Research: शुगर मरीजों के लिए खुशखबरी...13 दिन में भरेंगे मधुमेह से हुए घाव, पेटेंट के लिए भेजा; जानें पूरी बात
Varanasi News: विज्ञानियों द्वारा बनाया गया स्थिर 'सॉल्यूशन' और बॉयोडिग्रेडेबल 'पैच' न सिर्फ किसी भी प्रकार के घाव, ऑपरेशन के बाद लगे चीरे में उपयोगी साबित होगा बल्कि मधुमेह रोगियों को होने वाले अल्सर या उनके घावों को ठीक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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आईआईटी बीएचयू ने मधुमेह से हुए घावों को तेजी से भरने वाली इंजीनियर्ड सेल थेरेपी विधा को खोजने पर पेटेंट आवेदन किया गया है। संस्थान के स्कूल ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के शोधकर्ताओं ने मानव कोशिकाओं के साथ ऐसी इंजीनियरिंग की है कि वे खुद ही प्रतिरोधकता बढ़ाने वाले तीन तरह के प्रोटीन निकालने लगें। इससे मात्र 13 ही दिन में घाव भर गए जबकि डायबिटिक घावों को ठीक होने में ज्यादा समय लगता है। क्योंकि शरीर में ग्लूकोज का स्तर काफी ज्यादा बना रहता है।
आईआईटी बीएचयू का यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल केमिकल इंजीनियरिंग में प्रकाशित हो चुका है। इस शोध का नेतृत्व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुदीप मुखर्जी और पीएचडी शोधार्थी मलय नायक की ओर से किया गया। उन्होंने बताया कि कोशिकाओं के साथ ऐसा काम किया गया कि वे प्रोटीन बनाकर इम्युनिटी बढ़ाएं, इनमें वीईजीएफए प्रोटीन नई रक्त वाहिकाओं के निर्माण को बढ़ावा देता है।
दूसरा फैक्टर VIII खून के बहने को नियंत्रित करता है और तीसरा आईएल-10 सूजन कम करता है। इन इंजीनियर्ड कोशिकाओं को एल्जिनेट हाइड्रोजेल माइक्रोकैप्सूल्स के साथ मिलाया गया, जो उन्हें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से बचाते हैं और घाव पर लगातार उपचारकारी प्रोटीन का स्राव करते रहते हैं।
नहीं निकालने पड़ेंगे अंग
मधुमेह से पीड़ित लोगों के घाव भरने में काफी कठिनाई होती है क्योंकि शरीर में ग्लूकोज का स्तर लंबे समय तक उच्च स्तर पर बना रहता है। सामान्य घाव कुछ दिनों में भर जाते हैं, जबकि डायबिटिक घाव कई महीनों तक बने रहते हैं, जिससे गंभीर संक्रमण और कई मामलों में अंग निकालने तक की नौबत आ जाती है।
चिंताजनक तथ्य यह है कि हर 20 सेकंड में दुनिया में एक व्यक्ति डायबिटिक घावों के कारण अपना अंग खो देता है। डॉ. मुखर्जी ने आगे जानकारी दी कि डायबिटिक चूहों पर यह परीक्षण किया गया है। यह थेरेपी अभी केवल पशु मॉडल्स पर परखी गई है, फिर भी यह एक ऑफ-द-शेल्फ घाव उपचार समाधान है।
यह न केवल भारत की स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि लाखों मरीजों के जीवन में आशा की नई किरण जगाता है। संस्थान इंजीनियरिंग, चिकित्सा और जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों के संगम पर कार्य करते हुए समाजोपयोगी, अत्याधुनिक अंतरविषयी अनुसंधान को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। - प्रो अमित पात्रा, निदेशक, आईआईटी बीएचयू