Ropeway Varanasi: बिजली नहीं तो भी नजदीकी रोपवे स्टेशन तक पहुंच जाएगा गंडोला, तेज हवा पर धीमी हो जाएगी रफ्तार
Varanasi News: वीडीए उपाध्यक्ष और एनएचएनएमएल की प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने रोपवे की खासियत बताई। बिजली नहीं होने पर भी गंडोला नजदीकी रोपवे स्टेशन तक पहुंच जाएगा। अब इसका संचालन नए साल में होगा।
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दुनिया के तीसरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे का संचालन काशी में सुरक्षित तरीके से होगा। अगर बिजली गुल हो गई, तो भी गंडोला आंतरिक बिजली आपूर्ति से नजदीकी रोपवे स्टेशन तक पहुंच जाएगा। तेज हवा चली तो गंडोला अपने आप धीमा हो जाएगा। गंडोला रास्ते में नहीं खुलेगा। इसका संचालन रात में भी किया जा सकता है। गंडोला के अंदर एसी लगे हैं। गर्मी से बचाव की अन्य सुविधाएं भी हैं।
वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) उपाध्यक्ष पुलकित गर्ग और एनएचएनएमएल की प्रोजेक्ट डायरेक्टर पूजा मिश्रा ने रविवार को रोपवे की खासियत बताई। वीडीए सभागार में पत्रकारों को बताया कि यह पहाड़ी इलाकों में चल रहे रोपवे से अलग, सुरक्षित और हाईटेक है। इसमें यूरोपियन स्टैंडर्ड के सेफ्टी उपकरण लगाए गए हैं।
निगरानी के लिए कंट्रोल रूम बना है। रोपवे के लिए अलग से बिजली उपकेंद्र बना है। पहले तो बिजली नहीं कटेगी। अगर किसी वजह से बिजली कटी तो जनरेटर से संचालन किया जाएगा। किसी वजह से जनरेटर नहीं चला, तो भी गंडोला तार के सहारे हवा में नहीं रुकेगा। स्टेशन तक आराम से पहुंच जाएगा। आपात स्थिति में क्रेन के सहारे गंडोला को ऊपर से खोला जा सकता है।
अब नए साल से रोपवे का संचालन, 148 गंडोला चलेंगे
रोपवे कॉरिडोर के 16 मीटर के दायरे के भवनों की ऊंचाई 10 मीटर से ज्यादा नहीं
उपाध्यक्ष ने बताया कि रोपवे कॉरिडोर के दोनों तरफ आठ-आठ मीटर के दायरे में भवनों की ऊंचाई 10 मीटर रखी गई है। यानी कुल कुल दायरा 16 मीटर का है। इस दायरे में ऊपर की तरफ निर्माण प्रतिबंधित रहेगा। 10 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई के भवन नहीं बनवाए जा सकेंगे। इसकी निगरानी कराई जाएगी। अलग-अलग जोन के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
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रोपवे का किराया कम होगा, बजट होटल बनेगा
उपाध्यक्ष ने बताया कि रोपवे का किराया काफी कम होगा। इसकी नियमावली बन रही है। इसके आर्थिक विकास मॉडल की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। सभी स्टेशनों पर कॉमर्शियल गतिविधियां शुरू की जाएंगी। चारों स्टेशनों पर दो लाख स्क्वायर फीट में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की जाएंगी। बजट होटल बनेगा। दुकानों और होटलों के लिए अभी से काफी डिमांड आ रही है। आवंटन की प्रक्रिया नीलामी से पूरी की जाएगी।
दूरी 3.8 किलोमीटर, लागत 815.58 करोड़
उपाध्यक्ष ने बताया कि भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्वतमाला प्रोजेक्ट के तहत एशिया का पहला अर्बन रोपवे प्रोजेक्ट शहरी परिवहन (अर्बन ट्रांसपोर्ट) के रूप में काशी में शुरू किया है। यह प्रोजेक्ट 3.8 किलोमीटर का है जो वाराणसी कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक रहेगा। इसके बीच कैंट के अलावा काशी विद्यापीठ, रथयात्रा स्टेशन हैं। गिरजाघर एक टेक्निकल स्टेशन है। इस प्रकार कुल 5 स्टेशन और 29 टावर बनाए जाएंगे। इस परियोजना की कुल लागत 815.58 करोड़ निर्धारित हुई है। इसमें 15 वर्षों का ओएंडएम (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) भी शामिल है।
ये है खासियत
- रोपवे से प्रति घंटे में 3000 लोग आ-जा सकते हैं। यानी 16 घंटे के संचालन में प्रतिदिन लगभग 96 हजार लोगों का आना-जाना होगा।
- यह क्षमता भारत के सबसे बड़े गुलमर्ग रोपवे की तुलना में 2.5 गुना अधिक है।
- हाई पावर ड्राइव्स एवं स्टैंडबाई सिस्टम्स, बड़े टर्मिनल्स, एडवांस्ड कंट्रोल, कम्युनिकेशन्स सिस्टम, बेहतर इवैक्यूएशन और रेस्क्यू प्रावधान हैं।
- लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और हाई क्वालिटी मेटेरियल्स (गंडोला और रोप्स सहित) का उपयोग किया जा रहा है।
- इमरजेंसी के लिए तीन लेयर ऑफ सेफ्टी बनाई गई है
- रोपवे घनी आबादी वाले अर्बन एरिया से होकर गुजरता है और मौजूदा बिल्डिंग्स के ऊपर से जाता है।
- कुल लागत में 15 वर्षों का ऑपरेशन और मेंटेनेंस शामिल है।
- इसमें ऑपरेशन, इलेक्ट्रिसिटी, जेनसेट, मैनपावर, स्टेशन सिक्योरिटी, क्लीनलीनेस, इक्विपमेंट्स की रिपेयर और मेंटेनेंस सम्मिलित हैं।