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10 माह में ही टूट के खत्म हो गई सड़क
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वाराणसी। नगर निगम की ओर से बनाई गई शहर की सड़कें खस्ताहाल हो गई हैं। बारिश से इन खस्ताहाल सड़कों की हालत और भी बदतर हो गई है। नाटी इमली भरत मिलाप मैदान से जैतपुरा मार्ग पिछले साल दशहरा से पहले बनाई गई थी। एक किमी की सड़क को 12 लाख रुपए की लागत से बनवाने के बाद भी एक साल तक नहीं चली।
शहरवासियों को इस सड़क से आवागमन करना काफी मुश्किलों भरा हो गया है। खासकर वाहन चालकों, पैदल आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस सड़क की दुर्दशा से जनता परेशान है। जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की भी खुलेआम अवहेलना की जा रही है। शिकायत करने के बाद भी जनता को अब तक राहत नहीं मिली। वाहनों की आवाजाही और बारिश के चलते चलने लायक भी सड़क नहीं बनाई गई है। इस मार्ग पर इतने गड्ढे हैं कि सड़क का कहीं पता तक नहीं है। नगर निगम के मुख्य अभियंता सूरज पाल सिंह ने कहा कि बारिश के बाद सभी सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी।
सड़क बनने के साथ उखड़ने लगती है। सड़क बनाने में मानकों का ध्यान रखा जाए तो इतनी जल्दी सड़कें खराब नहीं हों। आम जनता की सहूलियत का ध्यान नहीं रखा जाता है। -धर्मराज भारद्वाज
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एक तरफ सड़क बना के चले जाते हैं। दूसरे दिन से गिट्टियां उखड़ने लगती हैं। कम अलकतरा डालते हैं कि गिट्टियों में पकड़ नहीं होती है। सड़क निर्माण में मानक से काम होना चाहिए। -नवरत्न कुमार
शहर की सड़कें कभी बेहतर नहीं होतीं। बनने के एक हफ्ते के बाद सड़क खराब होनी शुरू हो जाती है। इसके बाद खाली पैच वर्क होता है। जिससे आम जनता झेलती है। -राजन तिवारी
शहर की सड़कें कामचलाऊ बनाई जाती हैं। एक बार बनाने के बाद खाली खुदाई होती है। जिसके चलते सड़क और खराब हो जाती है और जनता को तकलीफ झेलना पड़ता है।-विकास राय
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शहरवासियों को इस सड़क से आवागमन करना काफी मुश्किलों भरा हो गया है। खासकर वाहन चालकों, पैदल आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस सड़क की दुर्दशा से जनता परेशान है। जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की भी खुलेआम अवहेलना की जा रही है। शिकायत करने के बाद भी जनता को अब तक राहत नहीं मिली। वाहनों की आवाजाही और बारिश के चलते चलने लायक भी सड़क नहीं बनाई गई है। इस मार्ग पर इतने गड्ढे हैं कि सड़क का कहीं पता तक नहीं है। नगर निगम के मुख्य अभियंता सूरज पाल सिंह ने कहा कि बारिश के बाद सभी सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी।
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सड़क बनने के साथ उखड़ने लगती है। सड़क बनाने में मानकों का ध्यान रखा जाए तो इतनी जल्दी सड़कें खराब नहीं हों। आम जनता की सहूलियत का ध्यान नहीं रखा जाता है। -धर्मराज भारद्वाज
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एक तरफ सड़क बना के चले जाते हैं। दूसरे दिन से गिट्टियां उखड़ने लगती हैं। कम अलकतरा डालते हैं कि गिट्टियों में पकड़ नहीं होती है। सड़क निर्माण में मानक से काम होना चाहिए। -नवरत्न कुमार
शहर की सड़कें कभी बेहतर नहीं होतीं। बनने के एक हफ्ते के बाद सड़क खराब होनी शुरू हो जाती है। इसके बाद खाली पैच वर्क होता है। जिससे आम जनता झेलती है। -राजन तिवारी
शहर की सड़कें कामचलाऊ बनाई जाती हैं। एक बार बनाने के बाद खाली खुदाई होती है। जिसके चलते सड़क और खराब हो जाती है और जनता को तकलीफ झेलना पड़ता है।-विकास राय