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बालश्रम से मुक्त किशोरों में मानसिक अस्वस्थता का खतरा

Fri, 25 Feb 2022 12:43 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 25 Feb 2022 12:43 AM IST
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Risk of mental illness in adolescents free from child labor
बालश्रम से मुक्त हुए किशोरों में मानसिक अस्वस्थता का खतरा अधिक रहता है। विकसित देशों में किए गए पिछले शोधों से पता चला है कि जिन बच्चों को दुर्व्यवहार (बुरे अनुभवों) का सामना करना पड़ता है, वे ऐसे वयस्कों के रूप में बड़े होते हैं, जिनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बहुत अच्छा नहीं होता। हालांकि, निम्न-मध्यम आय वर्ग वाले एशियाई देशों में इस विषय बहुत कम ही प्रकाशित आंकड़े उपलब्ध हैं। बीएचयू, किंग्स कॉलेज और ब्रूनेल विश्वविद्यालय, लंदन, के शोधकर्ताओं के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने जो अध्ययन किया है, उसमें अहम निष्कर्ष निकला है।
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बीएचयू मनोविज्ञान विभाग में प्रो. राकेश पांडेय ने जो शोध किया है, उसमें विदेशी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भी शामिल हैं। भारत में होने वाले इस शोध में बीएचयू की टीम में डॉ.तुषार, डॉ. योगेश आर्य भी शामिल हैं। इसके अलावा यूके की टीम प्रो. वीना कुमारी भी शामिल हैं। मेडिकल रिसर्च काउंसिल यूके और डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी इंडिया के आपसी सहयोग से यह शोध किया। भारत के 132 किशोरों पर शोध किया गया, जिनकी उम्र 12 से 18 साल थी। इन किशोरों में 83.36 प्रतिशत बच्चे एक या एक से अधिक बाल दुर्व्यवहार से ग्रसित मिले। उनका शोषण भी हुआ। शोध में पाया गया कि परिवार के बाहर के लोगों ने ही शारीरिक और भावनात्मक शोषण किया। यह भी मिला कि बाल-श्रम बचपन के प्रतिकूल एवं कटु अनुभवों की एक विस्तृत शृंखला से जुड़ा है, इसमें, दुर्व्यवहार, उपेक्षा और प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष उत्पीड़न इत्यादि शामिल है।
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