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रामनगर रामलीला की शुरुआत: मशाल की रोशनी में गूंजेंगी मानस की चौपाइयां, एक महीने तक राममय रहेगा रामनगर

Fri, 25 Sep 2026 04:58 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Fri, 25 Sep 2026 04:58 PM IST
सार

रामनगर की रामलीला की शुरुआत आज से हो रही है। इस लीला में न कोई बनावटीपन दिखेगा और न तड़क-भड़क। रात के अंधेरे में महताबी लाल-पीली-श्वेत रोशनी या फिर तीसी के तेल से जलती मशाल की रोशनी में लीला दिखेगी। 

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Ramnagar Ramlila Start Verses from Manas to Resonate in Glow of Torches in Varanasi
रामलीला के लिए तैयार धनुष-बाण और वस्त्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अगर आप त्रेता युग को महसूस करना चाहते हैं, उस युग की सबसे विशिष्ट घटना का साक्षात्कार करने का मन है तो काशी के रामनगर आइए। उठाइए एक पीढ़ा, साथ रखिये रामचरितमानस की पोथी और एक टॉर्च। बारिश से बचने के जतन के साथ चले आइए और यहां पूरे माह तक ठौर बना लीजिए। यकीन मानिए आपको त्रेता युग में होने का आनंद मिलेगा। यह सब अनुभूतियां आपको शुक्रवार से शुरू हो रही रामनगर की रामलीला में मिलेंगी। 

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इस लीला में न कोई बनावटीपन दिखेगा और न तड़क-भड़क। रात के अंधेरे में महताबी लाल-पीली-श्वेत रोशनी या फिर तीसी के तेल से जलती मशाल की रोशनी में लीला दिखेगी। लाउडस्पीकर के बिना मानस की चौपाइयां-संवाद मौलिक रूप में हर कानों में मिश्री घोलती रहेगी। 
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हजारों श्रद्धालुओं को पात्रों के सीधे संवाद सुनने का सुखद अनुभव होगा। भक्तों के कंधे पर सवार होकर राम-सीता, लक्ष्मण-हनुमान लीला स्थल की ओर तो शाही परिवार किले की चहारदीवारी से बाहर प्रभु वंदन के लिए निकलेंगे। इस लीला के साथ लीला शिवपुर और जाल्हूपुर की प्राचीन रामलीला भी शुरू हो रही है।

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Ramnagar Ramlila Start Verses from Manas to Resonate in Glow of Torches in Varanasi
रामनगर रामलीला की शुरुआत - फोटो : अमर उजाला
रामनगर की दूरी को देखकर शुरू की शिवपुर की रामलीला
शिवपुर रामलीला भी करीब 90 साल पुरानी है। लीला के पूर्व रामलीला समिति एक गहरी धार्मिक परंपरा का निर्वहन करता है। समिति के पदाधिकारी व सदस्य पंचक्रोशी परिक्रमा के चौथे पड़ाव पर स्थित ऐतिहासिक पांचों पांडव महादेव मंदिर पहुंचते हैं और रामलीला का विवरण व निमंत्रण देकर पूजन करते हैं। यह परंपरा को पीढ़ियों से चली आ रही है। बुजुर्ग लालचंदन यादव व नंगू यादव ने बताया कि तब भी रामनगर की लीला प्रसिद्ध थी। मगर, इतना दूर पड़ता था कि लोगों ने सोचा कि क्यों न यहां पर लीला शुरू की जाए। यहां बृहस्पतिवार को मुकुट पूजा हुई। शुक्रवार से लीला शुरू होगी।

चार संतों की परंपरा से जुड़ी 300 साल पुरानी जाल्हूपुर की रामलीला
टूड़ी नगर जाल्हूपुर की ऐतिहासिक रामलीला करीब 300 साल पुरानी है। यह रामलीला आज भी रामचरितमानस की मूल परंपरा और धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप होती है। एक माह तक चलने वाली इस रामलीला को संत शिरोमणि कच्चा बाबा ने शुरू कराया। बुजुर्गों के अनुसार कच्चा बाबा के बाद संत टूड़ी बाबा के सानिध्य में रामलीला हुई। इसके बाद संत रामरमी सरकार ने रामलीला को और भव्यता प्रदान की। रामरमी सरकार के समाधि लेने के बाद उनके पुत्र आनंद देव सरकार के सानिध्य में यह परंपरा चली आ रही है। जाल्हूपुर की रामलीला में पात्रों के चयन की भी अलग परंपरा है। रामलीला कमेटी ब्रह्मदेव पांडेय ने बताया कि भगवान राम की भूमिका के लिए ब्राह्मण परिवार के कक्षा सातवीं या आठवीं, लक्ष्मण के लिए कक्षा छठवीं या सातवीं के छात्र को चुना जाता है। उनकी उम्र 11 से 12 वर्ष तक होनी चाहिए। रावण और मेघनाथ की भूमिका निभाने वाले पात्र का ब्राह्मण होने के साथ मानस का ज्ञाता होना जरूरी है।
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