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दक्षिण एशिया के पहले अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र में स्वाद, सुगंध और बनावट पर होगा शोध 

Sun, 30 Dec 2018 11:31 AM IST
shashikant misra न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: shashikant misra Updated Sun, 30 Dec 2018 11:31 AM IST
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Research on rice taste, fragrances and texture in center
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया उद्घाटन - फोटो : amar ujala
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पित बनारस के चांदपुर में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान में होने वाले शोध सुविधा दक्षिण एशिया और उप सहारा अफ्रीका में चावल उत्पादन की राष्ट्रीय अनुसंधान क्षमता को और मजबूत करेगी। फसल उत्पादन, बीज की गुणवत्ता, चावल के पोषण मूल्य में सुधार के लिए उन्नत अनुसंधान, शिक्षण व सेवाएं देगी।
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केंद्र किसानों के ज्ञान और आय बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय भागीदारी के साथ काम करेगा। शनिवार को राष्ट्रीय बीज अनुसंधान केंद्र परिसर में खुले आईआरआरआई (इरी) के केंद्र में लोकार्पण के अवसर पर प्रधानमंत्री ने संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ बातचीत की और प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया।
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93 करोड़ की लागत से खुला केंद्र क्षेत्र में चावल उगाने वाले देशों की अनुसंधान विशेषज्ञता और क्षमता को मजबूत करेगा। सतत विकास लक्ष्यों में योगदान करेगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन राइस वैल्यू एडिशन, आधुनिक प्रयोगशालाओं का सूट जहां अनाज के मूल्यांकन, गुणवत्ता और पोषण मूल्य के लिए किया जाता है।
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अनाज के स्वाद, बनावट और सुगंध के लिए संवेदी मूल्यांकन किया जाता है। खेती की नवीनतम तकनीकों और नवाचारों के बारे में वैज्ञानिकों को सिखाएगी। डिजिटल फसल की निगरानी और मूल्यांकन के लिए प्रयोगशालाएं, विभिन्न प्रकार के परीक्षण होंगे। 

अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के शोध कार्य 

Research on rice taste, fragrances and texture in center
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र में पीएम - फोटो : amar ujala
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान कम सिंचाई में ज्यादा पैदावार वाले धान की प्रजातियों को विकसित करेगा। किसानों को मौसम की मार से बचाने के लिए बाढ़ और सूखा रोधी धान की प्रजातियां भी तैयार की जा रही हैं। दुनिया भर में धान की खेती वाले क्षेत्रों में होने वाली अत्याधुनिक तकनीक का प्रदर्शन भी किया जाएगा। कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले धान की पैदावार के लिए शोध किए जाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के धान को भारत सहित अन्य देशों के पर्यावरण के हिसाब से तैयार यहां की प्रजातियों को विदेश में भी भेजा जाएगा। अफ्रीका में कम पानी में पैदा होने वाले धान की प्रजातियों को यहां के अनुकूल बनाने पर काम चल रहा है। किसानों को जागरूक करने के लिए विशेष प्रशिक्षण के साथ नई तकनीक से भी उन्हें रू-ब-रू कराया जाएगा।

लोकार्पण के अवसर पर राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. महेंद्र नाथ पांडेय, प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, साउथ एशियन एसोसिएशन फार रीजनल कोऑपरेशन के प्रतिनिधि सहित कई वैज्ञानिक मौजूद रहे।  

पीएम ने ली पके चावल की सुगंध 

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अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र के लोकार्पण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन प्रयोगशालाएं देखीं। इस दौरान पीएम ने धान की कई प्रजातियों को देखा और पके चावल की सुगंध भी ली। मीलिंग कुकिंग लैब में पीएम ने देखा कि किस प्रकार खाने वाले चावल की टूटन को कम करने पर शोध किया जा रहा है।

न्यूट्रीशनल लैब में  धान में माइक्रो न्यूट्रेंट बरकरार रखने के लिए होने वाले कार्य जाने। सेंसिरली लैब में पीएम ने देखा कि चावल बनने के बाद उसका एरोमा और चावल की मेडिसिनल वैल्यू को किस प्रकार बरकरार रखा जाता है। ब्लैक एंड ब्राउन राइस को किस प्रकार से और बेहतर किया जा सकता है।

संस्थान में पीएम ने वैज्ञानिकों से बातचीत के दौरान पूछा कि आप लोग चावल पर शोध करते हो, लेकिन चावल खाके आए हो या नहीं। कई वैज्ञानिकों ने कहा कि हां खाके आए हैं। इसके बाद पीएम ने पूछा कि जिन लोगों को डायबिटीज है, उन लोगों की चावल खाने की लालसा पूरी करेंगे। वैज्ञानिकों ने कहा कि हां पूरी होगी। इस पर शोध होगा। 
 

शुगर फ्री चावल पर भी होगा शोध 

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चावल अनुसंधान संस्थान में शुगर फ्री चावल पर भी शोध होगा। अलग-अलग क्षेत्रों में पैदा होने वाले चावल पर अध्ययन कर पौष्टिक चावल तैयार किया जाएगा। इसमें उच्च आयरन और जिंक के तत्वों को विकसित करने के साथ ग्लाइसेमिक इंडेक्स, आर्सेनिक, कैडमियम स्तर को कम किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र व बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के बीच समझौता भी हुआ। इसके तहत बीएचयू और केंद्र मिलकर कृषि शिक्षा और शोध पर काम करेंगे। इस दौरान बीएचयू कुलपति प्रो. राकेश भटनागर और संस्थान के महानिदेशक डा. मैथ्यू मोरल के बीच एमओयू का आदान प्रदान हुआ।

इसके पहले भी संस्थान की ओर से बीएचयू में कई कार्यक्रम कराए गए थे। पीएम के जाने के बाद सभी लोगों ने बैठकर आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की। माना जा रहा है कि यह केंद्र दक्षिण एशिया और अफ्रीका के चावल विज्ञान को आगे बढ़ाएगा।
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