलाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के अंतर्गत सबसे बड़ा टावर 160 फीट का बनाया गया है, जो सिगरा स्थित सुविधा साड़ी केंद्र के पास स्थित है। कार्यदायी एजेंसी को 15 वर्ष संचालित करने के लिए अनुबंध किया गया।
फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो रही
एनएचएलएमएल की प्रोजेक्ट मैनेजर पूजा मिश्रा ने कहा कि रोपवे कॉरिडोर 16 मीटर का होगा। यानी किनारे आठ-आठ मीटर के दायरे में निर्माण पर प्रतिबंध रहेगा। किनारे बनने वाले भवन की ऊंचाई अधिकतम 10 मीटर होगी। गंडोला के अंदर वातानुकूलित सुविधाओं के साथ गर्मी से बचाव के लिए कई सुविधाएं हैं। उन्होंने बताया कि नये कॉरिडोर के लिए सर्वे शुरू करा दिया गया है। फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो रही है। परियोजना का लोकार्पण वर्ष के अंत में संभावित है।
गौरतलब है कि कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक करीब 3.8 किमी लबे रोपवे परियोजना पर कार्य चल रहा है। जो अंतिण चरण में है। पूरे प्रोजेक्ट पर 815.58 करोड़ रुपये खर्च होना प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत कैंट स्टेशन, भारत माता मंदिर परिसर, रथयात्रा औऱ गोदौलिया चौराहे पर स्टेशन बनाये जा रहे हैं। गिरिजाघर चौराहे पर टर्मिनल स्टेशन बनाया जा रहा है।